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मौखिक परीक्षा को सिर्फ 20 फीसद तवज्जो देने का नियम रहेगा जारी

छात्रों के विरोध के बाद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) ने फैसला किया है कि एमफिल और पीएचडी कार्यक्रमों में दाखिले की नीति में 80 फीसद लिखित परीक्षा और 20 फीसद मौखिक परीक्षा को तवज्जो देने का नियम जारी रहेगा।

Author नई दिल्ली | Updated: February 4, 2017 1:23 AM
(Expres Photo)

छात्रों के विरोध के बाद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) ने फैसला किया है कि एमफिल और पीएचडी कार्यक्रमों में दाखिले की नीति में 80 फीसद लिखित परीक्षा और 20 फीसद मौखिक परीक्षा को तवज्जो देने का नियम जारी रहेगा। जेएनयू की संचालन समिति ने कहा, ‘दाखिले की नीति में आरक्षण व्यवस्था से जुड़े सभी संवैधानिक प्रावधानों का पालन किया जाएगा। तीन स्तरीय प्रवेश परीक्षा होनी चाहिए जिसमें एक ‘क्वालिफाइंग टेस्ट’ हो, जिसमें छात्रों को 50 फीसद अंक लाने की जरूरत हो ताकि वे विवरणात्मक स्वरूप की लिखित परीक्षा और मौखिक परीक्षा के अगले चरण में प्रवेश कर सकें’। समिति ने कहा, ‘विवरणात्मक स्वरूप की लिखित परीक्षा और मौखिक परीक्षा को तवज्जो देने का अनुपात 80:20 होगा। पहले ‘क्वालिफाइंग टेस्ट’, जिसमें उत्तीर्ण होने के लिए 50 फीसद अंक लाना होगा, में आरक्षण व्यवस्था लागू करने पर कानूनी राय ली जानी चाहिए’।

समिति की बैठक में यह फैसला किया गया। इस बैठक में नए नियमों के संबंधित हिस्सों और यूनिवर्सिटी के मौजूदा नियमों पर इसके प्रभाव पर चर्चा की गई। जेएनयू ने एक बयान में कहा, ‘छात्रों की प्रमुख चिंताएं लिखित परीक्षा और मौखिक परीक्षा को दिए जाने वाले तवज्जो, दाखिला प्रक्रिया में समाज के वंचित वर्गों को दिए जाने वाले आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों की स्थिति, सामाजिक तौर पर वंचित वर्गों को दिए जाने वाले विशेष अंक पर यूजीसी के नए नियमों के प्रभाव से जुड़ी थीं। फैसला किया गया कि आरक्षण व्यवस्था से जुड़े सभी संवैधानिक प्रावधानों का पालन किया जाएगा। वंचित वर्गों को विशेष अंक दिए जाने का मौजूदा नियम जारी रहेगा’।

इस बीच, जेएनयू छात्र संघ ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्टीयरिंग कमेटी की बैठक के ब्योरे की पुष्टि किए बगैर ही बयान जारी कर दिया और गलत तथ्य पेश किए। छात्र संघ ने एक बयान में कहा, ‘हमने एजंडे में शामिल कई ऐसे मुद्दों पर ऐतराज जताया जिसे अध्यक्ष की ओर से पेश किया गया था। इसके बारे में बयान में कुछ नहीं कहा गया। हमने इस बाबत समिति को एक पत्र लिखा है और हम प्रदर्शन जारी रखेंगे’।

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