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उत्तराखंड में चुनाव छह माह बाद, चढ़ने लगा चुनावी रंग

उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव के लिए छह महीने बाकी बचे हैं। सत्तारूढ़ कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में सत्ता हथियाने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेजी से चल रहा है।

उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव के लिए छह महीने बाकी बचे हैं। सत्तारूढ़ कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में सत्ता हथियाने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेजी से चल रहा है। दोनों राजनीतिक पार्टियां धरना-प्रदर्शन कर जनता तक अपनी पहुंच बनाने के लिए लोक-लुभावन घोषणाएं अभी से कर रही हैं। कांग्रेस और भाजपा ने प्रदेश में चुनाव पूर्व सर्वे कराए हैं। सूत्रों के मुताबिक प्राइवेट पार्टी से कराए गए दोनों दलों के सर्वे में अभी भाजपा को बढ़त है।

सूत्रों के मुताबिक में उत्तराखंड को तीन भागों में विभाजित करके ये सर्वे कराए गए हैं। सर्वे एजंसियों ने उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों, कुमाऊं मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों तथा मैदानी क्षेत्रों में पड़ने वाली विधानसभा सीटों में अलग-अलग सर्वे टीमें लगाई हैं। सूत्रों के मुताबिक सर्वे कंपनियों ने एक सर्वे टीम गढ़वाल मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों टिहरी, पौडी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, चकराता के पर्वतीय क्षेत्रों में भेजी है। दूसरी टीम कुमाऊं मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल, चम्पावत में भेजी है। इसी तरह गढ़वाल के मैदानी इलाकों देहरादून, हरिद्वार और कुमाऊं मंडल के मैदानी क्षेत्रों हल्द्वानी, रुद्रपुर समेत तराई क्षेत्रों में आंकडे जुटाने के लिए टीम लगाई गई है।

सर्वे टीमों ने उत्तराखंड में 18 मार्च के बाद की राजनीतिक घटनाओं को देखते हुए सर्वे किया है। राज्य में 10 मई को हरीश रावत सरकार को विधानसभा में बहुमत मिलने, राज्य में 26 मार्च को राष्टपति शासन लगने, कांग्रेस के 10 विधायकों द्वारा बगावत कर भाजपा में शामिल होने, बागी विधायकों के कारण भाजपा के बदले राजनीतिक समीकरणों और बागी विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों की राजनीतिक स्थिति को हालात बनाया गया है। इन बिंदुओं के मद्देनजर विधानसभा चुनाव से छह माह पूर्व सर्वे करवाया गया है।

उत्तराखंड में विधानसभा की 70 सीटों पर सीधे चुनाव होना है। इनमें से आठ सीटें अनुसूचित जाति, एक सीट अनुसूचित जनजाति और 61 सीटें सामान्य हैं। उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के पांच पर्वतीय जिलों चमोली, उत्तरकाशी में तीन-तीन, रुद्रप्रयाग में दो, टिहरी में छह, पौड़ी गढ़वाल में छह विधानसभा सीटें हैं। कुमाऊं मंडल के पांच पर्वतीय जिलों पिथौरागढ़ में चार, बागेश्वर में दो, अल्मोड़ा में छह, चम्पावत में दो, नैनीताल में छह विधानसभा सीटें हैं। गढ़वाल मंडल के दो मैदानी जिलों देहरादून में दस तथा हरिद्वार में 11 और कुमाऊं मंडल के एक मात्र मैदानी जिले उधमसिंहनगर में नौ विधानसभा सीटें हैं। इस तरह उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में 40 तथा मैदानी क्षेत्रों में 30 विधानसभा सीटें हैं। एक सदस्य एंग्लो इंडियन बिरादरी का मनोनीत करने के बाद सूबे की विधानसभा में सदस्यों की संख्या 71 हो जाती है।

