कोरोना की मार से चरमरा गया पर्यटन कारोबार

कोरोना महामारी के कारण उत्तराखंड में औद्योगिक तथा पर्यटन व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित हुआ है जिसका असर राज्य की आर्थिक स्थिति पर बहुत ज्यादा पड़ा है।

Uttrakhand
सांकेतिक फोटो।

कोरोना महामारी के कारण उत्तराखंड में औद्योगिक तथा पर्यटन व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित हुआ है जिसका असर राज्य की आर्थिक स्थिति पर बहुत ज्यादा पड़ा है। दरअसल उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पर्यटन उद्योग और औद्योगिक क्षेत्र में विशेष छूट दी गई थी जिस कारण यहां पर भारी उद्योगों के साथ सूक्ष्म लघु मध्यम उद्योग भी बड़ी तादाद में लगे और स्थानीय लोगों को भारी तादाद में रोजगार मिला।

परंतु कोरोना महामारी के भीषण दौर में यहां के उद्योग धंधे और पर्यटन व्यवसाय चौपट हुआ जिस कारण बेरोजगारी बढ़ी। औद्योगिक क्षेत्र 60 फीसद और पर्यटन व्यवसाय के क्षेत्र में होटल-ट्रैवल 85 फीसद प्रभावित हुआ जिस कारण इस क्षेत्र से राज्य सरकार को मिलने वाला राजस्व काफी घट गया।

उत्तराखंड के पर्यटन विभाग के उपनिदेशक योगेंद्र कुमार गंगवार के मुताबिक राज्य में 3 हजार 124 होटल है तथा लगभग 3 हजार 200 होमस्टे केंद्र हैं जो कोविड के कारण तीन महीने बुरी तरह प्रभावित रहे। एक डेढ़ महीने से यह व्यवसाय पुन: शुरू हुआ परंतु लोगों का आना बेहद कम रहा।

उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने बताया कि राज्य में कोरोना के प्रभाव के कम होने पर गर्मियों के सीजन में एकाएक पर्यटकों की संख्या बढ़ी और 50 हजार पर्यटक राज्य में रोजाना आने लगे परंतु पर्वतीय क्षेत्रों खासकर नैनीताल और मसूरी में पर्यटकों की संख्या एकदम से बढ़ने लगी तो वहां पर कोविड-19 के दिशा निर्देशों का पालन कराने के लिए राज्य सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी और 72 घंटे पूर्व की कोरोना की आरटीपीसीआर जांच आवश्यक की गई। साथ ही उत्तराखंड राज्य में आने के लिए राज्य की स्मार्ट उत्तराखंड की वेबसाइट में पंजीकरण कराना जरूरी किया गया। साथ ही राज्य सरकार ने जिन व्यक्तियों ने टीकाकरण का कोर्स पूरा कर लिया है उन्हेंआरटी पीसीआर जांच की जांच से मुक्त रखा गया।

राज्य में मई जून के महीने में पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह बंद रहा। तब कोरोना का राज्य में बहुत ज्यादा प्रभाव था। जुलाई के प्रथम सप्ताह में पर्यटकों ने आना शुरू किया परंतु 24 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन से राज्य में कावड़ मेले पर पाबंदी लगाने से पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की तादाद में भारी कमी आई। चार धाम यात्रा कोरोना महामारी के कारण राज्य सरकार ने अप्रैल में बंद करने का निर्णय लिया था परंतु जून के अंतिम सप्ताह में आंशिक रूप से शुरू करने का फैसला लिया। बाद में नैनीताल हाईकोर्ट ने कोरोना के फिर से राज्य में बढ़ने की संभावना को देखते हुए और राज्य सरकार द्वारा चार धाम यात्रा के दौरान कोरोना के कारण सावधानियां पूरी तरह से ना बरतने के कारण चार धाम यात्रा पर पाबंदी लगा दी।

राज्य सरकार नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गई है। चार धाम यात्रा पर पूरी तरह पाबंदी है। इसका प्रभाव होटल व्यवसायियों के अलावा स्थानीय दुकानदारों, पंडे-पुजारियों, ट्रेवल से जुड़े व्यावसायियों तथा चार धाम यात्रा में घोड़ा खच्चर चलाने वाले लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ा है। राज्य सरकार ने पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए इस साल 200 करोड़ों रुपए की राहत पैकेज की घोषणा की है। होटल व्यवसाय से जुड़े प्रदीप शर्मा का कहना है कि राज्य सरकार की घोषणा सिर्फ खोखली ही साबित हो रही है।

राज्य में सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योगों की संख्या 68 हजार 888 है और जिनमें पूंजी निवेश 14 हजार 463 करोड़ रुपए का है और करीब 3 लाख 46 हजार 441 लोगों को रोजगार मिला है। वहीं भारी उद्योगों की संख्या राज्य में करीब ढाई सौ है। उत्तराखंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष हरेंद्र गर्ग के मुताबिक उत्तराखंड में इन उद्योगों से 2 हजार करोड़ का टर्नओवर कोरोना काल से पहले होता था परंतु पिछले साल कोरोना की पहली लहर में उद्योगों पर 60 से 65 फीसद प्रभाव पड़ा। परंतु कोरोना की दूसरी लहर सबसे ज्यादा खतरनाक रही और औद्योगिक उत्पादन 80 फीसद तक प्रभावित हुआ। उत्तराखंड की उद्योगपतियों की सेवा एसोसिएशन के अध्यक्ष हिमेश कपूर के मुताबिक राज्य में औद्योगिक क्षेत्र राज्य को 35 फीसद राजस्व प्रदान करता है। कोरोना काल के कारण औद्योगिक क्षेत्र से राज्य सरकार को मिलने वाले राजस्व में भारी कमी आई तथा बेरोजगारी भी तेजी से बढ़ी।

औद्योगिक क्षेत्र पर विशेष बल:

उत्तराखंड के औद्योगिक मंत्री गणेश जोशी के अनुसार राज्य के औद्योगिक क्षेत्र को फिर से खड़ा करने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। सरकार जल्दी ही औद्योगिक पैकेज की घोषणा भी करने जा रही है। इसमें सूक्ष्म लघु मध्यम उद्योग को भारी राहत दी जाएगी।

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