दिल्ली की आधा दर्जन से अधिक मंडियों में फल-सब्जी और खाद्यान्न के उठान में लगे कामगारों को उनका उचित हक 46 साल बाद भी आढ़ती नहीं देना चाहते हैं। यही वजह है कि हजारों की संख्या में मंडियों में काम करने वाले कामगारों में से मात्र 11 कामगारों का विवरण ही अभी तक आढ़तियों द्वारा भेजा गया है। जबकि कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) द्वारा दो बार कामगारों के पंजीकरण को लेकर आढ़तियों को आदेश जारी किए हैं।

एपीएमसी के उप-कुल सचिव द्वारा जारी किए गए दो आदेश, जिनमें से पहला आदेश छह अप्रैल 2026 को व दूसरा आदेश 19 अगस्त 2026 को जारी किया गया था। जिसमें एपीएमसी ने सभी लाइसेंसधारी आढ़तियों को अपने यहां काम करने वाले कामगारों और सहायकों का विस्तृत ब्यौरा देने का आदेश दिया था।

इस आदेश के बाद दिल्ली के कामगारों के अंदर उत्साह था क्योंकि यह आदेश आजादपुर कृषि उपज विपणन समिति उपनियम, 1980 के पैरा-32 और विभिन्न श्रेणी के लाइसेंस के आवेदन पत्र के पैरा-6 के तहत 46 साल बाद जारी किया गया था। यदि सभी आढ़ती अपने यहां काम करने वाले कामगारों व सहायकों का पूरा विवरण देते हैं तो उन्हें दुर्घटना या मौत होने पर मुआवजे के दावे में दिक्कत नहीं आएगी, साथ ही स्वास्थ्य लाभ व उचित मेहनताने का रास्ता भी खुल जाएगा।

इस बाबत जब एपीएमसी प्रशासन से बात की तो उन्होंने कहा कि दो बार आदेश जारी करने के बाद भी सिर्फ 11 कामगारों की जानकारी ही अभी तक आढ़तियों द्वारा मुहैया करवाई गई है। आजादपुर मंडी फ्रूट एंड वेजिटेबल वर्क्स यूनियन के उपाध्यक्ष हरवीर सिंह ने बताया कि हमारी बड़ी मेहनत के बाद एपीएमसी ने इस आदेश को जारी किया है। वर्ष 2019 से हम इसे लेकर संघर्ष कर रहे हैं, 46 साल बाद एपीएमसी ने कामगारों का विवरण मांगा तो अब आढ़ती आनाकानी कर रहे हैं। यह दुखद है कि हजारों कामगार मंडी में काम कर रहे हैं और सिर्फ 11 का विवरण ही अभी तक भेजा गया है।

पंजीकरण हो जाता तो हमें भी मिलती पहचान : हरि यादव

आजादपुर के सी ब्लाक में काम करने वाले कामगार हरि यादव ने बताया कि वो करीब बीस साल से अधिक समय से मंडी में काम कर रहे हैं। यदि उनका पंजीकरण हो जाता तो उन्हें मंडी में पहचान मिल जाती और श्रमिक सुविधाओं का लाभ मिलता। उचित मेहनताना मिलने से परिवार का जीवनयापन थोड़ा आसान हो जाता।

पंजीकरण हो जाता, तो मिलते कई लाभ : अविनाश कुमार

वहीं मंडी के एक कामगार अविनाश कुमार ने कहा कि वो तकरीबन दस साल से अधिक समय से मंडी में उठान का काम कर रहे हैं, यदि उनका पंजीकरण हो जाता तो उन्हें कई तरह के लाभ मिलते। उन्होंने कहा कि एपीएमसी को चाहिए कि वो आढ़तियों पर थोड़ा दबाव बनाए ताकि वह अपने यहां काम करने वाले कामगारों का विवरण भेजे ताकि गरीबों के बच्चे भी अच्छी सुख सुविधा व शिक्षा प्राप्त कर सकें।

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एशिया की सबसे बड़ी फल और सब्जी मंडी आजादपुर, जो हर दिन लाखों श्रमिकों और व्यापारियों की गतिविधियों का केंद्र बनती है, आज भी पुराने श्रम कानूनों और उपनियमों के तहत चल रही है। जबकि मंडी उपनियम 1980 के तहत श्रमिकों के हितों की रक्षा और उन्हें उचित मेहनताना दिलवाने के लिए कानूनी प्रावधान किए गए थे, लेकिन आज तक इन कानूनों की समीक्षा और अद्यतन नहीं किया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक