सरकार और कंपनियों की लड़ाई से लग सकते हैं बिजली के झटके - Jansatta
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सरकार और कंपनियों की लड़ाई से लग सकते हैं बिजली के झटके

बिजली वितरण कंपनियां गर्मी के मौसम में बिजली की मांग को पूरा करने के तमाम दावे कर रही हैं, इसके बावजूद बिजली संकट की संभावना बरकरार है।

Author नई दिल्ली | March 7, 2016 1:37 AM
(File Pic)

बिजली वितरण कंपनियां गर्मी के मौसम में बिजली की मांग को पूरा करने के तमाम दावे कर रही हैं, इसके बावजूद बिजली संकट की संभावना बरकरार है। इसका कारण बिजली की आपूर्ति में कमी और मांग ज्यादा होना है। इस संकट को हल करने के बजाय सरकार और बिजली कंपनियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रही हैं। निजी बिजली कंपनियों का दावा है कि वह दिल्ली सरकार से अलग केंद्रीय ऊर्जा संयंत्र और अन्य राज्यों के ऊर्जा संयंत्रों से महंगी बिजली खरीदकर दिल्ली के उपभोक्ताओं की मांग पूरा करती हैं जबकि दिल्ली सरकार की ट्रांसको का साफ कहना है कि वितरण कंपनियों पर करोड़ों रुपए बकाया है। बकाया नहीं चुकाने से ट्रांसको को नए संयंत्रों को पूरा करने में मुश्किलें आ रही है।

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय ऊर्जा संयंत्रों में एनटीपीसी अंता, एनटीपीसी अरावली, एनटीपीसी औरैया, बदरपुर थर्मल पावर स्टेशन, दादरी गैस संयंत्र, दादरी प्रथम और दादरी द्वितीय इस समय निजी कंपनियों को महंगी कीमत पर बिजली उपलब्ध करा रहे हैं। यहां से अलग-अलग दामों पर बिजली खरीदी जाती है। यह खरीदारी 5.09 रुपए से लेकर 9.85 रुपए प्रति यूनिट है। इसके अलावा 60 पैसे ट्रांसमिशन चार्ज अलग से लिया जाता है, जबकि इससे अलग टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिडेट (टीपीडीडीएल) को 3.70 रुपए प्रति यूनिट पर बिजली वैकल्पिक स्रोतों से उपलब्ध है। केंद्रीय ऊर्जा संयंत्र एनटीपीसी से अलग निजी कंपनियों को दिल्ली सरकार की आइपीजीसीएल जीटी, पीपीसीएल प्रगति और पीपीजीएल बवाना से भी 5.96 रुपए से लेकर 7.88 रुपए प्रति यूनिट बिजली खरीदनी पड़ रही है। यहां 30 पैसे प्रति यूनिट ट्रांसमिशन चार्ज देना पड़ता है। चूंकि सस्ते दामों पर गैस उपलब्ध नहीं है, इसलिए दिल्ली सरकार के तीन गैस संयंत्र महंगी कीमत पर बिजली का उत्पादन करने को मजबूर हैं। प्रगति पावर से 320, बवाना से 1064 और जीटी से 262 मेगावाट बिजली दिल्ली को मिलती है। इन तीनों कंपनियों की मरम्मत सालों से नहीं हुई है। 900 करोड़ रुपए के बवाना संयंत्र में सस्ती गैस नहीं होने से 30 फीसद बिजली का उत्पादन हो पाता है। एनटीपीसी सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन करता है और यहां अंता में 419 मेगावाट से लेकर अरावली में 1500 मेगावाट तक बिजली उत्पादन होता है।

निजी बिजली वितरण कंपनी टीपीडीडीएल के सीईओ प्रवीर सिंहा कहते हैं कि हमारा नेटवर्क 1200 करोड़ रुपए का है। हमने देश का पहला स्मार्ट ग्रिड लैब बनाया। अमेरिका की मदद से सौर ऊर्जा संयंत्र पर भी काम हो रहा है। दिल्ली सरकार अभी तक सौर ऊर्जा पर कोई नीति नहीं ला पाई है। हमारी कंपनी ने 20 हजार उपभोक्ताओं को एलईडी बल्ब देकर बिजली खपत को कम करने का बीड़ा उठाया। इन तमाम कवायदों के बावजूद हम खरीद और आपूर्ति में अभी भी घाटे में चल रहे हैं। 40 से 50 पैसे प्रति यूनिट घाटे में हम उपभोक्ता को बिजली उपलब्ध कराते हैं। दिल्ली में ट्रांसमिशन कॉडिोर नहीं होने से हमें दूसरे संयंत्रों से बिजली लेने में भी मुश्किल होती है। हमने दिल्ली सरकार को कई बार पत्र लिखकर अपना दर्द बताया, लेकिन न तो किसी पत्र का जवाब मिला और न ही ऊर्जा मंत्रालय ने इसे गंभीरता से लिया।

उधर, दिल्ली ट्रांसको के प्रवक्ता डॉ. ऋषि राज भाटी का कहना है कि टीडीपीपीएल पर हमारा 1900 करोड़ रुपए बकाया है। बजट की कमी से नए संयंत्र को पूरा करने में मुश्किलें आ रही हैं। इसके बावजूद टीडीपीपीएल को अपनी आंतरिक क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। जिस गोपालपुर ग्रिड, संजय गांधी ट्रांसपोर्टनगर ग्रिड, सब्जीमंडी, बवाना, रोहिणी और नया कर्मपुरा ग्रिड के लंबित होने की बात कही जा रही है, वह हमारा वैकल्पिक ऊर्जा संयंत्र है। दिल्ली ट्रांसको के शालीमार बाग सब स्टेशन की पर्याप्त क्षमता है। फरवरी में ही इसमें 720 मेगावाट की वृद्धि जोड़ी गई है। इसमें 320 मेगावाट टीडीपीपीएल के इलाके में ही है। उन्होंने कहा कि सरकार पर आरोप लगाने से पहले वितरण कंपनी को बकाए का भुगतान और वैकल्पिक स्रोतों की ओर ध्यान देने की जरूरत है।

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