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रिजर्व बैंक ने पूरी कर ली गिनती, 99.3% बैंकों के पास लौट आए बंद नोट

आरबीआइ ने बताया है कि 2017-18 में 5,22,783 नोट, 2016-17 में 7,62,072 नोट और 2015-16 में 6,32,926 नोट पकड़ में आए थे। जाली नोटों का धंधा जारी है। जो जाली नोट पकड़ में आ रहे हैं, उनमें 100 और 50 रुपए मूल्य के नोट भी शामिल हैं।

रिजर्व बैंक । (image source-ANI)

नोटबंदी के बाद बंद की गई पांच सौ और एक हजार रुपए के नोटों के मूल्य की 99.3 फीसद रकम बैंकों के पास वापस आ गई। भारतीय रिजर्व बैंक ने 21 महीने लगाकर बैंकों में वापस लौटे नोटों की गिनती पूरी कर अपनी 2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। आंकड़ों के हवाले से रिजर्व बैंक ने मान लिया है कि कालाधन को खत्म करने का अभियान बताकर कराई गई नोटबंदी के बाद सिर्फ 0.7 फीसद रकम वापस नहीं लौटी। रिजर्व बैंक की इस रिपोर्ट को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष ने पूछा कि क्या देश में सिर्फ इतना ही कालाधन था, या फिर कालाधन रखने वालों ने सांठगांठ कर अपने धन को सफेद कर लिया?

रिजर्व बैंक ने माना कि नोटबंदी से न तो नकली नोट पकड़े गए और न ही डिजिटल लेन-देन बढ़ा। रिजर्व बैंक ने कहा है कि 8 नवंबर 2016 को जितनी नकदी चलन में थी, उससे ज्यादा नकदी अब चलन में है। साथ ही, नोटबंदी में बंद किए गए 99.3 फीसद नकदी रिजर्व बैंक के पास वापस आ गई। नोटबंदी के समय मूल्य के हिसाब से 500 और 1000 रुपए के 15.41 लाख करोड़ रुपए के नोट चलन में थे। इनमें से 15.31 लाख करोड़ रुपए के नोट बैंकों के पास वापस आ चुके हैं। अमान्य किए गए नोटों में सिर्फ 10,720 करोड़ रुपए ही बैंकों के पास वापस नहीं लौटे हैं। शीर्ष बैंक के मुताबिक, मार्च 2018 तक 18.03 लाख करोड़ रुपए चलन में आ चुके हैं। बीते एक साल के दौरान इस करंसी में 37.7 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। आरबीआइ ने कहा है कि मार्च 2017 तक जितनी करंसी चलन में थी, उसमें 72.7 फीसद 500 और 2000 के नोट में थी। लेकिन मार्च 2018 तक यह 80.2 फीसद हो गई।

नोटबंदी करने के समय कहा गया था कि कालाधन पर लगाम, जाली नोटों पर अंकुश, डिजिटल लेनदेन, नकदी रहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिए जाने और आतंकवाद पर काबू के लिए ऐसा किया जा रहा है। रिजर्व बैंक ने जाली नोटों के आंकड़े जारी किए हैं। आरबीआइ ने बताया है कि 2017-18 में 5,22,783 नोट, 2016-17 में 7,62,072 नोट और 2015-16 में 6,32,926 नोट पकड़ में आए थे। जाली नोटों का धंधा जारी है। जो जाली नोट पकड़ में आ रहे हैं, उनमें 100 और 50 रुपए मूल्य के नोट भी शामिल हैं और इनमें क्रमश: 35 फीसद और 154.3 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही नई सीरीज के 500 और 2000 के जाली नोट भी सामने आए हैं। नोटबंदी के बाद 2016-17 में रिजर्व बैंक ने 500 और 2,000 रुपए के नए नोट और अन्य मूल्य के नोटों की छपाई पर 7,965 करोड़ रुपए खर्च किए, जो इससे पिछले साल खर्च की गई 3,421 करोड़ रुपए की राशि के दोगुने से भी अधिक है। 2017-18 (जुलाई 2017 से जून 2018) के दौरान केंद्रीय बैंक ने नोटों की छपाई पर 4,912 करोड़ रुपए और खर्च किए।

आर्थिक सुधार की नीतियों से लाभ का दावा
आरबीआइ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) के लिए भारत पसंदीदा देश बन गया है। उत्पादन में तेजी आ रही है। सेवा और कृषि विकास से फायदा हुआ है। कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी के आसार हैं। सुधारों से देश में कारोबार आसान हुआ है।

50 रुपए के नकली नोट 154 फीसद बढ़े
आरबीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक 50 रुपए के नकली नोटों में 154% इजाफा हुआ है। 2017-18 में पकड़े गए 100 रुपए के नकली नोट 35% बढ़े हैं। 500 रुपए के 9,892 नकली नोट पकड़ में आए। 2,000 के नकली नोटों की संख्या 17,929 रही।

60 देशों की जीडीपी के बराबर रकम चलन से बाहर हुई थी
आठ नवंबर 2016 को रात 12 बजे से 1000 और 500 के नोट चलन से बाहर कर दिए गए थे। महज चार घंटे में 86 फीसद करंसी यानी 15.41 लाख करोड़ रुपए के नोट चलन से बाहर हो गए थे। यह रकम उस वक्त 60 छोटे देशों के सकल घरेलू उत्पाद के बराबर थी।

18-19 में और बढ़ेगा एनपीए : रिजर्व बैंक
भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंकों को अभी गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) की समस्या से निजात नहीं मिलने वाली। मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष में बैंकों का डूबा कर्ज और बढ़ेगा। वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च, 2018 के अंत तक कुल गैर-निष्पादित आस्तियां और पुनर्गठित कर्ज कुल कर्ज के 12.1% पर पहुंच गई हैं।

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