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Aadi Perukku 2018: दक्षिण भारत के मशहूर त्योहार ‘आदि पेरुक्कु’ के लिए इस जिले में घोषित हुई छुट्टी

Aadi Perukku 2018 Wishes Images: तिरुचरापल्ली प्रशासन ने आदि पेरुक्कु त्योहार पर कावेरी नदी में स्नान करने के लिए 7 जगहों की पहचान की है। इन घाटों पर फ्लडलाइट्स भी लगायी गई हैं, ताकि सुबह के वक्त पूजा करने में लोगों को कोई दिक्कत ना हो।

आदि पेरुक्कु त्योहार का एक दृश्य। (Image source: facebook/Chennai Ungal Kaiyil)

तमिलनाडु के तिरुचरापल्ली जिले में आज आदि पेरुक्कु फेस्टिवल के उपलक्ष्य में स्थानीय प्रशासन द्वारा छुट्टी घोषित कर दी गई है। बता दें कि आदि पेरुक्कु फेस्टिवल कावेरी नदी के प्रति श्रद्धाभाव रखने के तहत मनाया जाता है। तिरुचरापल्ली के जिला कलेक्टर के राजामणि ने एक बयान जारी कर कहा है कि शुक्रवार को सभी स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। हालांकि शुक्रवार की छुट्टी के बदले 18 अगस्त को शनिवार के दिन स्कूल कॉलेज और सरकारी कार्यालय खुले रखे जाएंगे। गौरतलब है कि आदि पेरुक्कु त्योहार कावेरी नदी के प्रति आभार जताने के उद्देश्य से मनाया जाता है, क्योंकि कावेरी नदी के कारण ही इलाके में संपन्नता आती है।

तिरुचरापल्ली प्रशासन ने आदि पेरुक्कु त्योहार पर कावेरी नदी में स्नान करने के लिए 7 जगहों की पहचान की है। ये सात जगहों में गरुड़ा मंडापम, अम्मा मंडापम, थिलईनयाग्म घाट, अय्यालमन घाट, गांधी घाट, ओदाथुरई घाट और सुब्रामणिया स्वामी मंदिर घाट शामिल की गई हैं। प्रशासन का कहना है कि बैरिकेड और पीने के पानी के टैंक सभी सातों घाटों पर लगा दिए गए हैं। साथ ही इन घाटों पर फ्लडलाइट्स भी लगायी गई हैं, ताकि सुबह के वक्त पूजा करने में लोगों को कोई दिक्कत ना हो। आदि पेरुक्कु उत्सव तिरुचरापल्ली के अलावा कावेरी नदी के किनारे बसे इरोड, तंजावुर और सलेम में भी धूमधाम से मनाया जाता है।

आदि पेरुक्कु एक हिंदू तमिल महोत्सव है, जो तमिल महीने आदि के 18वें दिन कावेरी नदी या किसी झील के किनारे मनाया जाता है। इस दौरान मानसून के कारण नदी में पानी काफी होता है, जो कि स्थानीय लोगों सुख-समृद्धि लेकर आता है। यह त्योहार किसानों और उन लोगों द्वारा विशेष तौर पर मनाया जाता है, जिनका जीवन पानी पर निर्भर है। पूजा के दौरान लोग मां कावेरी और बारिश के लिए वरुणा देवी की पूजा करते हैं, ताकि बारिश अच्छी हो और उससे फसल की बढ़िया पैदावार हो। इस दिन पचई अम्मान देवी की पूजा की जाती है, जिन्हें शांति और सद्भाव का प्रतीक माना जाता है। आदि पेरुक्कु के साथ दक्षिण भारत में त्योहारों की शुरुआत हो जाती है।

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