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बलात्कार के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन के दौरान भी राजनीति करते नजर आए ABVP और NSUI

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पीएचडी छात्रा के साथ बलात्कार मामले में सोमवार को अचानक राजनीतिक माहौल गरम हो गया।

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पीएचडी छात्रा के साथ बलात्कार मामले में सोमवार को अचानक राजनीतिक माहौल गरम हो गया। छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन आॅफ इंडिया (एनएसयूआइ) ने प्रशासनिक भवन के सामने विरोध प्रदर्शन किया। एबीवीपी ने कुलपति और विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। छात्र संगठनों ने यह मांग की बलात्कार के आरोपी आॅल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के दिल्ली अध्यक्ष को जेएनयू कैंपस से बर्खास्त किया जाए। बताते चले कि जेएनयू कैंपस में आगामी 10 दिनों में छात्र संघ के चुनाव होने वाले हैं। इसका असर यह दिखा कि बलात्कार के मुद्दे पर भी प्रशासनिक भवन के सामने प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठन एक दूसरे के आमने-सामने नजर आए। दोनों छात्र संगठन एनएसयूआइ और एबीवीपी ने एक दूसरे पर बलात्कार के मामले पर राजनीति करने की छिंटाकशी की। वहीं कथित बलात्कार के आरोपी आइसा दिल्ली स्टेट के अध्यक्ष और जेएनयू के पीएडी छात्र अनमोल रतन के मुद्दे पर एबीवीपी और एनएसयूआइ विश्वविद्यालय में सालों से काबिज वामदलों को आगामी चुनाव में उखाड़ फेंकने की जुगत में हैं।

हालांकि विरोध प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी और एनएसयूआइ के खेमे में छात्रों की बहुत भीड़ नहीं नजर आई। लेकिन प्रदर्शन शुरू होते ही मामला बलात्कार पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की आड़ में राजनीतिक होता गया। पूरे घटना क्रम में एनएसयूआइ ने आइसा की निंदा की। वहीं दूसरे क्षण प्रदर्शन कर रहे एबीवीपी पर हमले भी शुरू कर दिए। बलात्कार की घटना पर न्याय की मांग तब राजनीतिक रूप लेती नजर आई जब एनएसयूआइ ने आरएसएस और मोहन भागवत का नाम लेकर एबीवीपी को दलाल बताया। वहीं विरोध कर रहे छात्रों का आरोप है कि कैंपस में पहले भी जेएनयू कैंपस में इन संगठन से जुड़े लोगों पर बलात्कार जैसी घटना के आरोप लग चुके हैं।

जेएनयू के एबीवीपी के अध्यक्ष आलोक सिंह का कहना है कि पिछले दिनों की घटना के बाद देश की इज्जत के साथ जेएनयू की इज्जत भी तार-तार हुई है। यह मामला जेएनयू कैंपस में वामपंथियों के ताबुत की आखिरी कील साबित होगी। एवीबीपी की कार्यकर्त्ता श्वेता शर्मा का कहना है कि छात्रा आइसा के अनमोल रतन के कमरे में बहुचर्चित मराठी फिल्म ‘सैराट’ लेने गई थी। वहां छात्रा को कोल्ड्रींक में नशीला पदार्थ खिलाकर बलात्कार किया गया। इस घटना से लड़के और लड़कियों के बीच भय का माहौल पैदा होगा। वहां एनएसयूआइ की तरफ से शामिल छात्र प्रदर्शन में आरएसएस, मोहन भागवत और एबीवीपी के विरोध में बैनर लेकर आए थे। एनएसयूआइ के रवि दीमान का कहना था कि बलात्कार के मामले में आरोपी छात्र पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन एबीवीपी आरएसएस सह पर जेएनयू की छवि खराब कर रही है। यहां प्रदर्शन कर रही एबीवीपी बलात्कार के अरोपी के जरिए अपनी राजनीति चमकाने आने आई है। जब उनसे पूछा गया कि एनएसयूआइ पर भी राजनीति करने का आरोप लग सकता है तो उनका कहना था कि बलात्कार की घटना संगीन है। बलात्कारी का विरोध होना चाहिए न कि कुछ और।

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