पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के बहुचर्चित ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ पर सवाल उठने लगे हैं। उनके लोकसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई ‘सेबाश्रय’ पहल कभी जनसंपर्क और जनकल्याण के मॉडल के तौर पर पेश की गई थी। अब यही योजना स्वास्थ्य शिविरों में कथित अनियमितताओं, इलाज में लापरवाही और मेडिकल उपकरणों के कथित अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर पुलिस शिकायतों और एफआईआर के घेरे में है।
कोलकाता से लगभग 50 किलोमीटर दूर, दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा बीडीओ कार्यालय के सामने बारिश के पानी में आंशिक रूप से डूबे एक खेत में, प्लाईवुड, बांस और स्टील की छड़ों से बनी एक अस्थायी इमारत खड़ी है। इमारत के ऊपर लगे बोर्ड पर ‘मेडिकल कॉलेज कलकत्ता’ लिखा है। यह तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा स्थापित शिविरों में से एक है जिन्होंने अपनी सेबाश्रय योजना के तहत इसे स्थापित किया था।
अस्थायी इमारत के अंदर अस्थायी कमरों की कतारें खड़ी हैं जिन्हें अस्पताल के विभागों या औषधालयों और फार्मेसियों की तरह मार्क किया गया है जो अब सभी खाली हैं और नुस्खे, ब्रोशर और अन्य कागज फर्श पर बिखरे पड़े हैं।
सेबाश्रय पहल के खिलाफ शिकायतें
सेबाश्रय का पहला चरण 2 जनवरी 2025 को अभिषेक द्वारा शुरू किया गया था जिसमें घर-घर जाकर सहायता के लिए सैकड़ों शिविर स्थापित करना शामिल था। 1 दिसंबर 2025 से डायमंड हार्बर के कई विधानसभा क्षेत्रों में सेवाएं विस्तारित की गईं जिनमें मुफ्त डॉक्टर परामर्श, परीक्षण, दवाएं और बड़ी सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
सेबाश्रय के खिलाफ पहला मामला स्थानीय भाजपा नेता और वकील अभिजीत दास ने 4 जुलाई को दर्ज कराया था। इस मामले में डॉक्टरों समेत 15 लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं जिनमें अभिषेक बनर्जी को मुख्य आरोपी बनाया गया है। आरोपों में धोखाधड़ी, जालसाजी, मिलावट, जहर के जरिए चोट पहुंचाना, लोगों की जान को खतरे में डालना और गैर इरादतन हत्या का प्रयास शामिल हैं।
सेबाश्रय के खिलाफ दूसरी शिकायत जिसमें अभिषेक का भी नाम शामिल है, 9 जुलाई को दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता मालती बिस्वास ने बताया कि कुछ महीने पहले स्वास्थ्य शिविर में घुटने के दर्द के इलाज के दौरान उनका पैर काटना पड़ा था। बिस्वास ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मुझे न्याय चाहिए। मैं चाहती हूं कि जिन्होंने मुझे इतना बड़ा नुकसान पहुंचाया है उन्हें सजा मिले।”
लड़की का हाथ कटवाने की शिकायत
15 जुलाई को बोरहानपुर गांव के निवासी चित्तरंजन मन्ना और रूमा मन्ना ने बिष्णुपुर पुलिस स्टेशन में सेवाश्रय के खिलाफ अपनी बेटी कृति का हाथ कटवाने की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि 24 जनवरी 2025 को वे कृति को पायलान स्थित सेबाश्रय शिविर में ले गए थे। कृति के दाहिने हाथ में असहनीय दर्द था और दिल्ली के एम्स में उसका इलाज चल रहा था लेकिन सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण इतनी दूर जाना उनके लिए संभव नहीं था। मन्ना परिवार का दावा है कि उनकी मुलाकात संयोगवश पायलान शिविर में अभिषेक से हुई थी और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से उनकी बेटी के चिकित्सा उपचार और शिक्षा की जिम्मेदारी लेने का वादा किया था।
माता-पिता ने बताया कि कृति की हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ गई। आखिरकार वे उसे बेंगलुरु के एक अस्पताल में ले गए चित्तरंजन का कहना है कि पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों ने उन्हें भर्ती करने से इनकार कर दिया लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि बहुत देर हो चुकी है और कृति का दाहिना हाथ काटना पड़ेगा। रूमा ने बताया, “अभिषेक और उसके साथी मेरी बेटी की इस हालत के लिए जिम्मेदार हैं। हम आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग करते हैं।”
अभिषेक बनर्जी पर जबरन वसूली का आरोप
एक निजी रिसॉर्ट फर्म, इको क्रीक द्वारा बिष्णुपुर पुलिस स्टेशन में चौथी एफआईआर दर्ज की गई जिसमें टीम अभिषेक बनर्जी द्वारा जबरन वसूली का आरोप लगाया गया जिसमें टीएमसी नेता, उनके निजी सहायक सुमित रॉय और पार्टी विधायक दिलीप मंडल का नाम शामिल है।
25 जुलाई को पश्चिम बंगाल विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने सेबाश्रय शिविरों में चार प्रकार की अनियमितताओं का आरोप लगाया जिनमें अनुचित उपचार, अनुमति के बिना एक्स-रे और अल्ट्रासोनोग्राफी मशीनों की खरीद, मरीजों के इलाज के लिए मेडिकल छात्रों का उपयोग और एक्स्पायरी दवाओं का सेवन शामिल है।
सीएम अधिकारी ने सेबाश्रय शिविरों में इलाज के बाद कथित तौर पर अपने अंग गंवाने वाले कई लोगों की तस्वीरें दिखाते हुए कहा, “हमने एक्स-रे मशीनें और यूएसजी मशीनें जब्त की हैं। हमने एक्सपायर्ड दवाएं जब्त की हैं। हमने इस परियोजना पर खर्च किए जा रहे सरकारी फंड और वहां ड्यूटी पर तैनात सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की है। सेबाश्रय शिविरों में पीड़ित लोगों की हर शिकायत को एफआईआर की तरह दर्ज किया जा रहा है।”
यह भी पढ़ें: आरजी कर मामले के दो साल पूरे होने पर पीड़िता की मां ने ममता बनर्जी पर साधा निशाना
आरजी कर मामले को रविवार को दो साल पूरे हो गए हैं। इस मामले को लेकर पीड़िता की मां और भाजपा की नवनिर्वाचित विधायक रत्ना देबनाथ ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि घटना के दौरान पूर्व CM ही स्वास्थ्य और पुलिस विभागों की प्रमुख थीं, उन्हीं ने यह सब करवाया था। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
