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अब रामदास की छुट्टी, प्रशांत भूषण को ‘आप’ की अनुशासन समिति से निकाला

जनलोकपाल के लिए किए आंदोलन से उपजी पार्टी ने अपने ही लोकपाल को हटा दिया है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी से प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को बाहर किए जाने के बाद रविवार को आम आदमी पार्टी (आप) ने एडमिरल एल रामदास को आंतरिक लोकपाल व प्रशांत भूषण को राष्ट्रीय अनुशासन समिति के प्रमुख के पद से […]
AAP Crisis: आप की राष्ट्रीय अनुशासन समिति से प्रशांत भूषण को हटाया गया। (फ़ोटो-भाषा)

जनलोकपाल के लिए किए आंदोलन से उपजी पार्टी ने अपने ही लोकपाल को हटा दिया है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी से प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को बाहर किए जाने के बाद रविवार को आम आदमी पार्टी (आप) ने एडमिरल एल रामदास को आंतरिक लोकपाल व प्रशांत भूषण को राष्ट्रीय अनुशासन समिति के प्रमुख के पद से हटा दिया। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आपात बैठक में आप ने आंतरिक लोकपाल पैनल में बदलाव करते हुए तीन नए सदस्यों को शामिल किया व नई अनुशासन समिति का गठन किया। केजरीवाल के घर पर चली बैठक के बाद बैठक में हुए फैसले के बारे में पंकज गुप्ता ने जानकारी दी।

आप ने कहा है कि पार्टी के आंतरिक लोकपाल पैनल का कार्यकाल समाप्त हो गया था इसलिए नए पैनल का गठन किया गया। पिछले पैनल के अध्यक्ष एडमिरल रामदास रहे। नए लोकपाल पैनल में पार्टी पूर्व आइपीएस अधिकारी एन दिलीप कुमार, राकेश सिन्हा व शिक्षाविद एसपी वर्मा को लाई है। आप के राष्ट्रीय सचिव पंकज गुप्ता ने कहा कि इन सभी लोगों ने पार्टी के लोकपाल पैनल के लिए अपनी ओर से सहमति दे दी है। इसके अलावा आप ने करीब चार और मामलों के बाबत बैठक में फैसला किया।

आप ने तय किया है कि अब प्रशांत भूषण की जगह पर दिनेश वाघेला तीन सदस्यीय अनुशासन समिति की अध्यक्षता करेंगे। इसमें अरविंद केजरीवाल के वफादार माने जाने वाले आशीष खेतान और राष्ट्रीय सचिव पंकज गुप्ता भी शामिल हैं।

पूर्व नौसेना प्रमुख रामदास को लोकपाल के पद से हटाने का फैसला उस वक्त हुआ है जब एक दिन पहले उन्होंने आप की पीएसी को पत्र लिखकर पार्टी नेतृत्व की आलोचना की थी। बाद में आप ने रामदास को पत्र भेजकर राष्ट्रीय परिषद की बैठक में शामिल नहीं होने के लिए कहा था ताकि टकराव टाला जा सके। रामदास इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए महाराष्ट्र से दिल्ली आए थे, जबकि पार्टी के तमाम नेताओं ने उनसे पार्टी की बैठक मे आने का आग्रह किया था। लेकिन उन्होंने कहा कि पार्टी के आग्रह को सम्मान देने के लिए वे बैठक में शामिल नहीं होंगे।

उधर एडमिरल रामदास ने कहा है कि उनका कार्यकाल लोकसभा चुनावों के समय ही बढ़ा दिया गया था। इसके अलावा उन्हें लोकसभा चुनाव मे जीते उम्मीदवारों के बारे में जांच करने का जिम्मा भी सौंपा गया। इतना ही नहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी जिन 20 लोगों के नाम पर आपत्ति थी उनकी जांच का काम भी सौंपा गया था। एडमिरल ने यह भी कहा है कि वे पार्टी के आंतरिक लोकपाल के अलावा पार्टी के सहयोगियों को दोस्ताना समर्थन व सलाह भी देते आए हैं। उन्हें जो काम सौंपा गया उसे किया। लेकि न पार्टी ने आंतरिक लोकपाल के पद से उन्हें हटाने की के बाबत जो फैसला किया उसके बारे में उन्हें बताए बिना ही फैसला सार्वजनिक कर दिया।

आप ने एक समिति का भी एलान किया है जो आगामी 22 अप्रैल को भूमि अधिग्रहण अधायदेश के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन की रूपरेखा को लेकर काम करेगी। पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर संसद का घेराव करने की योजना बनाई है। इस प्रदर्शन में देश भर से आप के कार्यकर्ता शामिल होंगे। इस समिति में इलियास आजमी, प्रेम सिंह पहाड़ी, योगेश दहिया, सोमेंद्र ढाका, गुरनाम सिंह और किरण वीसा शामिल होंगे। पार्टी ने एक और समिति का भी गठन किया है जिसकी अध्यक्षता पीएसी सदस्य संजय सिंह करेंगे। यह समिति दूसरे राज्य में संगठन के विस्तार को लेकर गौर करेगी। साथ ही समिति इस बात की संभावना भी देखेगी कि पार्टी आने वाले समय में देश के कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में हिस्सा ले सकती है अथवा नहीं। यह समिति अगले 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

निराश हैं रामदास:

बहुत ही आश्चर्य और दुख के साथ मैंने एक पत्रकार से यह खबर सुनी कि आम आदमी पार्टी को बतौर आंतरिक लोकपाल अब मेरी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है। विभिन्न मीडिया में आई खबरों ने बाद में इसकी पुष्टि कर दी। मैं निराश हूं कि पार्टी नेतृत्व ने फैसले को सार्वजनिक करने से पहले मुझे सूचित नहीं किया। मैं अभी भी उनके फोन का इंतजार कर रहा हूं। मुझे आश्चर्य हो रहा है क्योंकि दो सप्ताह भी नहीं हुए जब पार्टी ने मुझमें अपना विश्वास जताया था। मेरे कार्यकाल के दौरान कभी भी पार्टी ने मेरी सेवाओं के प्रति असंतोष नहीं जताया। पिछले महीने हुई एक अनौपचारिक बैठक में पार्टी ने मुझसे पांच साल इस पद पर बने रहने का अनुरोध किया था।

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  1. Jatish Dubey
    Mar 29, 2015 at 3:36 pm
    एक घर, परिवार, मोहल्ला, गांव, ढाणी, नगर में जगह जगह पर मौजूद आम आदमी के बीच जो कुछ चलता रहता है वैसा ही आम आदमी की पोलिटिकल पार्टी में आम आदमी की राजनीति करने वाले नेताओं के बीच विकसित हो रहा लगता है. शायद आज के भारतीय जनतंत्र के वोटर या आम आदमी के लिए नई राजनीति का विकास ऐसे ही होना हो.
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