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सड़क पर श्रद्धालु: परंपरा के पक्ष में सड़कों पर उतरे अयप्पा के भक्त

भाजपा नीत राजग की एक विरोध रैली पथानमथिट्टा के पंडालम से शुरू हुई और 15 अक्तूबर को सचिवालय के सामने खत्म होगी और इसके साथ प्रदर्शन किया जाएगा। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पीएस श्रीधरन पिल्लई और भारत धर्म जन सेना (बीडीजेएस) के अध्यक्ष टी वेल्लापल्ली ने मार्च का नेतृत्व किया।

Author October 11, 2018 5:59 AM
सरकार इस बात पर कायम है कि वह शीर्ष न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगी।

दो दिन पहले पंरपरावादी सगठनों पर मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन के हमले के बाद बुधवार को सबरीमला के भक्त सड़क पर उतर आए। उन्होंने हिंदू परंपरा पर अदालती दखल का विरोध किया और कहा कि ‘सबरीमला में भगवान अय्यप्पा मंदिर की पंरपरा की रक्षा करो’। पंरपरावादियों के इस रुख के बाद विजयन सरकार सांसत में पड़ गई है। सुप्रीम कोर्ट मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश का आदेश दे चुका है और राज्य सरकार इस आदेश को लागू करने को बाध्य है। सरकार इस बात पर कायम है कि वह शीर्ष न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगी।

बहरहाल अदालती आदेश को लागू करने के राज्य की एलडीएफ सरकार के फैसले के खिलाफ हिंदूवादी संगठन बुधवार को सड़कों पर उतर आए। संगठनों ने विरोध जताने के लिए रैलियां व मार्च निकाले और सड़कों को अवरुद्ध किया। विभिन्न स्थानों पर बड़ी संख्या में महिलाओं समेत श्रद्धालुओं ने सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन किया। इस दौरान ‘सबरीमला में भगवान अय्यप्पा मंदिर की पंरपरा की रक्षा करो’ के नारे लगाए। एर्नाकुलम जिले के अलुवा और मुवातुपुझा में प्रदर्शनकारियों और आम लोगों के बीच मामूली झड़प की भी खबर है। भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने यहां पास में काझकूटम में केरल के दवासम मंत्री के सुरेंद्रन को काले झंडे दिखाए जिससे कुछ समय के लिए यहां तनाव उत्पन्न हो गया।

भाजपा नीत राजग की एक विरोध रैली पथानमथिट्टा के पंडालम से शुरू हुई और 15 अक्तूबर को सचिवालय के सामने खत्म होगी और इसके साथ प्रदर्शन किया जाएगा। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पीएस श्रीधरन पिल्लई और भारत धर्म जन सेना (बीडीजेएस) के अध्यक्ष टी वेल्लापल्ली ने मार्च का नेतृत्व किया। पिल्लई ने कहा कि पार्टी श्रद्धालुओं के साथ है और आरोप लगाया कि सरकार पर्वतीय मंदिर को नष्ट करने की कोशिश कर रही है। राज्य की राजधानी में नायर सर्विस सोसाइटी के तत्त्वावधान में एक बड़ी रैली निकाली गई।

इस बीच, भगवान अयप्पा मंदिर का प्रबंध संभालने वाले त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड की दो दिवसीय बैठक शुरू हुई जो 17 नवंबर से शुरू हो रहे मंडला-मक्करविल्लूकू उत्सव की तैयारियों की समीक्षा करेगा। सुरेंद्रन ने कहा कि सरकार सबरीमला आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि वह सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू कर रही है। कांग्रेस भाजपा और विभिन्न हिंदुवादी संगठनों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए हैं। उनकी मांग है कि सरकार शीर्ष अदालत के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करे। इससे पहले मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने उन लोगों की आलोचना की जो उनकी सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को लागू करवाने के कदम का विरोध कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की एकता और धर्मनिरपेक्ष तानेबाने को ध्वस्त करने के लिए ‘जान बूझकर प्रयास’ किए जा रहे हैं। उधर राष्ट्रीय अयप्पा श्रद्धालु संघ की अध्यक्ष शैलजा विजयन की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि 28 सितंबर का फैसला ‘कानूनी समीक्षा में नहीं टिक सकता और अनुचित है।’

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