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9 साल बाद भी खाली हाथ, दोहरे हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद जांच एजंसियों पर सवाल

9 साल बाद भी देश के सबसे चर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड के आरोपी का पता नहीं चल सका है। अनसुलझी गुत्थी को सुलझाने में उत्तर प्रदेश पुलिस और सीबीआइ, दोनों नाकाम रही हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: October 13, 2017 3:41 AM
चर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए तलवार दंपत्ति को बरी कर दिया था।

9 साल बाद भी देश के सबसे चर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड के आरोपी का पता नहीं चल सका है। अनसुलझी गुत्थी को सुलझाने में उत्तर प्रदेश पुलिस और सीबीआइ, दोनों नाकाम रही हैं। हत्या किसने और क्यों की? नौ साल बाद भी यह सवाल है। सबूतों और तथ्यों के अभाव में तलवार दंपत्ति को उच्च न्यायालय ने रिहा करने का आदेश दे दिया है। आरुषि के माता-पिता शुक्रवार को डासना जेल से रिहा होंगे। इधर, नोएडा के जलवायु विहार कॉलोनी में रहने वालों के मन में भी सवाल है कि आखिर आरुषि का हत्यारा कौन है। सबूतों के अभाव में तलवार दंपति को बरी करने के बावजूद लोगों के यह सवाल सभी के मन में कौंध रहा है। हालांकि हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद तलवार दंपति के फ्लैट के आसपास रहने वाले ज्यादातर लोगों ने इस मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार किया, लेकिन कुछ ने बेबाकी से अपना पक्ष रखा।

ज्यादातर लोगों ने तलवार दंपति को इंसाफ मिलने की बात कही। उनका कहना था कि इसमें डॉक्टर नूपुर तलवार और डॉक्टर राजेश बेकसूर हैं। इस पहेली बने हत्याकांड में लोगों का ज्यादा गुस्सा जांच एजंसियों पर फूटता नजर आया। उन्होंने कहा सरकारी जांच एजंसियों के जांच करने और लापरवाही बरतने की वजह से हत्या के साक्ष्य मिट गए। जलवायु विहार कॉलोनी में तलवार दंपति की पड़ोसी दीपाली बताती हैं कि वह एक साथ टहलने जाया करती थीं। उनके अनुसार परिजन अपनी इकलौती बेटी के साथ ऐसा नहीं कर सकते। दिपाली के अनुसार तलवार दंपति बेकसूर हंै। उच्च न्यायालय के फैसले पर खुशी जताते हुए उन्होंने नूपुर और राजेश तलवार को रिहा करने के फैसले को जायज ठहराया है।

इधर, उनकी दूसरे पड़ोसी आशीष महेश्वरी भी अदालत के फैसले और तलवार दंपति के साथ नजर आए। उन्होंने कहा जांच एजंसियों खास कर नोएडा पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘पुलिस के काम करने के तरीके की वजह से आज नौ साल बाद भी आरुषि को न्याय नहीं मिल सका है’। यह जांच एजंसियों की कमजोरी है उन्हें हत्या के साक्ष्य जुटाना भी नहीं आता है। हालांकि महेश्वरी आगे कहते हैं कि डॉक्टर तलवार एक जिंदा दिल इंसान हैं, मुझे उम्मीद है कि वह अपनी जिंदगी दोबारा शुरू करेंगे।

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