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‘आप’ के कुछ और विधायकों के भी पार्टी छोड़ने की अटकलें

दिल्ली के सात संसदीय क्षेत्रों के लिए जारी चुनाव प्रचार के बीच आम आदमी पार्टी (आप) विधायकों के बागी तेवरों ने दिल्ली में ‘आप’ कुनबे में हड़कंप मचा दिया है। गांधी नगर से विधायक अनिल वाजपेयी शुक्रवार को भाजपा में शामिल हो गए।

Author Published on: May 4, 2019 3:59 AM
गांधी नगर से विधायक अनिल वाजपेयी भाजपा में शामिल होते हुए।

दिल्ली के सात संसदीय क्षेत्रों के लिए जारी चुनाव प्रचार के बीच आम आदमी पार्टी (आप) विधायकों के बागी तेवरों ने दिल्ली में ‘आप’ कुनबे में हड़कंप मचा दिया है। गांधी नगर से विधायक अनिल वाजपेयी शुक्रवार को भाजपा में शामिल हो गए। पार्टी के कुछ अन्य विधायकों के भी अन्य दलों का दामन थामने की अटकलें लगाई जा रही हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया खुद ही यह खुलासा कर चुके हैं कि भाजपा उनके सात विधायकों को खरीदना चाहती है। ‘आप’ की दिल्ली इकाई के संयोजक गोपाल राय ने भी शुक्रवार को इस आरोप को दोहराया।

राय ने पार्टी कार्यालय में संवाददाताओं से कहा कि जब हमने यह खुलासा किया कि किस तरह भाजपा उनके विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश कर रही है तो केंद्रीय मंत्री व भाजपा नेता विजय गोयल ने यह बयान दिया कि ‘आप’ के सात नहीं 14 विधायक हमारे संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि गोयल की यह स्वीकारोक्ति इस बात का सबूत है कि भाजपा विधायकों की खरीद-फरोख्त में शामिल है। ‘आप’ के विधायकों की स्थिति यह है कि बागी का तमगा लिए घूमने वाले कपिल मिश्रा खुलेआम भाजपा का प्रचार कर रहे हैं तो सरकार में मंत्री रहे संदीप कुमार ने शुक्रवार को बाकायदा एक वीडियो जारी कर पार्टी के राष्टÑीय संयोजक केजरीवाल पर करारा हमला बोला। अलका लांबा के तेवर भी लगातार बागी बने हुए हैं।

इनके अलावा चांदनी चौक संसदीय क्षेत्र व पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र के कई अन्य विधायक भी पार्टी बदलने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। हालांकि ‘आप’ का कहना है कि असली बात यह है कि पिछले 5 सालों में भाजपा के सातों प्रत्याशियों ने विकास का कोई काम नहीं किया। उनके खिलाफ जनता में भारी रोष एवं गुस्सा है। इसी से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश में वह लगी हुई है। दिल्ली सरकार के मंत्री राय ने कहा कि कर्नाटक में जब भाजपा को सफलता नहीं मिली तो उसने वहां पर भी विधायकों की खरीद-फरोख्त की मंडी लगाने की कोशिश की, लेकिन भाजपा वहां पर भी सफल नहीं हो पाई। अब दिल्ली में भी भाजपा एक बार फिर से वही कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने दिल्ली में विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिए मंडी सजाई थी। उन्होंने कहा कि भाजपा के प्रदेश नेता शेर सिंह डागर का स्टिंग भी मीडिया के माध्यम से जनता के सामने आया था। जिसकी वजह से शेर सिंह डागर को इस्तीफा देना पड़ा था।

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