Abu Salem gets seven-year sentence for painting case - 16 साल पुराने रंगदारी केस में अंडरवर्ल्ड सरगना अबू सलेम को मिली सात साल की कैद - Jansatta
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16 साल पुराने रंगदारी केस में अंडरवर्ल्ड सरगना अबू सलेम को मिली सात साल की कैद

सलेम की ओर से पेश वकील एमएस खान ने उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया था और दलील दी थी कि मामले की सुनवाई उस आदेश का उल्लंघन है, जिसके तहत गैंगस्टर को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। सलेम को नंवबर 2005 में पुर्तगाल से लाया गया था।

1993 मुंबई बम ब्लास्ट का दोषी अबू सलेम (Reuters फाइल फोटो)

मुंबई में साल 1993 में हुए बम धमाकों के दोषी और अंडरवर्ल्ड सरगना अबू सलेम को दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को 2002 में राजधानी के एक कारोबारी से पांच करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने पर सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश तरुण सहरावत ने सजा पर सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया। अदालत ने 26 मई को सलेम को दोषी ठहराया था। हालांकि, अदालत ने इस मामले के अन्य आरोपियों चंचल मेहता, माजिद खान, पवन कुमार मित्तल और मोहम्मद अशरफ को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। वहीं, एक आरोपी सज्जन कुमार सोनी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। उगाही मांगने का यह मामला दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने दर्ज किया था। मामले में आरोप लगाया था कि सलेम ने दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश निवासी करोबारी अशोक गुप्ता से पांच करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी थी। इस मामले में सलेम को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 387, 506 और 507 के तहत दोषी ठहराया था।

सलेम की ओर से पेश वकील एमएस खान ने उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया था और दलील दी थी कि मामले की सुनवाई उस आदेश का उल्लंघन है, जिसके तहत गैंगस्टर को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। सलेम को नंवबर 2005 में पुर्तगाल से लाया गया था। सलेम के खिलाफ मुंबई में 1993 विस्फोट मामले समेत कई अन्य मामले भी दर्ज हैं। वह इस समय नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद है। मामले की छानबीन करने वाले दिल्ली पुलिस, स्पेशल सेल के तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) और सेवानिवृत्त स्पेशल सेल ने सेवानिवृत्त उपायुक्त एलएन राव ने बताया कि साल 2002 में कारोबारी ने इस बारे में ग्रेटर कैलाश थाना पुलिस से शिकायत की थी। चूंकि उन दिनों स्पेशल सेल में मामला दर्ज करने की व्यवस्था नहीं थी। इस कारण मामला थाने में ही दर्ज किया गया था और आगे की जांच का जिम्मा स्पेशल सेल को सौंपा गया था।

स्पेशल सेल ने इस मामले में फोन के विवरण के आधार पर सबूत जुटाए गए थे। बाद में जब सलेम को जब पुर्तगाल से लगाया गया तो दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने तीन दिनों तक पूछताछ की। मामले की छानबीन करने वाले अधिकारी एलएन राव ने बातचीत के दौरान कहा कि भले ही मामले की सुनवाई में वक्त लग गया, पर फैसला स्वागत योग्य है। उन्होंने आगे कहा कि करोबारी ने समय पर इसकी जानकारी पुलिस को दे दी थी। बताया यह भी जा रहा है कि सलेम को किसी ने कहा था कि इस कारोबारी के पास बहुत रुपए हैं। एक बार फोन करते ही वह रंगदारी के रुपए दे देगा। सलेम ने कारोबारी और उसके पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी।

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