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हाथियों को मारकर खा रहे हैं बाघ, कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में चिंताजनक खुलासा

अध्ययन के मुताबिक 2014 से 31 मई 2019 के बीच जानवरों के बीच लड़ाई में कुल नौ बाघ, 21 हाथी और छह चीते मृत पाए गए। अध्ययन में कहा गया है, ‘तीन प्रजातियों के बीच कुल 36 मामलों में 21 केवल हाथियों के मामले थे।

Author देहरादून | Published on: June 17, 2019 6:11 AM
एक आधिकारिक अध्ययन में बताया गया कि बाघ खासकर कम उम्र के हाथियों को शिकार बना रहे हैं।

उत्तराखंड के कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में बाघ हाथियों की जान ले रहे हैं और कुछ मामलों में उन्हें खा भी रहे हैं। एक आधिकारिक अध्ययन में बताया गया कि बाघ खासकर कम उम्र के हाथियों को शिकार बना रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि उद्यान के अधिकारियों द्वारा किए गए अध्ययन में यह चिंताजनक रुझान सामने आए हैं क्योंकि बाघ सामान्यत: हाथियों को नहीं खाते हैं। अध्ययन के मुताबिक 2014 से 31 मई 2019 के बीच जानवरों के बीच लड़ाई में कुल नौ बाघ, 21 हाथी और छह चीते मृत पाए गए। अध्ययन में कहा गया है, ‘तीन प्रजातियों के बीच कुल 36 मामलों में 21 केवल हाथियों के मामले थे। बहरहाल, काफी आश्चर्यजनक पहलू यह था कि करीब 60 फीसद जंगली हाथियों के मौत के मामले (13 मामले) बाघों के हमले में सामने आए और वह भी खासकर कम उम्र के हाथियों पर बाघों ने हमले किए।’

रिपोर्ट के मुताबिक, हाथी और बाघ के बीच संघर्ष का पहला मामला 23 जनवरी 2014 का है। इसमें जिम कॉर्बेट में हाथी और बाघ के बीच संघर्ष के बाद हाथी की मौत हो गई थी। दूसरा मामला 3 अप्रैल को कालागढ़ प्रभाग में हुआ था। इसमें भी हाथी और बाघ के बीच संघर्ष के कारण हाथी की मौत हो गई थी।
अध्ययन के मुताबिक यहां तक कि जब हाथी आपसी लड़ाई में भी मारे जाते हैं तो बाघों को काफी मात्रा में भोजन मिल जाता है। हालांकि बाघों और हाथियों के संघर्ष के बारे में और विस्तार से अध्ययन की जरूरत बताई गई है।

वरिष्ठ आइएफएस अधिकारी और राष्ट्रीय उद्यान के प्रभारी संजीव चतुर्वेदी ने कहा कि, ‘बाघों द्वारा हाथियों के खाने की घटना अद्भुत है। इसका एक कारण यह हो सकता है कि सांभर और चीतल जैसे प्रजातियों के शिकार की तुलना में हाथी के शिकार में बाघों को कम ऊर्जा और प्रयास की जरूरत पड़ती है। हाथी को मारने से उन्हें काफी मात्रा में भोजन मिल जाता है।’

अद्भुत पारिस्थितिकी: राष्ट्रीय उद्यान की पारिस्थितिकी भी अद्भुत है क्योंकि यहां 225 बाघ और करीब 1100 जंगली हाथी हैं जबकि रणथम्भौर, कान्हा और बांधवगढ़ जैसे दूसरे राष्ट्रीय उद्यानों में मुख्यत: बाघ हैं।

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