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दिल्ली ही नहीं, देश के लिए भी खतरा है नीति आयोगः मनीष सिसोदिया

दिल्ली विधानसभा में नीति आयोग पर हुई चर्चा पर जवाब देते हुए दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मोदी सरकार और नीति आयोग पर दिल्ली के अधिकारों में कटौती करने का आरोप लगाया।

Author नई दिल्ली | Published on: August 25, 2016 2:36 AM
(फ़ोटो-पीटीआई फाइल)

दिल्ली विधानसभा में नीति आयोग पर हुई चर्चा पर जवाब देते हुए दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मोदी सरकार और नीति आयोग पर दिल्ली के अधिकारों में कटौती करने का आरोप लगाया। सदन में आप विधायक कैलाश गहलौत ने नीति आयोग पर चर्चा का ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने योजना आयोग का नाम बदलकर नीति आयोग करने को बुरा फैसला बताया। उन्होंने कहा कि नीति आयोग राज्यों के अधिकारों में ही कटौती करता है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि नीति आयोग दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के लिए भी खतरे का संकेत है। केंद्र की मौजूदा सरकार देश के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। केंद्र की भूमिका बड़े भाई की तरह होनी चाहिए। लेकिन यह सरकार लोकतांत्रिक ढांचे पर ही कुठाराघात करने में लगी है। नीति आयोग से न केवल दिल्ली बल्कि भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी दुखी हैं।

सिसोदिया ने कहा कि केंद्र की सरकार दिल्ली को लेकर विरोधाभासी कदम उठाती रहती है। राज्य सरकारें अपनी कमाई का एक हिस्सा केंद्र सरकार के पास जमा करवाती है। उसके बाद केंद्र सरकार केंद्रीय योजनाओं को राज्यों में लागू करवाने को लेकर धन मुहैया करवाती है। केंद्रीय योजनाओं को दिल्ली में लागू करवाने को लेकर कभी नीति आयोग 80 फीसद की राशि देता है और कभी 70 फीसद। उन्होंने कहा कि हाल ही में एक आदेश निकला कि दिल्ली केंद्र शासित राज्य है, इसलिए उसे 100 फीसद राशि केंद्रीय योजनाओं को लागू करवाने के लिए दी जाएगी। केंद्र के उस आदेश के बाद अधिकारियों को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसके बाद फिर से एक आदेश निकाल कर दिल्ली के अधिकारों में कटौती कर दी गई।

सदन में विपक्ष के नेता ने महानियंत्रक लेखा परीक्षक (सीएजी) की रिर्पोट सदन में रखने को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया। उस समय दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सदन में नहीं थे। सीएजी की ओर से दिल्ली सरकार की 31 मार्च 2016 को खत्म होने वाले वित्तीय वर्ष की रिर्पोट को दिल्ली विधानसभा में रखने की मांग की है। दिल्ली विधानसभा का मौजूदा सत्र शुरू होने से पहले ही प्रस्तुत किया जा चुका है। सरकार को रिर्पोट के विषय में सदन को विश्वास में लेना चाहिए था। लेकिन दिल्ली सरकार ने उसकी भनक तक नहीं लगने दी।

विधानसभा अध्यक्ष ने विजेंद्र गुप्ता को इस पर बोलने की इजाजत नहीं दी। लेकिन गुप्ता सदन में बोलते रहे। उसी समय उपमुख्यमंत्री सिसोदिया सदन में आ गए। उन्होंने विजेंद्र से सवाल किया कि वे कौन सी रिर्पोट की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी में अभी तक इस तरह की कोई भी सीएजी की रिर्पोट सामने नहीं आई है। यदि उनकी जानकारी में कोई रिर्पोट है, तो वे ही उसे सदन में रख दें, वे उस पर चर्चा करवा देते हैं। उधर, गुप्ता अपनी बात पर अड़े रहे और सदन में सीएजी की रिर्पोट की चर्चा करवाने की मांग करते रहे। सदन में जब गुप्ता की बात पर गौर नहीं किया गया तो विपक्षी दल भाजपा के दोनों विधायक सदन से वाकआउट करके चले गए।

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