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भागलपुर मेडिकल कालेज के 87 डाक्टरों से कैफियत पूछी गई, डाक्टरों ने कहा प्रताड़ना का दौर शुरू

जवाहरलाल नेहरू भागलपुर मेडिकल कालेज के स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे 87 डाक्टरों से कैफियत पूछी गई है। इन पीजी डाक्टरों पर अस्पताल अधीक्षक के साथ बदसलूकी का भी आरोप है।

फाइल फोटो

जवाहरलाल नेहरू भागलपुर मेडिकल कालेज के स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे 87 डाक्टरों से कैफियत पूछी गई है। इन पर आरोप है कि ये बगैर सूचना के अपनी ड्यूटी से गायब रहे। प्राचार्य डा. हेमंत कुमार सिंहा कहते है कि अस्पताल के अधीक्षक के पत्र के आलोक में इनसे जबाव तलब किया गया है। जिसे पीजी डाक्टर अब प्रताड़ना का दौर जारी होना बता रहे है।

अधीक्षक डा.आरसी मंडल ने तीन मई को पत्र लिख सूचना दी है कि ये 23 अप्रैल से ही बिना किसी सूचना के अस्पताल से नदारत है। जिस वजह से कोरोना वार्ड और अस्पताल के दूसरे काम बाधित है। इन पीजी डाक्टरों पर अस्पताल अधीक्षक के साथ बदसलूकी का भी आरोप है। अधीक्षक के पत्र के मद्देनजर कालेज के परिषद की बैठक बुलाई गई। जिसमें विचारोपरान्त पाया गया कि इनकी गैरहाजिरी से कोरोना और दूसरे वार्ड में दिक्कतें आई है।

प्राचार्य कहते है कि इनके जबाव से परिषद संतुष्ट न हुआ तो आपदा प्रबंधन कानून 2005 और महामारी कानून 1887 की दफाओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। बहरहाल इन सभी को ड्यूटी से अलग रखा गया है। कोरोना से लेकर आपातकालीन वार्ड के मरीजों का इलाज वरीय डाक्टर ही संभाल रहे है।

दरअसल इन पीजी डाक्टरों पर कार्रवाई की तलवार 22 अप्रैल को ही लटक गई थी। जब इनका एक साथी डाक्टर कोरोना मरीजों का इलाज करने के दौरान संक्रमित हो गया था। और उसी दिन देर शाम अधीक्षक के आवास पर अपनी दिक्कतों को लेकर पहुंचे थे। नाम न छापने की शर्त पर पीजी डाक्टरों का समूह कहता है कि अधीक्षक से एन-95 मास्क और पीपीई किट कोरोना वार्ड और इमरजेंसी वार्ड में काम करने वाले डाक्टरों के लिए मुहैया कराने की मांग की। अधीक्षक ने मांगों पर गौर करने के बजाए दंगा निरोधक दस्ता और पुलिस बुलावा लिया। एक डाक्टर के संक्रमित होने के बाद उनसे छात्रावास को सेनेटाइज कराने को भी कहा गया।

इधर संक्रमित डाक्टर तो स्वस्थ हो गया। मगर 22 तारीख के वाकए की खबर स्थानीय व राष्ट्रीय अखबार में छपी। एक टीवी चैनल के प्राइम टाइम का यह चर्चा का प्रमुख अंश बना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी दखल दी। इसके बाद तमाम डाक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों के नमूने लिए गए। बाद में जांच में सब की रिपोर्ट नकारात्मक आई। इस बीच नमूना देने के बाद ये डाक्टर अपने को पृथकवास कर लिया। जिसे अब इन्हें बिना सूचना के गैरहाजिर बताकर कैफियत पूछी जा रही है। पीजी डाक्टर इसे प्रताड़ना के दौर की शुरुआत बता रहे है।

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