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सम-विषम के पहले दिन पुलिस के उपर आप कार्यकर्त्ता भारी पड़े

एक के बाद एक कई मामले में आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ बयान देकर सुर्खियां बटोरने वाले दिल्ली पुलिस आयुक्त सम-विषम फार्मूले पर पूरी तरह से आप के सामने झुक गए..

Author नई दिल्ली | January 2, 2016 01:46 am
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ खड़े ‘आप’ स्वयंसेवक।

एक के बाद एक कई मामले में आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ बयान देकर सुर्खियां बटोरने वाले दिल्ली पुलिस आयुक्त सम-विषम फार्मूले पर पूरी तरह से आप के सामने झुक गए। यही कारण है कि पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी के इस हिदायत का आप कार्यकर्ता पर कोई असर नहीं दिखा कि वे केवल पुलिस की सहायता कर सकते हैं अन्यथा उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। शुक्रवार को दिल्ली की सड़कों पर फूल देकर गांधीगिरी भी आप कार्यकर्ताओं ने की और सड़क पर लोगों को हिदायत और संदेश भी आप कार्यकर्ता ही देते रहे। बिना कोई पुख्ता परिचय पत्र या अधिकृत किए कमोवेश आप कार्यकर्ता हर जगह पुलिस पर भारी पड़े। पुलिस मूकदर्शक बनकर सिवाए कुछ जगहों पर चालान काटकर गदगद होने के और कुछ नहीं कर सके। गुरूवार सुबह से शाम तक यही नजारा देखने को मिला।

बीते दो दिनों से जिस प्रकार पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी आप सरकार के सुर में सुर मिलाकर सम विषम पर अपनी हामी भरते रह थे उसी समय यह कयास लगने लगा था कि अब पुलिस को सिवाए आप के इस फामूर्ले को समर्थन करने का कोई उपाय नहीं बचा है। दरअसल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित कोर्ट सख्त हैं और राजधानी में दिन प्रतिदिन बढ़ रही प्रदूषण को कम करने के कोई भी नए फामूर्ले या योजना को वे समर्थन कर रहे हैं। इस फार्मूले को रोकने के लिए कई जनहित याचिका भी दायर की गई पर कहीं से भी इसे रोकने के निर्देश नहीं देने से भी पुलिस के मंसूबे ढ़ीले पड़ गए, इसलिए पुलिस आयुक्त ने सम विषम पर पहले तो कुछ औपचारिकताएं बताकर आना कानी करने की कोशिश की पर जब उन्हें लगा कि कोर्ट की हिदायत से अब मामला हाथ से निकल रहा है तो उन्हें समर्थन करने में ही भलाई लगी। यही कारण है कि मंगलवार से ही पुलिस आयुक्त ने सम विषम को प्रदूषण में कमी लाने और इसे कानूनी मामला बताकर समर्थन करना शुरू कर दिया। आयुक्त बस्सी दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय से सचिवालय में जाकर मिले और इस फार्मूले को दिल्ली पुलिस की ओर से पूरी तरह समर्थन देने की बात भी कही।

शुक्रवार सुबह आईटीओ से लेकर, इंडिया गेट , रिंग रोड, शांति मार्ग, कनाट प्लेस, जैसे भीड़ भाड़ वाले जगहों पर ट्रैफिक पुलिस के चालान दस्ता को तो देखा गया पर कम भीड़ भाड़ वाले और सुचारू रुप से ट्रैफिक चलने वाले जगहों जैसे बाहरी रिंग रोड से लेकर अंतरराज्यीय बस टर्मिनल होकर गुजरने वाली गाड़ियों के चालान काटने के बाबत पुलिस वालों को नहीं देखा गया। यही कारण है कि जमनापार में कई जगह धड़ल्ले से सम नंबर वाली गाड़ियां सड़क पर चलती रही तो दिल्ली-फरीदाबाद बार्डर के बदरपुर, दिल्ली-गाजियाबाद के आनंद विहार, दिल्ली-इंदिरापुरम के उत्तरप्रदेश गेट गाजीपुर जैसे कहीं जगहों पर सम नंबर वाली गाड़ियां चलानेवाले को कहीं से किसी का कोई डर नहीं दिखा। शुक्रवार को नए साल के कारण भी सड़कों पर भीड़ कम रही और सरकार के बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए इस फार्मूले को 15 दिनों के लिए प्रयोग के तौर पर लागू करने के बाद भी बहुत ज्यादा हाय-तौबा नहीं मची।

शुक्रवार को एक चीज जो सालों से चलती आ रही है उसे किसी ने नहीं रोका और वह था निजी गाड़ियों की ओट में सस्ते, बसों के किराए में यात्रियों को बैठाकर एक जगह से दूसरी जगह तक आराम से पहुंचाने का। यह धंधा पुलिस की नजर में सालों से चल रहा है पर इस पर रोक लगा पाने में पुलिस पूरी तरह नाकाम रही है। सम विषम के पहले दिन पिछली दरबाजे से चल रहा यह फार्मूला धड़ल्ले से चलता दिखा और दिल्ली से गुड़गांव, दिल्ली से फरीदाबाद, जमनापार से एम्स और दिल्ली से गाजियाबाद के रास्ते आगे चलने वाले कारें चलती रही।

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