पश्चिम बंगाल में अब चुनाव प्रचार थम चुका है। राज्य में दूसरे और आखिरी चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होना है और इससे पहले 23 अप्रैल को 152 सीटों के लिए पहले चरण में मतदान हो चुका है। चार मई को नतीजे आएंगे।

इस बार के चुनाव में जहां ममता बनर्जी चौथी बार सत्ता में बने रहने के लिए पूरी कोशिश कर रही हैं, वहीं पिछली बार सत्ता से दूर रही भाजपा इस बार पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। लेकिन कोलकाता, 24 परगना और हावड़ा की 91 सीटें बंगाल की सत्ता का फैसला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन क्षेत्रों में पिछले चुनाव में ममता बनर्जी को अच्छी सफलता मिली थी।

सत्ता का फैसला दक्षिणी बंगाल के मैदानी इलाकों से होता है

बंगाल के चुनावी परिदृश्य में उत्तरी बंगाल की पहाड़ियों या जंगलमहल के वनक्षेत्र की सरकार बनाने में भूमिका बहुत कम होती है। यहां आमतौर पर सत्ता का फैसला दक्षिणी बंगाल के घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों से होता है। उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिले इस चुनावी जंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह दोनों जिले कोलकाता और हावड़ा के साथ तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ है, जबकि भाजपा के लिए यह सत्ता हासिल करने का महत्त्वपूर्ण रास्ता है

भाजपा सत्तारूढ़ पार्टी के दक्षिणी गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है, जिसके साथ दो सबसे बड़े जिले – 33 सीट वाला उत्तर 24 परगना और 31 सीट वाला दक्षिण 24 परगना – एक बार फिर बंगाल के चुनाव जीतने की कुंजी साबित होंगे। कोलकाता की 11 सीट और हावड़ा की 16 सीट के साथ, ये चार जिले बंगाल विधानसभा की 294 सीट में से 91 सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं – जो सदन का लगभग एक तिहाई हिस्सा होने के कारण 2026 के चुनावों में सबसे निर्णायक क्षेत्र बन जाते हैं।

उत्तर और दक्षिण 24 परगना बने मुकाबले के केंद्र

उत्तर और दक्षिण 24 परगना उस मुकाबले का केंद्र बने हुए हैं – जिसे बंगाल के राजनेता अक्सर ‘बंगाल के उत्तर प्रदेश का चुनावी नक्शा’ कहते हैं। यह वह क्षेत्र है जो राज्य सचिवालय नबान्न में सत्ता बना या बिगाड़ सकता है। प्रेसिडेंसी प्रभाग में कोलकाता, हावड़ा, नादिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना शामिल हैं तथा यहां 111 सीट हैं, जो तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ बना हुआ है।

पिछले चुनाव में क्या रहा नतीजा?

बंगाल में 2021 के विसभा चुनावों के दौरान भाजपा के मजबूत प्रयासों के बावजूद तृणमूल कांग्रेस ने इन 111 में से 96 सीटें जीतीं, भाजपा को केवल 14 और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आइएसएफ) को एक सीट ही मिल पाई। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में अपनी पकड़ मजबूत की और यहां की 21 सीट पर बढ़त हासिल की, जबकि तृणमूल कांग्रेस 90 सीट में आगे रही।

तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी गणित बिल्कुल स्पष्ट है। वह अगर इस स्थिति को बरकरार रखती है तो उसका लगातार चौथी बार सत्ता का रास्ता खुला रहेगा। तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा, ‘अगर हम उत्तर और दक्षिण 24 परगना, कोलकाता और हावड़ा को अपने पास बनाए रखते हैं, तो बंगाल हमारे पास रहेगा। ये सिर्फ सीट नहीं हैं, ये ममता की राजनीति का सामाजिक आधार हैं।’ वहीं, भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘उत्तर 24 परगना, कोलकाता और हावड़ा में पैठ बनाए बिना हमारे लिए सत्ता तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। मतुआ और शरणार्थी वोट के कारण उत्तर 24 परगना ही हमारे लिए सत्ता का प्रवेश द्वार है।’

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बंगाल और तमिलनाडु चुनाव में बीजेपी की ‘कोरोमंडल योजना’ के तहत आक्रामक घेराबंदी जारी है। ‘आप’ के 7 सांसदों के दलबदल से बीजेपी ने विपक्ष को मनोवैज्ञानिक मात दी है। बंगाल में आलू किसानों का संकट और SIR मुद्दा बना है, जबकि तमिलनाडु में भारी मतदान ने राजनीतिक समीकरणों को बेहद दिलचस्प बना दिया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें