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खुद को बताता था सीबीआई अफसर, घर आने पर रोका-टोकी की तो बच्चे को मार अलमारी में रख दिया

पुलिस उपायुक्त असलम खान ने बताया, "अवधेश ने पुलिस से कहा कि आशीष के माता-पिता उसकी अनुपस्थिति में उसकी बुराई करते थे और उसका घर में आना पसंद नहीं करते थे।"

नई दिल्ली | Updated: February 13, 2018 8:49 PM
इस तस्वीर का इस्तेमाल खबर के प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है।

एक युवक ने राजधानी दिल्ली में माता-पिता से बदला लेने के लिए उनके सात वर्षीय बच्चे की हत्या कर दी। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने कहा कि आरोपी अवधेश को सोमवार रात गिरफ्तार किया गया। वह पीड़ित परिवार से परिचित है और दूर का रिश्तेदार है। वह पश्चिम दिल्ली के स्वरूप नगर में आशीष नाम के सात वर्षीय बच्चे के घर के पास रहता था। पुलिस उपायुक्त असलम खान ने आईएएनएस को बताया, “अवधेश ने पुलिस से कहा कि आशीष के माता-पिता उसकी अनुपस्थिति में उसकी बुराई करते थे और उसका घर में आना पसंद नहीं करते थे।” उन्होंने कहा, “उसने आशीष की हत्या की, शव को बांध कर अलमारी में रख दिया और बच्चे के परिवार का शुभचिंतक बनने का नाटक करता रहा।”

उन्होंने कहा, “उसने शव को ठिकाने लगाने की कोशिश नहीं की, क्योंकि उसे पता था कि रास्ते में सीसीटीवी लगे हुए हैं। घर से दरुगध आने पर पूछे जाने पर, उसने मरे हुए चूहे को दिखा दिया।” पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमने शव बरामद कर लिया है और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।” अवधेश ने आशीष के परिवार को यह भी झूठ बोला था कि वह केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में काम करता है। उसने पुलिस को बताया कि वह प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी कर रहा था और एक बार यूपीएससी परीक्षा में भी बैठा था।

पुलिस ने कहा कि 7 जनवरी को आशीष के लापता होने के बाद अवधेश ने आशीष के दादा के साथ इस बारे में स्वरूप नगर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट लिखवाई थी। अवधेश ने किसी भी प्रकार की शक की गुंजाइश टालने के लिए ऐसा किया था। खान ने कहा, “जांच के दौरान, पुलिस टीम ने सभी सीसीटीवी फुटेज को खंगाला, स्थानीय लोगों से मदद ली लेकिन लापता बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला।” उन्होंने कहा, “बच्चे के गुमशदगी के बाद कोई भी फोन नहीं आया, इसलिए हमने अपहरण के अलावा अन्य संभावनाओं को तलाशना शुरू कर दिया। अवधेश ने पुलिस के समक्ष खुद को आत्मविश्वास से पेश किया। पुलिस टीम ने आशीष के परिजनों के अलावा उसका भी बयान रिकॉर्ड किया था।”

किराने की दुकान चलाने वाले पीड़ित के पिता को तीन दिनों से अवधेश के घर नहीं आने पर उस पर शक हुआ। उसका आशीष के घर हमेश आना-जाना लगा रहता था। अधिकारी ने कहा, “पीड़ित के परिजनों ने पुलिस को इस बारे में सूचित किया और दोबारा पूछताछ के दौरान, वह टूट गया और अपना गुनाह कबूल कर लिया।”

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