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पश्चिम बंगाल: एक बैंक, जो बना यौनकर्मियों का आधार

बैंक की खासियत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आधार, पैनकार्ड या मतदाता पहचान पत्र की जेरोक्स और अपनी दो फोटो (रंगीन) के अलावा मात्र दस रुपए में कोई भी यौनकर्मी इस बैंक में खाता खुलवा सकती है और अपनी जरूरत के मुताबिक चेक बुक भी ले सकती है।

Author October 10, 2018 2:52 AM
बैंक के कर्मचारी रोजाना उनके पास जाकर राशि संग्रह करते हैं।

शंकर जालान

देशभर में सरकारी और गैरसरकारी तौर पर सैकड़ों बैंक हैं, लेकिन महानगर कोलकाता के उत्तरी इलाके में स्थित रेडलाइट यानी सोनागाछी के निकट नीलमणि मित्र स्ट्रीट में उषा मल्टीपरपज को-आॅपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड से संचालित उषा समवाय बैंक नामक एक ऐसा गैरसरकारी बैंक है, जिसे सही मायने में यौनकमिर्यों का आधार कहा जा सकता है। इस बैंक की शुरुआत 1995 में केवल इस मकसद से की गई थी कि इलाके की यौनकमिर्यों का पैसा सुरक्षित रहे और जरूरत पड़ने पर वे बैंक से ऋण भी ले सकें। शुरुआती दिनों से बैंक से जुड़े और उक्त संस्थान के मुख्य सलाहकार समरजित जाना ने जनसत्ता को बताया कि बैंक की स्थापना के दौरान उन लोगों को नाना प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन वर्ष 1995 में वाममोर्चा सरकार के एक मंत्री के सहयोग से विधानसभा में विशेष विधेयक पारित हुआ और इसके बाद बैंक का श्रीगणेश हुआ।

जाना के मुताबिक पहले दिन 13 यौनकमिर्यों ने बचत खाते खुलवाए। प्रारंभिक पांच साल परेशानियों से भरे रहे, क्योंकि इलाके में घूम-घूम के यौनकमिर्यों को अत्यधिक ब्याज पर कर्ज देने वालों को बैंक का खुलना रास नहीं आ रहा था। उनलोगों की तरफ से धमकियां मिल रही थीं, लेकिन कोलकाता पुलिस के तत्कालीन आयुक्त के हस्तक्षेप से मामला सुलझा।
वे बताते हैं कि आज इस बैंक के 30 हजार से ज्यादा ग्राहक हैं और बैंक प्रतिवर्ष हजारों यौनकमिर्यों को न्यूनतम ब्याज दर पर कर्ज मुहैया कराता है। जाना ने कहा कि बैंक में कुल 25 कर्मचारी हैं, जिनमें से 10 बैंक परिसर में काम करते हैं और शेष 15 घर-घर जाकर राशि एकत्रित करते हैं। शांत स्वभाव के ये सभी कमर्चारी यहां की यौनकर्मियों को केवल बैंक का एक ग्राहक ही नहीं, अपितु पारिवारिक सदस्य समझते हैं।

बैंक की खासियत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आधार, पैनकार्ड या मतदाता पहचान पत्र की जेरोक्स और अपनी दो फोटो (रंगीन) के अलावा मात्र दस रुपए में कोई भी यौनकर्मी इस बैंक में खाता खुलवा सकती है और अपनी जरूरत के मुताबिक चेक बुक भी ले सकती है। उन्होंने कहा कि यौनकर्मियों को राशि जमा करने के लिए बैंक आने जरूरत नहीं पड़ती। बैंक के कर्मचारी रोजाना उनके पास जाकर राशि संग्रह करते हैं। रोजाना दस रुपए या उससे अधिक की राशि जमा की जा सकती है। ऐसे में छोटी-छोटी राशि जमाकर यौनकर्मी अपनी जरूरतों के साथ ही बच्चों की शिक्षा या फिर अन्य कार्य के लिए इस्तेमाल करती हंै। बैंक उनकी मुसीबतों में कर्ज देकर उनका साथ देता है। उन्हें सूदखोर (काबलीवाला) के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

कहना गलत नहीं होगा कि शारदा चिटफंड और रोजवैली मामले उजागर होने के बाद जहां लोगों का निजी (बचत) कंपनियों पर से भरोसा व विश्वास करीब-करीब खत्म हो गया था। वहीं यौनकमिर्यों के लिए, यौनकमिर्यों की ओर से संचालित उषा मल्टीपरपज को-आॅपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के बैनर वाला उषा समवाय बैंक आज भी है, जिस पर न केवल यौनकमिर्यों को विश्वास है, बल्कि यह बैंक यौनकर्मियों का आधार भी है। जाना कहते हैं कि यौनकर्मियों को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में जोड़ने वाला यह बैंक हर कार्य दिवस के सुबह दस से शाम छह बजे तक ग्राहकों की सेवार्थ खुला रहता है। भारतीय रिजर्व बैंक के सभी नियम-कानून को मानने वाले उषा समवाय बैंक का सालाना लेन-देन (कारोबार) 25 करोड़ का है।

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