बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर क्षेत्र में वर्ष 1992 की एक पुरानी आपराधिक घटना से जुड़ा मामला लगभग 34 साल बाद अपने अंतिम न्यायिक निष्कर्ष पर पहुंचा, जिसमें 85 वर्षीय एक बुजुर्ग आरोपी को भी सजा सुनाई गई है।
यह मामला जुड़ावनपुर थाना क्षेत्र के राघोपुर गांव का है, जहां 10 मई 1992 की सुबह अदालत राय और उनकी पत्नी रामसखी देवी अपने घर के बाहर बैठे हुए थे। आरोप है कि उसी समय कुछ लोगों ने सुनियोजित तरीके से रास्ते पर कांच के टुकड़े बिछाए और इसके बाद दंपति पर हमला किया। विरोध करने पर मारपीट की गई और घटना के दौरान फायरिंग भी की गई, जिसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।
शुरू में घटना में नौ लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज हुई थी
घटना के बाद जुड़ावनपुर थाने में कुल नौ लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने जांच पूरी कर 13 मार्च 1993 को आरोप पत्र दाखिल किया। आगे की कानूनी प्रक्रिया में 31 मई 1993 को अदालत ने संज्ञान लिया और 17 जून 1999 को आरोप तय किए गए।
लंबे चले ट्रायल के दौरान कुल नौ आरोपियों में से चार की मृत्यु हो गई, जबकि पांच के खिलाफ सुनवाई जारी रही। साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने इन्हीं पांचों को दोषी माना।
सजा के चरण में अदालत ने चार दोषियों को दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई, साथ ही आर्म्स एक्ट के तहत अतिरिक्त तीन वर्ष की सजा भी निर्धारित की गई। इसके अलावा प्रत्येक दोषी पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। शेष एक आरोपी दीप राय, जो अब 84–85 वर्ष की आयु के हैं, को तीन वर्ष के कारावास की सजा दी गई।
दीप राय की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत के तौर पर जमानत भी दे दी है। अदालत में सजा सुनाए जाने के दौरान वे अत्यंत वृद्ध अवस्था में लाठी के सहारे पहुंचे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा।
इस लंबे अंतराल ने न्यायिक प्रक्रिया की गति पर भी सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि घटना के आरोपी दशकों तक मुकदमे का सामना करते रहे और कई की मृत्यु भी इस दौरान हो गई। वहीं, अदालत का यह फैसला अब इस 34 साल पुराने मामले में कानूनी रूप से अंतिम चरण माना जा रहा है।
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