इटावा जनपद के भरेह इलाके के कायंछी गांव में आजादी के बाद पहली बार सड़क निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। लोक निर्माण विभाग ने सड़क के निर्माण के लिए मंजूरी प्रदान कर दी है, जिससे गांववासियों में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कच्ची सड़क के जरिए अब गांव तक नहीं पहुंचना पड़ेगा और गांव मुख्य मार्ग से जुड़ जाएगा।

जिलाधिकारी श्रुति कुमार शुक्ल ने बताया कि एक लंबे अरसे से इस दुर्गम गांव में सड़क निर्माण के लिए राज्य सरकार से पत्राचार के साथ-साथ अधिकारियों से संपर्क स्थापित किया जा रहा था। मंगलवार दोपहर बाद सड़क निर्माण की अनुमति लोक निर्माण विभाग की ओर से प्रदान कर दी गई है।

राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी की जिला वन अधिकारी चांदनी सिंह ने बताया कि कायंछी गांव के लिए सड़क निर्माण की एनओसी प्रक्रिया पूरी कर केंद्र को भेज दी गई है। अब विभाग की ओर से कोई अड़चन नहीं है। अन्य गांवों के आवेदन मिलते ही उन्हें भी तत्काल शासन को भेजा जाएगा।

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि सड़क निर्माण की अनुमति विभागीय स्तर पर मिल गई है। करीब तीन करोड़ रुपए के आसपास बजट स्वीकृत किया गया है और पहली किस्त के रूप में 19 लाख रुपए जारी किए गए हैं।

भरथना सुरक्षित विधानसभा से समाजवादी पार्टी के विधायक राघवेंद्र कुमार गौतम ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर के कई दफा विधानसभा में सवाल उठा चुके हैं। सड़क निर्माण की अनुमति मिलने के बाद उन्होंने खुशी जताई है। इस गांव में सड़क निर्माण के लिए समाजवादी पार्टी के सांसद जितेंद्र दोहरे भी लोकसभा में सवाल उठा चुके हैं। कायंछी गांव निवासी सुधीर सिंह ने बताया कि गांव के लिए सड़क न होने से जनता नारकीय जीवन जी रही है, जो लोग सक्षम हैं वह गांव छोड़ रहे हैं। जमीन होने के कारण लोग गांव में रहने को मजबूर हैं।

अंग्रेज अफसर भी नहीं पहुंच पाए थे इस गांव में

चंबल इलाके के इस गांव की पहचान इसलिए भी है कि आजादी पूर्व अंग्रेज अफसर क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए बीहड़ में जरूर गए लेकिन इस गांव तक पहुंच ही नहीं पाए क्योंकि इस गांव के पहुंचने के लिए कोई रास्ता ही नहीं था। ठीक ऐसे ही हालत आजादी के बाद सड़क निर्माण की अनुमति होने तक भी बने रहे।

सत्ताधारी दल और विपक्ष के नेताओं की ओर से सड़क निर्माण की वकालत लगातार एक लंबे अरसे से की जाती रही है। मुख्य मार्ग से करीब ढाई किलोमीटर दूर इस गांव की वह बदहाली है कि आजादी के बाद इस गांव में सड़क का निर्माण नहीं हो सका।

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