Pubjab Government Big Decesion: पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने आगामी 2027 विधानसभा चुनावों से पहले जरूरतमंद परिवारों को अतिरिक्त राशन सामग्री उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। सरकार गेहूं के साथ दाल, चाय पत्ती, चीनी, सरसों का तेल, नमक और हल्दी वितरित करेगी। इस प्रस्ताव को सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।

40 लाख लाभार्थी परिवारों को फायदा

सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद ‘आटा-दाल’ योजना के अंतर्गत पंजीकृत लगभग 40 लाख लाभार्थी परिवारों को प्रति परिवार दो किलोग्राम चीनी, दो किलोग्राम चना दाल, एक लीटर सरसों का तेल, एक किलोग्राम नमक तथा 200 ग्राम हल्दी दी जाएगी। यह सभी परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 अथवा स्मार्ट राशन कार्ड योजना के अंतर्गत पंजीकृत हैं।

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ‘पंजाब सरकार खाद्य कार्यक्रम’ नामक एक प्रमुख योजना को शीघ्र ही स्वीकृति दी जाएगी। इस योजना के तहप राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभार्थियों को राशन किट वितरित की जाएगी। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय चुनौतियां इस जनकल्याणकारी योजना के क्रियान्ववयन में बाधा नहीं बनेंगी। इसके लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाएगा, ताकि निर्बाध रूप से योजना का लाफ पहुंचाया जा सके।

गेहूं के साथ ही मिलेंगी अन्य सामग्री

सूत्रों के अनुसार, इस योजना को दिल्ली में लागू योजना की तर्ज पर लागू किया जा रहा है और अंतिम स्वीकृति आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के प्राप्त हुई है। वर्तमान में लाभार्थियों को प्रत्येक तिमाही 15 किलोग्राम गेहूं प्रदान किया जाता है। अब गेहूं की बोरी के साथ एक अलग थैले में उपरोक्त सामग्री प्रदान की जाएगी।

यह वितरण अप्रैल 2026 से प्रारंभ होगा। इसके बाद जून, अक्तूबर और दिसंबर में भी राशन किट वितरित की जाएगी। बताया जा रहा है कि अंतिम वितरण आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले किया जाएगा। इस योजना पर राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 1000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय करना पड़ेग। पंजाब पहले से ही आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है।

पूर्ववर्ती सरकारों की ओर से दाल का विरतण अनियमित रहा। साल 2017 में कांग्रेस ने भी मुफ्त दाल और चाय पत्ती देने का वादा किया था, लेकिन वित्तीय आभाव के कारण उसे लागू नहीं किया जा सका था। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने से पहले राज्य सरकार पर गेहूं खरीद के 900 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया था। यह बकाया अभी भी शेष है और नोडल एजेंसी ‘पनसप’ को इस पर प्रतिमाह लगभग 5.25 करोड़ रुपये के ब्याज का भुगतान करना पड़ रहा है।