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100% आरक्षण ग़लत- झारखंड HC का आदेश; गई 8,423 शिक्षकों की नौकरी, BJP सरकार में हुई थी बहाली

झारखंड सरकार की ‘स्थानीयता एवं रोजगार नीति 2016 राज्य में 14 जुलाई, 2016 को लागू हुई थी। इस नीति के तहत राज्य के 24 जिलों में से 13 जिलों में तृतीय व चतुर्थ संवर्ग के 100 प्रतिशत रोजगार उसी जिले के स्थानीय लोगों के वास्ते दस वर्षों के लिए आरक्षित कर दिए गए थे।

Author रांची | Updated: September 22, 2020 12:25 PM
Jharkhand Teacher Jobs, Jharkhand Jobs, Teacher Jobs, Jharkhand HCCOVID-19 मरीजों की ‘कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग’ के काम में लगाए गए सरकारी शिक्षक। (Express Photo by Gurmeet Singh)

झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार की जिला नियोजन नीति 2016 को निरस्त कर दिया। इसमें स्थानीय लोगों के लिए तृतीय और चतुर्थ संवर्ग के रोजगार में 100 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था। जस्टिस हरीशचंद्र मिश्रा, जस्टिस एस चंद्रशेखर और जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने इस केस में बहस पूरी होने के बाद 21 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

झारखंड सरकार की ‘स्थानीयता एवं रोजगार नीति 2016 राज्य में 14 जुलाई, 2016 को लागू हुई थी। इस नीति के तहत राज्य के 24 जिलों में से 13 जिलों में तृतीय व चतुर्थ संवर्ग के 100 प्रतिशत रोजगार उसी जिले के स्थानीय लोगों के वास्ते दस वर्षों के लिए आरक्षित कर दिए गए थे।

इसी नीति के आधार पर राज्य सरकार ने सभी 24 जिलों में हाईस्कूल के 18,000 अध्यापकों की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया प्रारंभ की थी। इस नीति के चलते 1985 से पहले के राज्य के निवासी ही 13 अनुसूचित जिलों में अपने-अपने जिलों में शिक्षक बनने के लिए आवेदन देने के योग्य थे।

मामले में याचिकाकर्ता सोनी कुमारी और अन्य ने राज्य सरकार की नियोजन नीति और इसके आधार पर शिक्षक नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एस चंद्रशेखर की पीठ ने 15 दिसंबर 2018 को इसे संवैधानिक मामला बताते हुए इसे पूर्ण पीठ के पास भेज दिया था।

कोर्ट के इस आदेश के चलते 18,000 में से लगभग नौ हजार से दस हजार तक शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया रद्द हो गई है। अब वहां नए सिरे से नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ हो सकेगी। कोर्ट ने 11 गैर अनुसूचित जिलों में शिक्षकों की चल रही नियुक्ति प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं किया और उसे वैध माना जिससे इन जिलों में की गयी नियुक्तियां वैध होंगी और वहां चल रही नियुक्ति प्रक्रिया भी वैध होगी।

इसी बीच, अंग्रेजी अखबार ‘TOI’ की एक रिपोर्ट में कहा गया कि कोर्ट के इस आदेश की वजह से ’13 अनुसूचित जिलों’ 8423 ट्रेन्ड ग्रैजुएट शिक्षक की नौकरी चली गई। ये सारी बहाली तब की बीजेपी के शासन में झारखंड पब्लिक सर्विस कमिशन (जेपीएससी) के जरिए हुईं थी।

इससे पहले, केस की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने राज्य की नियोजन नीति को सही ठहराते हुए न्यायालय में कहा था कि झारखंड की कई परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही यह नीति बनाई गई थी।

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