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उत्तर प्रदेश: हलाला के खिलाफ आवाज बुंलद करने वाली शबनम रानी पर एसिड अटैक, हालत गंभीर

बहुविवाह और हलाला के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली शबनम रानी पर एसिड अटैक हुआ है। उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में मुस्लिम समाज में व्याप्त बहुविवाह और हलाला प्रथा के खिलाफ आवाज उठाने वाली शबनम रानी के उपर एसिड अटैक हुआ है। एसिड अटैक के बाद वे गंभीर रूप से जख्मी हो गई। हालांकि, उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। दरअसल, शबनम रानी ने बहुविवाह और हलाला को असंवैधानिक करार दिए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट याचिका दायर की थी। याचिका दायर करने के बाद से शबनम रानी को धमकियां मिलनी शुरू हो गई थी। ससुरालवालों ने घर की पानी सप्लाई काट दी थी। लगातार बदसलूकी की जा रही थी। पति और देवर द्वारा लगातार धमकी दी जा रही थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार को शबनम रानी अपने बच्चे के साथ एसएसपी से मिलने जा रही थीं। इसी दौरान बुलंदशहर के कालाआम चौक के नजदीक बाइक सवार युवक ने अपने दोस्त के साथ एसिड फेंक दिया। इसके बाद वे बाइक से फरार हो गए। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शबनम रानी और उनके बच्चे को अस्पताल में भर्ती करवाया। डीएम, एसपी सहित अन्य बड़े अधिकारी मौके पर पहुंच पीडि़ता से मिले और घटना की पूरी जानकारी ली। शबनम रानी ने एसिड फेंकने का आरोप अपने देवर पर लगाया है।

वर्ष 2010 में शबनम रानी की शादी वर्ष 2010 शरीयत के अनुसार हुई थी। शादी के बाद उनके तीन बच्चे भी हुए। बाद में उनके पति ने दूसरी शादी कर ली और उन्हें परेशान किया जाने लगा। आरोप है कि शबनम के पति ने उसे तीन तलाक दे दिया और फिर देवर से हलाला करवाने की बात कही गई। इसके बाद उन्होनें बहुविवाह और हलाला के खिलाफ लड़ने का फैसला किया। बता दें कि निकाह हलाला के अंतर्गत, अगर तीन तलाक दी गई मुस्लिम महिला अपने पति के पास वापस जाना चाहती है, तो उसे एक अन्य मर्द से शादी करनी होगी, फिर उसे तलाक देना होगा और उसके बाद ही वह अपने पहले पति से शादी कर सकती है।

वहीं, इससे पहले तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथाओं के खिलाफ भी अभियान छेड़ने पर आला हजरत खानदान की पूर्व बहू निदा खान के खिलाफ भी फतवा जारी किया गया था। बरेली के शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने बताया था कि दरगाह के दारुल इफ्ता विभाग ने  निदा के खिलाफ फतवा जारी किया है। उन्होंने दावा किया था कि मुफ्ती अफजाल रजवी के दस्तखत से जारी फतवे में कहा गया है कि निदा अल्लाह और उसके बनाये हुए कानून की मुखालिफत कर रही हैं, लिहाजा उनका ‘हुक्का-पानी’ बन्द कर दिया गया है। निदा की मदद करने वाले और उससे मिलने-जुलने वाले मुसलमानों को भी इस्लाम से खारिज कर दिया जाएगा। फतवे के मुताबिक निदा अगर बीमार हो जाती है तो उसको दवा भी नहीं दी जाएगी। निदा की मौत पर जनाजे की नमाज पढ़ने पर भी रोक लगा दी गई है। इतना ही नहीं निदा की मृत्यु होने पर उसे कब्रिस्तान में दफनाने पर भी रोक लगा दी गयी है।

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