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एक और सर्वे: राजस्‍थान में BJP को 75 तो कांग्रेस को 115 सीटें मिलने के आसार

राजस्थान विधान सभा चुनाव को लेकर कराए गए सर्वे में विरोधी लहर को हावी होता देख भाजपा का पूरा ध्यान मतदाताओं की नाराजगी दूर करने पर है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह खुद सभी तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

Rajasthan Assembly election 2018: इस साल के अाखिरी में तीन राज्यों में विधानसभा होने हैं। इनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ शामिल है। इन तीनों ही राज्याें में अभी भाजपा की सरकार है। सभी पार्टियां रणनीति बना प्रचार-प्रसार में जुट गई है। भाजपा जहां इन राज्यों की सत्ता पर फिर से काबिज होना चाहती है, वहीं, कांग्रेस वापसी करना चाहती है। राजस्थान में 7 दिसंबर को चुनाव होने वाले हैं। 11 दिसंबर को इसके नतीजे आ जाएंगे।  नतीजे चाहे जो हों लेकिन टाइम्स नाऊ के द्वारा कराए गए सर्वे ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। सर्वे के अनुसार, आगामी चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिलता दिख रहा है और भाजपा सत्ता से बेदखल होती दिख रही है। भाजपा को इस चुनाव में 75 सीटें मिलती दिख रही है, वहीं कांग्रेस को 115 और 10 सीटें अन्य को मिलती दिख रही है। जबकि वर्ष 2103 के चुनाव की बात करें तो भाजपा को 163 सीटें मिली थी, वहीं कांग्रेस को 21 और 16 सीटों पर दूसरे लोग जीते थे। यह सर्वे 200 विधानसभा क्षेत्रों में 22345 लोगों के बीच करवाया गया है।

बता दें कि चुनाव से चार महीने पहले एबीपी और सी-वोटर द्वारा ओपिनियन पोल सर्वे कराया गया था। इस सर्वे में भी भाजपा सत्ता खोती दिख रही थी। सर्वे के अनुसार भाजपा इस चुनाव में मात्र 57 सीटों पर सिमट सकती है। यदि ऐसा होता है तो पिछले चुनाव की तुलना में भाजपा की 105 सीट कम जाएगी। सर्वे में यह भी बताया गया कि 200 विधानसभा सीटों वाले राजस्थान में भाजपा करीब तीन चौथाई सीटें हार सकती है। वहीं, कांग्रेस 20 साल पुरान इतिहास दुहराते हुए सत्ता में वापसी कर सकती है। कांग्रेस को करीब 130 सीटें मिल सकती है।

वहीं, भाजपा इस बार सत्ता में बने रहने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। पार्टी ने अपनी पूरी ताकत चुनाव प्रचार अभियान में झोंक दिया है। अलग-अलग रणनीति बनाकर विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किए जा रहे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह खुद चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। संगठन और प्रशासनिक स्तर पर भी कई तरह के बदलाव किए गए हैं। सर्वे में विरोधी लहर को हावी होता देख भाजपा का पूरा ध्यान मतदाताओं की नाराजगी दूर करने पर है।

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