सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट से हटाए गए कई याचिकाताओं को अपीलीय न्यायाधिकरण जाने को कहा। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे लेकिन उनसे विधानसभा चुनावों में ड्यूटी करवाई गई।

यह निर्देश भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने जारी किया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।

ऐसे 65 याचिकाकर्ता के नाम

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ एडवोकेट एमआर शमशाद ने कहा कि जो हो रहा है वह समझ के परे हैं। उन्होंने कहा, “चुनाव कराने वाला आदमी वोट नहीं दे सकता।” साथ ही बताया कि ऐसे 65 याचिकाकर्ता हैं।

एमआर शमशाद ने कहा कि उनके ड्यूटी आदेश में पहले उनके निर्वाचन कार्ड (EPIC) के नंबर लिखे गए, फिर बाद में उन्हें डिलीट कर दिया गया। उन्होंने तर्क दिया कि उनके नाम हटाने से पहले उन्हें कोई कारण बताओ नोटिस भी नहीं दिया गया। यह साफतौर पर मनमानी है।

अपीलीय न्यायाधीकरण जाने को कहा गया

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपीलीय न्यायाधीकरण जाने को कहा। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, हम इस चुनाव की बात समझते हैं, पर वोटर लिस्ट से नाम बाहर रहने का अधिकार इससे कहीं ज्यादा है, हम इसकी जांच करेंगे।

एमआर शमशाद ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने पहले ही पांच अप्रैल को अपीलीय न्यायाधिकरण को अपनी अर्जी दी है लेकिन अभी तक इस पर सुनवाई नहीं हुई।

पहले चरण में मतदान की सराहना की

इसी बीच, पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े एक अन्य मामले की सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य चुनावों के पहले चरण में भारी मतदान की सराहना की और यह भी कहा कि मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा और यहां हिंसा की घटना पहले की अपेक्षा कम हुईं।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, भारत का नागरिक होने के नाते मैं मतदान के प्रतिशत देखकर खुश हूं। इस देश और लोगों को लोकतंत्र प्रक्रिया में शामिल होने की जरूरत है।

चुनाव आयोग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में गुरुवार को 2026 की विधानसभा चुनावों के पहले चरण अब तक की सबसे अधिक वोटिंग दर्ज की गई। यहां 294 सीटों में से 152 सीटों पर 92.88 प्रतिशत मतदान हुए हैं।

सिर्फ 139 अपीलों का निपटारा हुआ

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय ने कहा, “अपीलीय न्यायाधिकरणों ने अब तक सिर्फ 139 अपीलों का ही निपटारा किया है, जबकि हमें और अधिक तेजी से निपटारे की जरूरत है।”

आगे कहा कि गुरुवार को पश्चिम बंगाल में 92 प्रतिशत मतदान एक अच्छी चीज है। पूरे देश से प्रवासी मजदूर वापस आ गए हैं।

कानून व्यवस्था की हुई तारीफ

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, एक और बात गौर करने लायक है कि कोई हिंसा नहीं हुई है, या काफी कम हुई है। हालांकि कल्याण बंदोपाध्याय ने कहा कि हिंसा की कुछ घटनाएं हुई थीं। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा, “एक या दो को छोड़कर तुलनात्मक रूप से पश्चिम बंगाल में यह एक अहिंसक मतदान था।”

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की तारीख की। तुषार मेहता ने कहा, “मैं कल्याण बंदोपाध्याय से सहमत हूं कि 92 प्रतिशत मतदान एक ऐतिहासिक आंकड़ा होना चाहिए और कुछ जगहों पर हुई हिंसा को छोड़कर सुरक्षा बलों ने सराहनीय काम किया, हमें उनका आभारी होना चाहिए।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने एक श्लोक का याद किया, जिसका अर्थ था-“राजा लड़ते हैं और गरीब लोग झेलते हैं तथा मरते हैं।”

सीजेआई ने कहा, जब लोगों को लोकतंत्र में अपनी ताकत का एहसास होता है तो वे मतदान करते हैं और कानूनी प्रक्रिया और मूल्यों का पालन करते हैं तो फिर वे हिंसा या ऐसे कुछ में शामिल नहीं होते क्योंकि वे जानते हैं कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी असली ताकत निहित है।

सीजेआई ने यह भी कहा, यहां-वहां कि छोटी-मोटी घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित नहीं कर सकती। इस बात को मानते हुए तुषार मेहता ने कहा, “वरना पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले और बाद की हिंसा का इतिहास रहा है।”

वोटरों के मन में था डर

एडवोकेट कल्याण बंद्योपाध्याय ने कहा, मतदाताओं के मन में मुख्य डर यह था कि अगर मैंने वोट नहीं डाला तो हो सकता है कि मैं अपना अधिकार खो दूं और यही बात काम कर गई। हालांकि तुषार मेहता ने कहा कि हमें इसके कारणों में जाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, हम इस बात पर न जाएं कि उन्होंने वोट क्यों डाला, उन्होंने वोट बढ़-चढ़कर डाला यही अच्छी बात है।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट डी. नायडू से कहा, “मिस्टर नायडू, इस बार, आपके क्लाइंट की हर कोई तारीफ कर रहा है।” कल्याण बंदोपाध्याय ने इस बात से असहमति जताई और कहा, “पिछले तीन दिनों में, कलकत्ता हाई कोर्ट की अलग-अलग बेंच ने चुनाव आयोग को फटकार लगाई है।” इस पर डी.नायडू और तुषार मेहता दोनों ने ही इस टिप्पणी को “अनुचित” बताया।

इसके बाद तुषार मेहता ने कोर्ट से सुनवाई खत्म करने का आग्रह किया और कहा कि इसे लंबा खींचने से पक्षों का राजनीतिक रूप से भारी-भरकम बयान देने का समय मिल जाएगा।

कोर्ट ने दिया आदेश

अपीलीय न्यायाधिकारणों को मामलों के जल्द निपटारे की गुहार पर कोर्ट ने पक्षों को कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधिकारणों से संपर्क करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “अधिकतर मुद्दों का जवाब 13 अप्रैल के आदेश में दिया जा चुका है हालांकि हम समझते हैं कि रोजाना कुछ मुद्दे आते रहेंगे और उनपर कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या अपीलीय न्यायाधिकरणों को ध्यान देने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में हम याचिकाकर्ताओं या अन्य संबंधित पक्ष को यह छूट देते हैं कि वे किसी भी लंबित मुद्दे के समाधान के लिए प्रशासनिक पक्ष से हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क कर सकते हैं।”

कोर्ट ने कहा, “जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं और जिन्होंने अपील दायर की है, उनके लिए अलग से निर्देश जारी किए जा रहे हैं, जिसमें अपीलीय न्यायाधिकरणों से अनुरोध किया गया है कि वे याचिकाकर्ताओं की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर करें, जो अपनी याचिका में तत्काल सुनवाई की आवश्यकता साबित करने में सफल रहे हैं।”

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