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गठबंधन का पेच: कड़ी सौदेबाजी जारी, अकेले लड़ने की भी तैयारी

‘आप’ दिल्ली के अलावा हरियाणा, पंजाब और गोवा में गठबंधन चाहती है, तो कांग्रेस को चुनावी तालमेल का दायरा दिल्ली से बाहर कुबूल नहीं है।

दिल्ली कांग्रेस चीफ शीला दीक्षित। (फोटोः पीटीआई)

अजय पांडेय

दिल्ली की सात संसदीय सीटों पर गठबंधन से पहले कांग्रेस व आम आदमी पार्टी (आप) के बीच जबरदस्त सियासी सौदेबाजी हो रही है। ‘आप’ दिल्ली के अलावा हरियाणा, पंजाब और गोवा में गठबंधन चाहती है, तो कांग्रेस को चुनावी तालमेल का दायरा दिल्ली से बाहर कुबूल नहीं है। ‘आप’ केवल दिल्ली में गठबंधन होने की सूरत में कांग्रेस को महज दो सीटों की पेशकश कर रही है तो कांग्रेस तीन से कम पर मानने को तैयार नहीं है। दोनों दलों के बीच शह और मात का सियासी शतरंज जारी है।

बातचीत बेपटरी होती देख कांग्रेस के तेवरों में अब तल्खी भी दिख रही है। उसने गठबंधन की बातचीत के बीच सातों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। उधर, ‘आप’ पहले ही सातों सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में दिल्ली के करीब एक दर्जन वरिष्ठ नेताओं को बुलाकर उनसे गठबंधन पर उनकी राय जानी और दो खेमे में बंटे सूबे के नेताओं की राय जानने के बाद उन्हें यह कह कर वापस भेजा कि वे अपना फैसला जल्दी बताएंगे। दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको उनके फैसले का इंतजार कर रहे थे। उनको शनिवार शाम पार्टी हाईकमान की ओर से यह संदेश मिला कि जब तक गठबंधन पर अंतिम फैसला न हो जाए, तब तक वे उम्मीदवारों के नाम तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दें। इसके बाद ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित के घर पर देर रात स्क्रीनिंग समिति की बैठक हुई और सातों सीटों के लिए तीन-तीन उम्मीदवारों के पैनल तय कर दिए गए। दीक्षित के घर हुई बैठक में खुद दीक्षित के अलावा दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको और कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल शामिल थे। इन नेताओं की बैठक फिर से सोमवार को होने की संभावना है।

बताया जा रहा है कि सूबे में अब भी दोनों दलों को 3-3-1 के फार्मूले पर मनाने की कोशिशें जारी हैं। सूत्रों का कहना है कि ‘आप’ के नेता अब भी चाहते हैं कि गठबंधन दिल्ली के अलावा हरियाणा, पंजाब और गोवा में भी हो जाए जबकि कांग्रेस की प्रदेश इकाइयां इसके बिल्कुल खिलाफ हैं। कांग्रेस के रणनीतिकार दिल्ली में तो गठबंधन चाहते हैं लेकिन इससे बाहर नहीं जबकि ‘आप’ के नेता गठबंधन का दायरा दिल्ली से बाहर भी चाहते हैं।

हरियाणा में गठबंधन हो सकता है कारगर : गोपाल
‘आप’ के दिल्ली के संयोजक गोपाल राय ने कहा कि जींद उपचुनाव से यह साबित हो गया कि अगर हरियाणा में गठबंधन चुनाव लड़े तो सभी 10 सीटों पर भाजपा को शिकस्त दी जा सकती है। इसी प्रकार दिल्ली की जनता की भी यही राय है, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तीन महीने से यह छोटा सा फैसला नहीं कर पा रहे।

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