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दिल्ली सरकार में भर्ती घोटाला, ACB ने ऑफिस में मारा छापा

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि दिल्ली सरकार के अधीन कार्यरत दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के अधिकारियों तथा स्टाफ की मिलीभगत से लम्बे अरसे से अभ्यथिर्यों के चयन में बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही है।

Author नई दिल्ली | February 19, 2016 7:15 PM
दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने बीते गुरुवार (18 फरवरी) को एफआईआर नंबर 5-16 के तहत दर्ज करके इस मामले की जांच शुरू कर दी है।

मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले की तरह दिल्ली सरकार के दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के खिलाफ दिल्ली की भष्टाचार निरोधक शाखा ने भर्तियों में हुए घपलों का मामला दर्ज करके शुक्रवार को विभाग के पूर्वी दिल्ली स्थित दफ्तर पर छापा भी मारा है। ये शिकायत दो आवेदकों भूपेश एंव अरूण ने शाखा के समक्ष दर्ज करवाई है। इनकी शिकायत पर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने शुक्रवार (19 फरवरी) को कार्यवाही की है। इस मामले में शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि दिल्ली सरकार के अधीन कार्यरत दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के अधिकारियों तथा स्टाफ की मिलीभगत से लम्बे अरसे से अभ्यथिर्यों के चयन में बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही है।

दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने बीते गुरुवार (18 फरवरी) को एफआईआर नंबर 5-16 के तहत दर्ज करके इस मामले की जांच शुरू कर दी है। इस मामले में संयुक्त पुलिस आयुक्त और एसीबी के प्रमुख एम के मीणा ने बताया कि मामले में संबंधित सबूतों के लिए एक टीम दस्तावेज जमा करने कड़कड़डूमा में बोर्ड के कार्यालय गयी। उन्होंने बताया कि एक शिकायत के आधार पर भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत एसीबी ने गुरुवार को मामला दर्ज किया था।

भर्तियों में हुए कथित घोटाले का मामला हाल ही में निरीक्षकों, सहायकों, हेड क्लर्क आदि की बोर्ड द्वारा ली गयी ग्रेड-2 (दास कैडर) परीक्षा (पद कोड 90/09)का है। बोर्ड के अधिकारियों ने इस परीक्षा में धांधली का रिकार्ड तोड़ दिया। शिकायत कर्ताओं का आरोप है कि 21 जोड़े ऐसे लोगों को पास किया गया, जो आपस में भाई-बहन, पति-पत्नी, सगे भाई, सगी बहनें तथा एक ही गाँव व एक ही वर्ग के थे। 46 लोगों का चयन किया गया, जो खून के रिश्ते के तहत अनेक परिवारों से आते थे। अभ्याथिर्यों में से ज्यादातर उत्तरी, पश्चिमी दिल्ली के एक ही बेल्ट से थे। पास हुए कुल उम्मीदवारों में से 70 फीसद ऐसे लोग थे, जो एक ही इलाके से संबंधित थे।

परीक्षा दो चरणों में संपन्न करायी गयी। प्रथम चरण में स्क्रीनिंग टैस्ट लिया गया। इसमें 9500 अभ्यथिर्यों ने हिस्सा लिया। दूसरे चरण में प्रश्नपत्र इस तरह तैयार किये गये ताकि मेरिट के आधार पर अभ्यथिर्यों का चयन हो सके। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिन अभ्यथिर्यों ने प्रथम चरण में 75 फीसद से 90 फीसद अंक प्राप्त किये थे, उनको दूसरे चरण की परीक्षा में 0 से 40 अंक ही मिले। खेल कोटे के तहत अनेक ऐसे अभ्यथिर्यों का चयन हुआ, जिन्होंने आशा के विपरीत अन्य अभ्यथिर्यों से ज्यादा अंक प्राप्त करके परीक्षा उत्तीर्ण की। 79 ऐसे अभ्यथिर्यों का चयन सामान्य श्रेणी के अभ्यथिर्यों में किया गया, जो कि अन्य श्रेणियों से संबंधित थे। प्रथम चरण की परीक्षा में डीओपीटी के सर्कुलर का खुला उल्लंघन किया गया। इस कारण अन्य श्रेणियों से संबंधित 79 ऐसे अभ्यथिर्यों का चयन लितीय चरण की परीक्षा में हो गया, इससे सामान्य श्रेणी के 79 उम्मीदवारों का अधिकार बोर्ड ने छीन लिया। भर्ती के लिए तय शैक्षिक योग्यता का भी पालन नहीं किया गया। जो लोग परीक्षा में बैठने के लिए शैक्षिक योग्यता भी नहीं रखते थे, उनको परीक्षा में बैठने की अनुमति देकर उन्हें पास कर दिया गया।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस घोटाले में आगरा का एक चर्चित प्रकाशक भी शामिल है। इसकी प्रतियोगी परीक्षा प्रकाशन से 30 प्रश्न हू-ब-हू बोर्ड ने अपने प्रष्नपत्रों में शामिल किया। इन 30 प्रष्नों में से 15 प्रश्न अंग्रेजी भाषा के प्रश्नपत्र में दिये गये थे। इससे उन उम्मीदवारों को फायदा हुआ, जिन्होंने प्रकाषक से मिलीभगत कर ली थी। शकरपुर केन्द्र में जैमर नहीं लगे हुए थे। यहाँ एक ही कक्ष में रौल नम्बर 90004962 से 90005003 के उम्मीदवारों को एक ही साथ बैठाया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि शकरपुर केन्द्र के उम्मीदवारों ने परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त किये। अयोग्य घोषित कर दिये गये योग्य उम्मीदवारों ने दिल्ली के सतकर्ता विभाग से इस घोटाले की शिकायत की। दास कैडर के तहत चयनित अभ्यथिर्यों का पूरा विवरण जान-बूझकर वेबसाइट पर जारी नहीं किया गया ताकि घोटाले का सत्य जनता के सामने न आ सके। ऐसा इसलिए किया गया ताकि अयोग्य उम्मीदवारों के नाम उनके पिता के नाम, पते, दस्तावेजों, अनुक्रमांक आदि की सूचना उन लोगों को न मिल सके, जिन्होंने इस घोटाले का खुलासा किया था।

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