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AIIMS की रिपोर्ट के अनुसार, आप विधायक की पत्नी को थे कुत्ते के काटने के निशान: पुलिस

घरेलू हिंसा मामले का सामना कर रहे विवादित आप नेता सोमनाथ भारती को बड़ा झटका देते हुए पुलिस ने आज दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि एक मेडिकल रिपोर्ट में राय व्यक्त की गई है कि उनकी पत्नी के शरीर पर निशान ‘‘कुत्ते के काटने के और जलने के’’ हैं।

Author May 12, 2017 10:41 PM
आप नेता सोमनाथ भारती

घरेलू हिंसा मामले का सामना कर रहे विवादित आप नेता सोमनाथ भारती को बड़ा झटका देते हुए पुलिस ने आज दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि एक मेडिकल रिपोर्ट में राय व्यक्त की गई है कि उनकी पत्नी के शरीर पर निशान ‘‘कुत्ते के काटने के और जलने के’’ हैं। जांचकर्ताओं ने न्यायमूर्ति आई एस मेहता के सामने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व विधि मंत्री अपनी पत्नी लिपिका मित्रा का उत्पीडन करते थे और उन्हें पीटते थे। लिपिका ने घरेलू हिंसा के मामले में भारती की जमानत रद्द करने का अनुरोध किया है। आठ दिन जेल में बिताने के बाद सात अक्तूबर 2015 को जमानत पाने वाले विधायक ने उनकी पत्नी द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से इंकार किया। उनके वकील ने आज अदालत को बताया कि वे प्रत्युत्तर दायर करना चाहते हैं। पुलिस के निर्देश के बाद हलफनामा दायर करने वाली पुलिस ने अदालत को मौखिक रूप से बताया कि एम्स के मेडिकल बोर्ड ने राय दी है कि महिला के शरीर पर निशान कुत्ते के काटने और जलने के हैं।

जांचकर्ताओं ने पिछले साल पांच अप्रैल को इस मामले में आरोपपत्र दायर करके कहा था कि महिला ने आरोप लगाया है कि भारती ने उन पर अपना कुत्ता छोड़कर उनके अजन्मे बच्चे का जीवन खतरे में डाला। पुलिस ने हफलनामे में कहा, ‘‘एम्स मेडिकल बोर्ड ने छह फोटो की जांच की जो कुत्ते के काटने के इलाज के इतिहास से संंबंधित है। पुलिस ने कहा, ‘‘हमारी यह भी राय है कि निशान कुत्ते के काटने की चोटों का परिणाम हो सकती हैं। पुलिस ने यह भी दावा किया कि चोट के कुछ निशान ‘‘जलने के कारण’’ हुए हैं। पुलिस ने कहा, ‘‘सोमनाथ भारती शादी की शुरूआत से ही याचिकाकर्ता (पत्नी) का उत्पीडन, पिटाई और अभद्रता करते थे, जबकि उन्हें याचिकाकर्ता की खराब स्वास्थ्य के बारे में पता था।

पुलिस ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता द्वारा पेश मेडिकल रिकार्ड की जांच और सत्यापन किया गया तथा इसे पता चलता है कि वह गर्भवती होने के समय मधुमेह और उच्च रक्तचाप से ग्रस्त थी। लिपिका ने जमानत आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी और कहा था कि यह लगभग फैसले की तरह है और निचली अदालत ने केस डायरी पर भरोसा किया जो उस चरण में कथित रूप से नहीं होना चाहिए था।

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