आबकारी मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को बुधवार को पत्र लिखा गया है।

इसमें मांग की गई है कि सीबीआई की ओर से दायर की गई याचिका को जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की बेंच से किसी और बेंच के पास भेज दिया जाए।

अरविंद केजरीवाल भी इस मामले में प्रतिवादी हैं। 11 मार्च को लिखे पत्र में केजरीवाल ने आशंका व्यक्त की है कि यदि मामला न्यायमूर्ति शर्मा के पास रहता है तो मामले की सुनवाई निष्पक्षता और तटस्थता से नहीं हो पाएगी।

23 आरोपियों को कर दिया था बरी

दिल्ली की एक निचली अदालत ने कुछ दिन पहले केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को दिल्ली आबकारी मामले में बरी कर दिया था। सीबीआई ने इस आदेश को चुनौती दी है। इस मामले की सुनवाई फिलहाल जस्टिस शर्मा कर रही हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि वह निचली अदालत के द्वारा इस मामले में सीबीआई के अफसरों के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगाएगी।

ईडी की याचिका पर मांगा था जवाब

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आबकारी नीति मामले में आरोपी 21 अन्य लोगों से ईडी की याचिका पर जवाब मांगा था। याचिका में निचली अदालत द्वारा ईडी के खिलाफ की गई ‘गलत’ टिप्पणियों को हटाने का अनुरोध किया गया था। इस मामले में 19 मार्च को अगली सुनवाई होगी।

ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने दलील दी कि निचली अदालत के न्यायाधीश को उस मामले में प्रतिकूल टिप्पणी करने और आरोप लगाने का कोई अधिकार नहीं था, जिसमें ईडी पक्षकार ही नहीं थी। राजू ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह निर्देश दे कि इन टिप्पणियों का किसी अन्य मामले पर कोई प्रभाव न पड़े।

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दिल्ली आबकारी मामले में अदालत ने पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को बरी करते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका। क्लिक कर पढ़िए पूरी खबर।