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नहीं चल पाई आप की ऐप वाली बस, एसीबी ने शुरू की जांच

आरोप है कि केजरीवाल सरकार ने प्रीमियम बस सर्विस योजना के तहत कंपनी विशेष शटल को मंजूरी देने में ‘असाधारण शीघ्रता’ से काम लिया।

Author नई दिल्ली | Published on: June 2, 2016 1:06 AM
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दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने ऐप आधारित प्रीमियम बस सेवा के मामले में आपराधिक जांच शुरू कर दी है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार इस सेवा को बुधवार से शुरू करने वाली थी। लेकिन इस मामले की जांच के कारण इसे टाल दिया गया है। इस मामले की शिकायत दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में की थी।

आरोप है कि मौजूदा मामला राजकोष को व्यापक घाटा पहुंचाकर गुरुग्राम (गुड़गांव) स्थित एग्रीगेटर प्लेटफार्म शटल को वित्तीय लाभ पहुंचाने के मकसद से, तय प्रक्रिया को ताक पर रखकर सरकार ने अधिसूचना जारी की थी। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को लिखे गए पत्र में बताया गया कि किस प्रकार सरकार के बड़े मंत्रियों और आला अधिकारियों ने खास कंपनी से सांठगांठ की और उसे लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।

20 मई, 2016 को यातायात विभाग के सचिव सह-आयुक्त ने अधिसूचना जारी करते हुए जानकारी दी थी कि प्रीमियम बस सर्विस को उपराज्यपाल ने सहमति प्रदान कर दी है। लेकिन उपराज्यपाल नजीब जंग के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि उपराज्यपाल की ओर से इस आशय की कोई मंजूरी ही नहीं दी गई। इतना ही नहीं, इस प्रस्ताव को मंजूरी देने में मोटर वीकल एक्ट 1988 का भी गंभीर उल्लंघन किया गया। इसके अनुच्छेद 66-एन में असाधारण परिस्थितियों में इस प्रकार की मंजूरी प्रदान करने का प्रावधान है। लेकिन दिल्ली सरकार ने किसी भी प्रकार की शीघ्रता न होते हुए भी, असाधारण परिस्थितियों वाले परिच्छेद का दुरुपयोग किया।

आरोप है कि केजरीवाल सरकार ने प्रीमियम बस सर्विस योजना के तहत कंपनी विशेष शटल को मंजूरी देने में ‘असाधारण शीघ्रता’ से काम लिया। सरकार के पास योजना को प्रक्रिया के अनुसार मंजूरी प्रदान करने के लिए समुचित समय था। इसके बावजूद सरकार ने विधि विभाग और वित्त विभाग के साथ परामर्श करना उचित नहीं समझा । कैबिनेट को निर्णय लेने से पूर्व विधि और वित्त विभाग की पूर्वानुमति लेना आवश्यक होता है, लेकिन इस मामले में इस प्रकार की कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

इस मामले के बारे में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि दिल्ली डायलाग कमीशन ने प्रारंभिक रूप से इस योजना के लिए जो मसौदा तैयार किया था, उसे यातायात विभाग ने गैरकानूनी पाया था। इसके बाद यातायात मंत्री ने खुद इसे तैयार किया जिसमें संबंधित प्राइवेट कंपनी के उच्चाधिकारियों की सहायता ली गई। यातायात मंत्री के हस्ताक्षर से इसे कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए रखा गया। बैठक में किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि क्या इसके लिए विधि और वित्त विभागों से मंजूरी ली गई है। किसी ने इस योजना की विधीय स्थिति जानने के चेष्ठा नहीं की।

किसी ने यह भी नहीं सोचा कि इससे सरकार के राजकोष को कितना नुकसान होगा। और तो और सवारियों और अन्य नागरिकों की सुरक्षा का भी कोई आकलन नहीं किया गया। कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव में न तो बसों की संख्या की कोई सीमा तय की गई और न हीं बस के रूटों और बसों की ओर से लगाए जाने वाले चक्करों की संख्या तय की गई। गुप्ता ने कहा कि इन तथ्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि उपरोक्त योजना को एक फर्म विशेष को भारी वित्तीय लाभ पहुंचाने के लिए तैयार, स्वीकृत और अधिसूचित किया गया । इससे सरकारी राजकोष को भारी घाटा होने का अंदेशा है। इसमें नियमों की भारी अवहेलना हुई है ।

इस बीच एसीबी प्रमुख एमके मीणा ने इस बात की पुष्टि की कि दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता की शिकायत पर जांच शुरू की गई जिन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गुड़गांव की एक बस कंपनी को ‘फायदा पहुंचाने का प्रयास’ कर रही है। दिल्ली के परिवहन आयुक्त संजय कुमार द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना में कहा गया है, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के उपराज्यपाल यह अधिसूचित करते हुए प्रसन्नता अनुभव कर रहे हैं कि ऐप आधारित प्रीमियम बस सेवा योजनाओं के लिए निर्धारित दिशा-निर्देश के मुताबिक दिल्ली में चलने वाली सभी प्रीमियम बस का मकसद प्रदूषण के स्तर में कमी लाना है और मोटर वाहन कानून 1998 की धारा 66 के उपखंड (एक) के प्रावधानों से उन्हें छूट हासिल होगी जो इस तरह की बसों के संचालन में आवश्यक होगा।

मीडिया की खबरों का उद्धरण देते हुए गुप्ता ने कहा कि उपराज्यपाल कार्यालय ने 28 मई को स्पष्ट किया कि प्रीमियम बस सेवा के लिए उन्होंने कोई ‘मंजूरी’ नहीं दी। उन्होंने कहा, यह आपराधिक जांच का विषय है कि किस तरह आप सरकार सचिव सह आयुक्त (परिवहन) के हस्ताक्षर का दुरुपयोग उपराज्यपाल के नाम पर इस तरह कर सकती है। गुप्ता ने अपनी शिकायत में दावा किया कि पूरी योजना गुड़गांव की एक बस कंपनी के पक्ष में तैयार की गई है जो दिल्ली में अवैध रूप से कंट्रैक्ट कैरिज बसों का संचालन कर रही है।

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