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छह साल की हुई आम आदमी पार्टी, मुख्यालय में होगा जलसा

अण्णा हजारे पार्टी बनाने के पक्ष में नहीं थे और किरण बेदी व संतोष हेगड़े सरीखे लोगों ने भी इसका विरोध किया था, जबकि बाद में पार्टी से बाहर किए गए योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण आदि नेताओं ने पार्टी के गठन की पुरजोर वकालत की थी। नवगठित पार्टी ने साल 2013 के चुनाव में कांग्रेस के 15 साल पुराने सत्ता के किले को ढहाकर कांग्रेस के ही सहयोग से दिल्ली में सरकार बनाई।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो- Twitter/@AamAadmiParty)

दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी (आप) सोमवार को अपनी स्थापना के छह साल पूरे कर लेगी। इस उपलक्ष्य में पार्टी मुख्यालय में एक जलसे का आयोजन किया गया है, जिसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री व पार्टी के राष्टÑीय संयोजक अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेता शामिल होंगे। आम आदमी पार्टी की ओर से जारी सूचना में बताया गया है कि सोमवार को पार्टी के राउज एवेन्यू मुख्यालय में स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया है जिसमें पार्टी के मुखिया केजरीवाल भी शिरकत करेंगे। बता दें कि इससे पहले आम आदमी पार्टी का स्थापना समारोह रामलीला मैदान में होता रहा है। पिछले साल भी पार्टी ने इसी ऐतिहासिक मैदान में अपना स्थापना दिवस मनाया था। इंडिया अगेंस्ट करप्शन के बैनर तले समाजसेवी अण्णा हजारे के साथ मिलकर रामलीला मैदान से जोरदार आंदोलन चलाने वाले अरविंद केजरीवाल ने 2 अक्तूबर 2012 को आम आदमी पार्टी के गठन का एलान किया था जबकि पार्टी की विधिवत स्थापना की घोषणा 26 नवंबर 2012 को हुई।

अण्णा हजारे पार्टी बनाने के पक्ष में नहीं थे और किरण बेदी व संतोष हेगड़े सरीखे लोगों ने भी इसका विरोध किया था, जबकि बाद में पार्टी से बाहर किए गए योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण आदि नेताओं ने पार्टी के गठन की पुरजोर वकालत की थी। नवगठित पार्टी ने साल 2013 के चुनाव में कांग्रेस के 15 साल पुराने सत्ता के किले को ढहाकर कांग्रेस के ही सहयोग से दिल्ली में सरकार बनाई। इसके बाद साल 2015 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल कर करीब 54 फीसद मत फीसद के साथ राजधानी की 70 विधानसभा सीटों में से 67 पर कब्जा जमाया और कांग्रेस का आंकड़ा शून्य पर पहुंचा दिया।

आंकड़ों पर गौर करें तो आम आदमी पार्टी के लोकसभा में चार व राज्यसभा में तीन सांसद हैं जबकि दिल्ली में उसके 66 विधायक हैं। इसी तरह पंजाब विधानसभा में उसके 20 विधायक हैं। दिल्ली में पार्टी के नगर निगम पार्षदों की संख्या भी 40 के करीब है। तीनों निगमों में उसने कांग्रेस को प्रमुख विपक्षी दल की कुर्सी से हटाकर खुद कब्जा जमा लिया है।

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