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FIR: 10 साल की बच्ची के गैंग रेप और हत्या का मुख्य आरोपी 8 साल की बच्ची के रेप में काट चुका है 4 साल जेल

लड़की का शव मुख्य संदिग्ध के पिता की चारपाई के नीचे कपड़े से ढंका हुआ मिला।

प्रतीकात्मक तस्वीर

रविवार (18 सितंबर) को उत्तर प्रदेश में 10 साल की बच्ची के संग गैंग रेप और हत्या मामले का मुख्य संदिग्ध पहले भी एक बच्ची के बलात्कार के आरोप में सजा काट चुका है। बच्ची के हाथ और सिर को काटकर अलग कर दिया गया था। मामले के मुख्य अभियुक्त सलीम उर्फ छोटू साल 2012 में एक आठ साल की बच्ची के बलात्कार के जुर्म में चार साल सजा काटकर हार में ही रिहा हुआ था। घटना राज्य के बरेली  जिले की कमेरी तहसील की है। लड़की का शव मुख्य संदिग्ध के पिता की चारपाई के नीचे कपड़े से ढंका हुआ मिला। पुलिस ने संदिग्ध के पिता और माता को गिरफ्तार कर लिया है। एक अन्य आरोपी जुनैद फरार है। सभी चारों अभियुक्तों पर पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम एवं भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस के अनुसार कक्षा में दो में पढ़ने वाली बच्ची रविवार शम को नोटबुक खरीदने के लिए घर से निकली थी। स्थानी पुलिस थाने के अधिकारी लक्ष्मी शंकर ने बताया, “लड़की की मां ने बताया कि उसने सलीम, उसके पिता और जुनैद को लड़की के शरीर के अंग एक प्लास्टिक बैग में डालते हुए देखा।” घटना की खबर फैलते ही आरोपी के घर पर भीड़ जुट गई। आरोपी के पिता लड़की का शव चारपाई के नीचे रखकर ऊपर बैठा हुआ था। पुलिस के अनुसार आरोपी के पिता ने लोगों से मामले को दबाने के लिए “सौदेबाजी” भी करनी चाही।

उत्तर प्रदेश में बच्चों के संग बढ़ते अपराध

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार साल 2015 में धारा 377 के तहत दर्ज कुल मामलों में 60 फीसदी मामलों में पीड़ित बच्चे थे। एनसीआरबी के अनुसार साल 2015 में इसके तहत पूरे देश में कुल 1347 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 814 मामलों में पीड़ित बच्चे थे। पिछले साल ऐसे धारा 377 के तहत सबसे अधिक 239 मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए थे। वहीं महाराष्ट्र (159), केरल (159), हरियाणा (111) और पंजाब (81) मामले दर्ज किए गए। 377 के तहत दर्ज मामलों में पीड़ितों के नाबालिग होने के मामले भी कमोबेश यही राज्य आगे रहे। साल 2015 में धारा 377 के तहत उत्तर प्रदेश (179), केरल (142), महाराष्ट्र (116) और हरियाणा (63) मामलों में पीड़ित बच्चे थे। इन सभी राज्यों में धारा 377 के पीड़ित बच्चों का औसत राष्ट्रीय औसत (60) से अधिक रहा। यूपी में धारा 377 के तहत दर्ज मामलों में 75 फीसदी पीड़ित बच्चे थे तो केरल में 90 फीसदी पीड़ित बच्चे थे।

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