उत्तराखंड की 71 सदस्यीय विधानसभा में से कांग्रेस के दस बागी विधायकों तथा भाजपा के एक बागी विधायक की सदस्यता दलबदल कानून के तहत खत्म होने के बाद इस वक्तविधानसभा के सदस्यों की संख्या 59 रह गई है। मौजूदा विधानसभा में कांग्रेस और भाजपा के 26-26, बसपा के दो, उत्तराखंड क्रांति दल का एक तथा निर्दलीय तीन विधायक हैं।

सन् 2012 में जब विधानसभा के चुनाव हुए थे, तब कांग्रेस ने 32, भाजपा ने 31, निर्दलियों ने तीन, बसपा ने तीन और उत्तराखंड क्रांति दल ने एक सीट जीती थीं। तब कांग्रेस ने निर्दलीय, बसपा और उत्तराखंड क्रांति दल के विधायकों के साथ मिल कर उत्तराखंड में सरकार बनाई थी। तब कांग्रेस सरकार को विधानसभा में 39 विधायकों का समर्थन प्राप्त था। कांगे्रस ने साढेÞ चार सालों में विधानसभा में भाजपा के पांच विधायकों को तोड़ कर अपने खेमे में मिलाया। भाजपा ने कांगे्रस के 10 विधायकों को तोड़ कर अपने साथ मिला लिया है। इस तरह उत्तराखंड की तीसरी विधानसभा में 71 सदस्यों में से 12 सदस्यों की सदस्यता दलबदल कानून के चलते चली गई है।

बीते पांच महीने में उत्तराखंड में राजनीतिक उठापटक में कांगे्रस और भाजपा को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। जहां कांगे्रस को अपने दस विधायकों से हाथ धोना पड़ा वहीं भाजपा को अपने पांच विधायकों से वंछित होना पड़ा। और उत्तराखंड में हुए उपचुनाव में भाजपा को डोईवाला और सोमेश्वर विधानसभा सीट पर हार का मुंह देखना पड़ा। बीती 18 मार्च को भाजपा की हरीश रावत सरकार को गिराने की कोशिशों के कारण अच्छी खासी दुर्गति हुई। कांग्रेस के दस विधायकों को दलबदल कराने के बावजूद भी भाजपा रावत सरकार को नहीं गिरा पाई। इससे भाजपा की पूरे देश में बदनामी हुई है।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस और भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्राइवेट एजंसियों से जो सर्वे कराए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जानकारों का कहना है कि भाजपा द्वारा कराए गए सर्वे में भाजपा को 40 सीटें और कांग्रेस को 25 सीटें मिलने का अनुमान है। बसपा को दो सीटें और निर्दलियों को दो सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। जानकारों के अनुसार कांग्रेस ने भी सर्वे कराया है। इसमें कांग्रेस को 25 से 28 सीटें और भाजपा को 35 से 38 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। बसपा को तीन से पांच सीटें और निर्दलियों को दो या तीन सीटें मिलने की उम्मीद जताई गई है।

अब भाजपा और कांग्रेस सर्वे के आधार पर 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति बना रही हैं। भाजपा ने राजनीतिक रणनीति के तहत पूरे प्रदेश में हरीश रावत सरकार के खिलाफ पर्दाफाश रैलियां निकालीं। अब भाजपा अक्तूबर में परिवर्तन रैली निकाल कर हरीश रावत सरकार के खिलाफ जोरदार बिगुल बजाने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस ने भी भाजपा की काट में चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस उत्तराखंड की सभी 70 विधानसभा सीटों पर बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन कर रही है।

इनमें मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भाग ले रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां 2017 के विधानसभा चुनाव में सूबे की सत्ता हथियाने के लिए हर हथकंडे अपना रही हैं। भाजपा ने चुनावी रणनीति में फेरबदल करते हुए उत्तराखंड में दो नए चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और धर्मेन्द्र प्रधान को नियुक्तकिया है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड का दौरा कर सकते हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए राहुल गांधी अक्तूबर में उत्तराखंड के दौरे पर आ रहे हैं। इसलिए आने वाले दो महीने उत्तराखंड की राजनीतिक गरमाहट पैदा करने वाले होंगे।

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