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बिहार: इस गांव में टॉयलेट है अपशकुन का प्रतीक, अंधविश्वास की वजह से स्वच्छ भारत अभियान का हुआ बेड़ा गर्क

2015 में मुद्रिका सिंह नाम के युवक ने सामुदायिक शौचालय का इस्तेमाल किया तो एक दिन के अंदर ही उसकी मौत हो गयी।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (File Photo)

अंधविश्वास के कई रुप होते हैं, कई लोग बिल्ली का रास्ता काटना अपशकुन मानते हैं तो कई लोग छींक को। लेकिन लोग शौचालय को अपशकुन मानते हों ऐसा आपने कम ही सुना होगा। लेकिन बिहार के एक गांव में ऐसा ही देखने को मिल रहा है। यहां अपशकुन की वजह से लोगों ने शौचालय बनवाना बंद कर दिया है। गांव में जो कुछ शौचालय मौजूद हैं भी वो अब जर्जर हालत में है और लोग उसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। ये कहानी है बिहार के नवादा जिले के गाजीपुर गांव की। 2000 की आबादी वाले इस गांव में अच्छी खासी हैसियत वाले लोग रहते हैं, लेकिन अंधविश्वास है कि उस पर किसी का कंट्रोल नहीं। इस अंधविश्वास की जड़ें लगभग 30 साल पुरानी है, जब 1984 में सिद्धेश्वर सिंह नाम के एक समृद्ध किसान ने समझदारी का परिचय देते हुए अपने घर में शौचालय बनवाना शुरू किया था लेकिन उसी दौरान एक रहस्यमय बीमारी से उनके बेटे की मौत हो गई। इस अंधविश्वास को तब और बल मिला जब 1996 में रामप्रवेश शर्मा के टॉयलेट निर्माण के दौरान उनके बेटे की मौत हो गई।

अंग्रेजी वेबसाइट हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना के बाद से गांव वालों में खौफ भर गया और उन्होंने बाथरुम बनाने से ही तौबा कर लिया। स्वच्छ भारत अभियान और शौच मुक्त गांव के केन्द्र के नारे के बावजूद इस गांव में लोग इस कैम्पेन को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। गाजीपुर के निवासी उदय कुमार कहते हैं कि जिंदगी पहले है, शौचालय तो बाद में भी बन सकता है। इस गांव में बाद में कई ऐसी घटनाएं हुई कि लोग और भी डरने लगे। गांव वालों के मुताबिक 2009 में अरविंद नाम के युवक ने लोगों को शौचालय का निर्माण करवाने के लिए प्रेरित किया, लेकिन एक दुर्घटना में उसकी टांग टूट गयी। कुछ लोग समय समय पर इस अंधविश्वास को चुनौती देते रहे। गांव वालों का दावा है कि 2015 में मुद्रिका सिंह नाम के युवक ने सामुदायिक शौचालय का इस्तेमाल किया तो एक दिन के अंदर ही उसकी मौत हो गयी। इसी हफ़्ते प्रखंड के बीडीओ ने जब लोगों को स्वच्छता के बारे में जागरुक करने के लिए गाजीपुर गांव का दौरा किया तो उनके साथ भी एक हादसा हो गया।

अब इस गांव में लोग अपनी बेटियों की शादी करना नहीं चाहते हैं। गांव वालों का कहना है कि आस-पास के गांव में ये बात फैल चुकी है, और हम हमारे यहां रिश्ते नहीं आ रहे हैं। हालांकि इस अंधविश्वास को दूर करने के लिए जिले के डीएम ने पहल की है। नवादा के डीएम मनोज कुमार ने कहा है कि वे इस चुनौती को स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि वे खुद गाजीपुर जाएंगे और लोगों को शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित करेंगे, उन्होंने कहा कि प्रशासन भी इस काम में मदद करेगा।

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