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आप की परीक्षा के पहले बाबुओं की कामबंदी, अफसर सामूहिक छुट्टी पर, दिल्ली सरकार ने कहा साजिश

दो अधिकारियों के निलंबन का विरोध करते हुए दिल्ली सरकार के लगभग सभी वरिष्ठ नौकरशाह सामूहिक छुट्टी पर चले गए। हालांकि केंद्र सरकार ने अधिकारियों के निलंबन को निरस्त कर दिया...

Author नई दिल्ली | Published on: January 1, 2016 2:22 AM
दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को आरएसएस, भाजपा और नरेंद्र मोदी पर ट्वीट करके साधा निशाना।

दो अधिकारियों के निलंबन का विरोध करते हुए दिल्ली सरकार के लगभग सभी वरिष्ठ नौकरशाह सामूहिक छुट्टी पर चले गए। हालांकि केंद्र सरकार ने अधिकारियों के निलंबन को निरस्त कर दिया लेकिन इसके साथ ही आप सरकार के साथ चली आ रही उसकी तनातनी और बढ़ने की आशंका है जिसने बाबुओं की हड़ताल को सम-विषम योजना को नाकाम करने की साजिश करार दिया है। निलंबन के खिलाफ दानिक्स कैडर के करीब 200 अधिकारियों के एक दिन की सामूहिक छुट्टी पर जाने के बीच 70 से अधिक आइएएस अधिकारियों ने आप सरकार की यशपाल गर्ग और सुभाष चंद्र के खिलाफ की गई कार्रवाई के विरोध में सुबह नौ बजे से 12 बजे के बीच काम बंद रखा। दोनों अधिकारी विशेष सचिव हैं।  सरकारी अभियोजकों के वेतन में वृद्धि संबंधी फाइल पर हस्ताक्षर करने से मना करने के बाद आप सरकार ने अपने गृह विभाग में काम करने वाले इन दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया था जो दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (दानिक्स) कैडर के अधिकारी हैं।

उधर, अपने रुख पर कायम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आंदोलनरत अधिकारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि सरकार छुट्टी पर गए अधिकारियों के खिलाफ सभी विकल्पों को तलाश रही है। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार और अवज्ञा को बर्दाश्त नहीं करेगी। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उपराज्यपाल और अधिकारियों के कंधों पर बंदूक रखकर आप सरकार को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘दिल्ली में दानिक्स और आइएएस एसोसिएशन पूरी तरह भाजपा की बी टीम बन गई हैं’।

केजरीवाल ने एक के बाद एक ट्वीट में यह भी कहा कि प्रशासन में नई ऊर्जा और नए विचार लाने के लिए नौकरशाहों के स्थान पर पेशेवरों और क्षेत्र के विशेषज्ञों को लाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, ‘अगर ये अधिकारी लंबी छुट्टी पर चले जाएं तो लोगों को खुशी होगी। सरकार वेतन सहित छुट्टियां देने को तैयार है। प्रशासन ईमानदार, सुचारू और प्रभावी बनेगा’।

अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई को गृह मंत्रालय द्वारा निरस्त घोषित किए जाने के कुछ ही घंटे बाद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने नौकरशाहों के विरोध के समय पर सवाल उठाया और कहा कि यह शुक्रवार से शुरू की जा रही सम-विषम योजना को नाकाम करने की साजिश का हिस्सा है।

सिसोदिया ने आरोप लगाया, ‘सम विषम योजना शुरू होने के ठीक पहले ही उन्होंने सामूहिक अवकाश पर जाने का फैसला क्यों किया। यह एक साजिश का हिस्सा है ताकि हम योजना लागू करने में विफल रहें। कल जब वे बैठक कर रहे थे तो पीएमओ और उपराज्यपाल कार्यालय सीधे दानिक्स अधिकारियों के संपर्क में था’।

दानिक्स का चयन संघ लोक सेवा आयोग के संचालित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से किया जाता है और केंद्रीय गृह मंत्रालय उनके कैडर को नियंत्रित करने का प्राधिकार है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने इससे पूर्व कहा था, ‘मंत्रालय को दिल्ली के उपराज्यपाल की ओर से दो दानिक्स अधिकारियों के निलंबन पर एक संदर्भ प्राप्त हुआ है। मंत्रालय निलंबन आदेश को ‘अस्तित्व में नहीं’ घोषित करता है और दोनों अधिकारियों को ड्यूटी पर माना जाना चाहिए’।

विरोध पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए दिल्ली के गृह मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि दानिक्स और आइएएस अधिकारियों को हड़ताल पर जाने का हक नहंी है क्योंकि यह उनके सेवा नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार सभी अधिकारियों को एक महीने या 15 दिन की छुट्टी देने को तैयार है, यदि वे आवेदन करते हैं तो। जैन ने आरोप लगाया, ‘दोनों अधिकारियों को 28 दिसंबर को कैबिनेट के फैसले को लागू नहीं करने के लिए निलंबित किया गया है। यदि उन्हें मेरे आदेश से कोई समस्या थी तो उन्हें उपराज्यपाल से नहीं मुख्यमंत्री से संपर्क करना चाहिए था। उपराज्यपाल पहले ही अधिकारियों को सरकारी फैसले की अवहेलना करने को कह चुके हैं’।

जैन ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा दिल्ली सरकार के अधिकारियों को हड़ताल पर जाने को उकसा रही है। दानिक्स अधिकारी संघ में करीब 200 सदस्य हैं जो एसडीएम, मंत्री के सचिव और विशेष सचिव समेत अहम पदों पर नियुक्त हैं। संघ के एक प्रतिनिधि ने कहा, ‘दिल्ली सरकार को किसी दानिक्स अधिकारी को निलंबित करने का अधिकार नहीं है और वह केवल दानिक्स अधिकारी के निलंबन की सिफारिश कर सकती है और इस पर उपराज्यपाल केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुमति से उसे निलंबित कर सकते हैं’।

इस महीने के शुरू में केजरीवाल ने पश्चिमी दिल्ली के शकूर बस्ती इलाके में रेलवे की गिराई गई झुग्गियों के पीड़ितों को तुरंत राहत मुहैया कराने में विफल रहने पर दो एसडीएम को भी निलंबित कर दिया था। हालांकि ये दोनों एसडीएम अभी भी अपने पदों पर कायम हैं और अपना काम कर रहे हैं।

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