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कुमार विश्‍वास ने अरुण जेटली को लिखी चिट्ठी- झूठा है हमारा नेता अरविंद केजरीवाल, अब फोन तक नहीं उठाता

कुमार विश्वास ने अपनी इस चिट्ठी में लिखा है कि जेल जाने और मुख्यमंत्री की कुर्सी हाथ से फिसलने के डर ने अरविंद केजरीवाल को विक्रम मजीठिया, नितिन गडकरी और कपिल सिब्बल से माफी मांगने को मजबूर किया है।

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कुमार विश्वास के खिलाफ दायर मानहानि का केस वापस ले लिया है।

आम आदमी पार्टी के नेता और मशहूर कवि कुमार विश्वास ने मानहानि मामले में वित्त मंत्री अरुण जेटली से माफी मांग ली है। अरुण जेटली की तरफ से भी कुमार विशावस की माफी स्वीकार कर ली गई है और उनपर से मानाहानि केस वापस लेने का फैसला किया गया है। कुमार विश्वास ने सोमवार सुबह अरुण जेटली को चिट्ठी लिख उनसे माफी मांगी। कुमार विश्वास की ये चिट्ठी सोशल मीडिया में भी वायरल हो गई है। चिट्ठी में कुमार ने दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर इस मामले का ठीकरा फोड़ते हुए कहा कि उनकी बातों में आकर ही उन्होंने जेटली, नितिन गठकरी, कपिल सिब्बल और विक्रम मजीठिया जैसे लोगों पर जुबानी हमले किये थे। कुमार विश्वास ने लिखा है कि हमारा नेता झूठा था, हम सब उसकी बातों और आरोपों को सही मानते गए और फिर उसने ही सबसे माफी मांगनी शुरू कर दी। कुमार विश्वास का कहना है कि अरुण जेटली ने जो उनपर मानहानि का मुकदमा किया था उसके लिए केजरीवाल के दफ्तर से उन्हें ना तो जरूरी कागजात दिये जा रहे हैं और ना ही अरविंद उनका फोन उठा रहे हैं। ऐसे में वह यह मानहानि का मुकदमा नहीं लड़ पा रहे।

कुमार विश्वास ने अपनी इस चिट्ठी में लिखा है कि जेल जाने और मुख्यमंत्री की कुर्सी हाथ से फिसलने के डर ने अरविंद केजरीवाल को विक्रम मजीठिया, नितिन गडकरी और कपिल सिब्बल से माफी मांगने को मजबूर किया है। कुमार विश्वास का कहना है कि उन्होंने और उनके जैसे हजारों आप कार्यकर्ताओं ने अरविंद केजरीवाल की बातों पर अंधा विश्वास किया लेकिन अब वह लोग ठगा महसूस कर रहे हैं।

कुमार विश्वास ने अपनी चिट्ठी में अरुण जेटली से माफी मांगते हुए लिखा है कि आपको और आपके परिवार को अगर हमारे आदतन झूठे नेता के आरोपों और हम जैसों के उसे दोहराने से जो कष्ट हुआ है उसके लिए मुझे दुख है। उम्मीद करता हूं कि आप भी हन जैसे निर्दोष कार्यकर्ताओं को इस वावाद में ज्यादा तकलीफ नहीं देंगे। कुमार विश्वास ने अपनी चिट्ठी का अंत चार लाइन की कविता से किया है। कुमार ने लिखा है-

“पराए आंसुओं से आंख को नम कर रहा हूं मैं,
भरोसा आजकल खुद पर भी कुछ कम कर रहा हूं मैं,

बड़ी मुश्किल से जागी थी जमाने के निगाहों में,
उसी उम्मीद के मरने का मातम कर रहा हूं मैं।”

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