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आप और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव की नई जमीन

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली पुलिस पर दबाव बनाने के लिए एक जांच आयोग का गठन किया है

Author नई दिल्ली | January 28, 2016 2:26 AM
पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी (बाएं) और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (दाएं)।

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली पुलिस पर दबाव बनाने के लिए एक जांच आयोग का गठन किया है। यह आयोग महिलाओं की ऐसी शिकायतों पर विचार करेगा जिस पर पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। पैनल से महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में कार्रवाई की सिफारिश करने और मौजूदा कानून में संशोधन के लिए भी कहा गया है।

सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश दिनेश दयाल के नेतृत्व वाला तीन सदस्यीय आयोग फरवरी 2013 के बाद की महिलाओं की शिकायतों को लेगा जिनमें हिंसा, यौन उत्पीड़न, पीछा करने के मामले शामिल हैं। जांच आयोग की नियुक्ति को महिला व बाल विकास विभाग ने 19 जनवरी को अधिसूचित किया। अरविंद केजरीवाल सरकार ने अगस्त में विधानसभा का एक दिवसीय सत्र बुलाया था जिसमें पिछले साल 16 जुलाई को आनंद पर्वत क्षेत्र में एक 19 साल की लड़की की निर्मम हत्या के मद्देनजर एक आयोग गठित करने का प्रस्ताव पारित किया गया था।

आयोग का कार्यकाल दो साल का होगा और यह सरकार को पहली बैठक की तारीख से ही हर तीन महीने में रिपोर्ट पेश करेगा। आयोग की सेवा शर्तों के मुताबिक, वह फरवरी 2013 के बाद महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़ी ऐसी शिकायतों को देखेगा जिन पर ध्यान नहीं दिया गया। इन पर न्यायमूर्ति वर्मा आयोग की कुछ सिफारिशों के आधार पर आइपीसी (1860) और सीआरपीसी (1973) में किए गए संशोधनों के अनुरूप विचार होगा और राज्य सरकार को इस बारे में की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में सुझाव देगी।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इसके कामकाज के दायरे में अगर जरूरी हुआ तब संबंधित कानूनों में जरूरी संशोधनों के बारे में सुझाव देना भी शामिल है। उसे इन मामलों को देखने के बाद अगर प्रथम दृष्टया लापरवाही या सांठगांठ का कोई मामला बनता है तब इस बारे में भी सरकार को कार्रवाई की सिफारिश करनी है’।

अन्य कार्यों में आयोग को ऐसे आपराधिक मामलों में प्रक्रिया में तेजी लाने और वर्तमान कानूनों और ऐसी घटनाओं को फिर घटित होने से रोकने के लिए वर्मा आयोग की सिफारिशों को उचित तरीके से लागू करने के लिए उठाए जाने वाले कदम का प्रस्ताव करना है। उसे कानून अनुपालन एजंसियों के वास्तविक कर्मियों के कामकाज की दशा सुधारने के लिए कल्याण योजनाओं की सिफारिश करने की उम्मीद की जाती है।

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