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नेताजी ने संभाली एका की कमान

उस बाहरी को लेकर अब भी रार है जिसे शिवपाल अपना और अखिलेश पराया ठहरा चुके हैं। जो सपा में पैदा हुए मनमुटाव का सूत्रधार है।

Author लखनऊ | September 17, 2016 2:14 AM
समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव

उस बाहरी को लेकर अब भी रार है जिसे शिवपाल अपना और अखिलेश पराया ठहरा चुके हैं। जो सपा में पैदा हुए मनमुटाव का सूत्रधार है। समाजवादी पार्टी (सपा) में कभी बेहद अपने रहे अमर सिंह नाम के इस बाहरी पर अगले दो दिन में यह फैसला होगा कि उनसे किनारा किस अंदाज में किया जाए। शुक्रवार को मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल यादव के समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पद से दिए गए त्यागपत्र को नामंजूर कर दिया। लेकिन अखिलेश ने कहा कि टिकट का बंटवारा करते समय उनके अधिकारों का भी पूरा सम्मान हो। गायत्री प्रजापति की मंत्रिमंडल में वापसी के रास्ते साफ कर दिए। शिवपाल मंत्री बने रहेंगे? इसका फैसला उन्हें ही करना है। अखिलेश उनका त्यागपत्र गुरुवार को ही लौटा चुके हैं।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बार-बार अमर सिंह को बाहरी ठहराए जाने के बाद भी चचा शिवपाल उन्हें बाहरी मानने को तैयार नहीं हैं। न ही वे यह स्वीकार कर रहे हैं कि समाजवादी पार्टी और उत्तर प्रदेश सरकार में अस्थिरता पैदा करने में अमर सिंह की कोई भूमिका थी। शिवपाल ने अमर सिंह को बीच वाले की संज्ञा देने पर अखिलेश को नसीहत दी कि उनके कुछ कबीना मंत्री बीच वाले हैं। वे काम नहीं करते, बीच वाली भूमिका अदा करते हैं। शुक्रवार को दिन भर मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव के आवास और समाजवादी पार्टी कार्यालय के बीच घूमते सियासी घटनाक्रम के बीच पार्टी दफ्तर पहुंचे नेताजी ने एलान किया कि शिवपाल प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे। गायत्री प्रजापति की अखिलेश मंत्रिमंडल में वापसी होगी। शिवपाल सेलिए गए विभाग भी उन्हें वापस होंगे। आत्मविश्वास से लबरेज दिख रहे मुलायम सिंह यादव ने कहा कि उनके रहते पार्टी में फूट कभी पड़ नहीं सकती। अखिलेश मेरी बात कभी टाल नहीं सकते।

तीन दिन से उत्तर प्रदेश में पलपल बदल रहे राजनीतिक घटनाक्रमों में पनपी तल्खी को दूर करने की तमाम कोशिशें अभी तक सामान्य नहीं हुई हैं। अमर सिंह को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपना मानने को किसी भी तरह तैयार नहीं हैं। शुक्रवार की सुबह सपा के राष्टÑीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से हुई 20 मिनट की बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि पिता-पुत्र और परिवार के बीच जो बाहरी आने की कोशिश करेगा, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नेताजी ने अखिलेश यादव की बात पर अपनी सहमति जताई है। इस बात से स्पष्ट है कि खुद को मुलायमवादी बताने वाले अमर सिंह की दखलंदाजी अब न ही समाजवादी पार्टी में चलेगी और न ही अखिलेश यादव की सरकार में। अखिलेश ने नेताजी से यह भी कहा कि मुख्यमंत्री होने की वजह से समाजवादी पार्टी में टिकट बांटने में उनको भी अधिकार दिया जाए।

फिलहाल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को काम करने में दिक्कते पेश करने के सभी कारणों के सार्वजनिक हो जाने के बाद भी अमर सिंह पर शिवपाल किसी भी हाल में झुकने को तैयार नहीं हैं। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री और शिवपाल यादव के बीच बीते 24 घंटे के दौरान दो मर्तबा हुई बातचीत के बाद सभी मसलों पर सहमति तो बनी लेकिन असल वजह, अमर प्रकरण अब भी जस का तस मौजूद है। समाजवादी पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि अमर सिंह को लेकर अखिलेश यादव, प्रो. राम गोपाल यादव और मोहम्मद आजम खान पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को समझा पाने में बहुत हद तक कामयाब हो गए हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि अगले दो दिन में मुलायम सिंह यादव अमर सिंह से पार पाने का कौन सा रास्ता अख्तियार करते हैं। लेकिन इतना तय है कि शिवपाल यादव को टिकट बांटने में अखिलेश यादव की पसंद अभी भी मंजूर नहीं है। उन्होंने एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में कहा भी कि टिकट बांटने का काम पार्टी के राष्टÑीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी है। उसमें कोई दखलंदाजी नहीं कर सकता। उन्होंने यह कहने में भी संकोच नहीं किया कि अखिलेश यादव में अनुभव की कमी है। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनमें बदलाव आ गया है। शिवपाल के इस बयान से साफ है कि वे अभी तक मुख्यमंत्री को उनकी तमाम गंभीरताओं के बावजूद अनुभवहीन ठहराने की कोशिश में हैं। उनकी यही कोशिश यह संकेत दे रही है कि समाजवादी पार्टी में शीतयुद्ध अब तक थमा नहीं है।

शिवपाल को वापस मिले सभी विभाग, प्रजापति की वापसी
अखिलेश यादव ने अपना फैसला बदलते हुए अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव को उनसे लिए गए सारे विभाग वापस देने और बर्खास्त खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को फिर से मंत्रिमंडल में शामिल करने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट में कहा कि शिवपाल सिंह यादव को उनके विभाग वापस कर दिए जाएंगे।

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