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जीडीए के अधिकारियों की वजह से 65 करोड़ की चपत लगी

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के तत्कालीन अधिकारियों की लापरवाही की वजह से प्राधिकरण को 65 करोड़ रुपए की चपत लगी है।

Author गाजियाबाद | July 14, 2017 12:35 AM

विक्रांत चौधरी
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के तत्कालीन अधिकारियों की लापरवाही की वजह से प्राधिकरण को 65 करोड़ रुपए की चपत लगी है। सीएजी (कैग) टीम द्वारा इस पर आपत्ति लगाने के बाद अब जीडीए के पूर्व अधिकारियों के होश उड़े हुए हैं। यह मामला राष्ट्रीय राजमार्ग-24 विजयनगर बाईपास से मेरठ रोड तिराहे तक निर्मित की गई न्यू लिंकरोड का है। जीडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष से लेकर मुख्य अभियंता और अधिशासी अभियंता समेत कई अधिकारियों को अब तलब किया जा सकता है। दरअसल, केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने छोटे एवं मध्यम शहरों के लिए शहरी ढांचा विकास योजना (यूआइडीएसएसएमटी) के तहत न्यू लिंकरोड का निर्माण कराने के लिए 95 करोड़ की धनराशि वर्ष 2008-2009 में स्वीकृत की गई थीं। केंद्र सरकार ने यह पैसा जीडीए को सीधे न देकर नोडल एजंसी के रूप में नगर निगम को रिलीज किया था। सरकार ने 95 करोड़ की धनराशि में से राजनगर एक्सटेंशन की मेन रोड बाईपास के लिए 9 करोड़ रुपए दिए गए। इस रोड के निर्माण पर उस वक्त करीब 17 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।

बाकी पैसा निगम को ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट के लिए दिया गया। इसमें से 65 करोड़ रुपए स्कीम के तहत केंद्र सरकार ने मेरठ रोड तिराहे से एनएच-24 विजयनगर को जोड़ने वाली न्यू लिंकरोड के लिए स्वीकृत किया था लेकिन यह पैसा जारी नहीं किया गया। इसकी वजह से वर्ष 2010 में लिंकरोड की लागत 110 करोड़ रुपए हो गई। जीडीए द्वारा इसका टेंडर जारी किया गया, लेकिन टेंडर रद्द कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 2012 में प्रोजेक्ट के लिए फिर से टेंडर जारी किया गया। इस रोड का परिवर्तित डीपीआर बनने के बाद इसकी लागत करीब 170 करोड़ तक पहुंच गई। चौंकाने वाली बात यह है कि जीडीए के पूर्व अधिकारियों ने इस लिंकरोड की परिवर्तित अनुमानित राशि तैयार करने के बाद केंद्र सरकार को अवगत कराना उचित नहीं समझा। इसलिए केंद्र सरकार ने पैसा जारी नहीं किया।

जीडीए अफसरों की इसे लापरवाही ही कहा जाएगा कि उन्होंने 65 करोड़ की धनराशि की केंद्र सरकार से मांग नहीं की। रोड के लिए मिलने वाली धनराशि खत्म हो जाने के बाद नगर निगम ने इसे केंद्र सरकार को वापस लौटा दिया। केंद्र सरकार बढ़ी हुई अनुमानित राशि की मंजूरी के बाद ही यह पैसा देगी। केंद्र में वर्ष 2014 में एनडीए की सरकार बनने के बाद इस योजना को ही बंद कर दिया गया। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में जीडीए के अफसरों को जानबूझकर न्यू लिंकरोड के लिए 65 करोड़ नहीं लेने पर प्रश्नचिन्ह लगाया है। वर्ष 2008 के बाद जीडीए ने कभी यूआइडीएसएसएमटी में आवेदन नहीं किया, जो पैसा मंजूर हुआ वह भी केंद्र सरकार की मदद से जारी नहीं करा सके। इसलिए जीडीए अफसरों की वजह से न्यू लिंकरोड प्रोजेक्ट मं 65 करोड़ रुपए की चपत लग गई। सीएजी ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेजी है।

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