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भागलपुर ज़िले में बिजली गिरने से 6 मरे और तीन जख्मी

गुरुवार को भागलपुर और आसपास आई आंधी और तेज बारिश के दौरान बिजली गिरने से ज़िले में 6 जनों की मौत हो गई। जिनमें पांच बच्चे और युवक है।

तेज बारिश के दौरान बिजली गिरने से ज़िले में 6 जनों की मौत हो गई

गुरुवार को भागलपुर और आसपास आई आंधी और तेज बारिश के दौरान बिजली गिरने से ज़िले में 6 जनों की मौत हो गई। जिनमें पांच बच्चे और युवक है। 3 बच्चे जख्मी हुए है। घायलों को कहलगाँव अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती किया गया है। सुचना पाकर कहलगांव के बीडीओ रंजन लाल निगम, सीओ राधा मोहन सिंह और डीएसपी रामानंद कुमार कौशल मौके पर पहुंच राहत काम में जुटे है। मिली जानकारी के मुताबिक दोपहर बाद तेज आंधी और बारिश के बीच बिजली गिरने से कहलगांव के सियागांव की सुलेखा (13 ), संगीता कुमारी ( 7 ), दीपू ( 8 ), आरती ( 8 ) धनोरा गाँव के आलोक यादव ( 25 ) और संहोला के कंझा गोतियानी गांव के एक बच्चे की मौत हो गई। आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की गई है। तीन बच्चे जख्मी है जिनका नाम कविता (16), आरती ( 12 ) और पूजा (14 ) है।

बताते है कि लाशों का पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर लाया जा रहा है। असल में गाँव के बच्चे आम के बगीचे में तेज आंधी में गिरे आम को चुनने गए थे। अचानक झमाझम बारिश शुरू हो गई। और जोर से बिजली कड़क के साथ वहां के बगीचे में गिरी। और बच्चे चपेट में आने से काल के गाल में समा गए। दूसरे धनोरा में भी युवक आम के बगीचे में खड़ा था। और बिजली गिरने से मौत हुई। मृतक आलोक यादव के साथ दुखद बात है कि उसकी शादी इसी महीने की 5 तारीख को हुई थी। यह बचपन से ही ननिहाल में ही रहता था। मृतकों के परिवार वाले अपने बच्चों की मौत की खबर पाकर बुरी तरह बिलाप कर रहे है। वही आलोक के घर तो अजीब सा सन्नाटा पसरा है। ( बिजली गिरने से जख्मी बच्ची जिनका इलाज कहलगांव में चल रहा है।)

वहीं तपती दोपहर में आकाश से राहत की बारिश हुई। भागलपुर समेत बिहार के विभिन्न हिस्सों में करीब आधे घंटे बारिश होने से मौसम खुशनुमा हो गया।बीते एक हफ्ते से सुबह से ही कड़ाकेदार धुप से लोगबाग तबाह है। पारा रोजाना 42 से 45 छू रहा है। ऊपर से बिजली की अनियमित आपूर्ति ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। भागलपुर स्मार्ट सिटी का यही मजा है। घर से दिन में निकलने से लोग परहेज करने लगे है। बारिश से आम लीची में मिठास के साथ फल की साइज भी अपना रूप लेगी। हालांकि 23 तारीख को भी शाम पांच बजे के बाद मौसम करवट लिया था। और धूल भरी आंधी के साथ आधे घंटे की झमाझम बारिश ने तोड़ी राहत दी थी। मगर दूसरे रोज से ही उगते सूरज ने आग उगलना शुरू कर दिया। आज भी हालात बुधवार जैसे ही थे। करीब दो बजे मौसम में नमी हुई और आकाश में उमड़ते घुमड़ते बादल को देखकर लोगों ने ठंडक महसूस की। इसके बाद आधे घँटे की बारिश ने मौसम को ही ठंडा कर दिया।

इधर बिजली की आंखमिचोली ने लोगों को और तबाह कर दिया। रोजाना मेंटेनेंस के नाम पर 5 से आठ घंटे बिजली दिन दोपहर में घोषित कर काटी जा रही है। शाम के बाद अघोषित तौर पर घंटो बिजली गुल। इसका जवाब किसी के पास नहीं। तेज हवा का झोंका आते ही कभी कहां का तो कभी कहां का तार टूट कर सड़क पर लटक जाता है। बस इलाके की बत्ती गुल। बैठे रहिए हाथों में ताड़ या प्लास्टिक के पंखे लिए। शाम है तो अंधेरा छा जाता है। यह रोजाना की भागलपुर स्मार्ट सिटी की दुःख भरी कहानी है। यह ऐसा दर्द है जो भागलपुरिए न बोल पाते है न पचा पाते है।

गुरूवार को भागलपुर का आधे शहर की बिजली सुबह से ही बंद है। और शाम 5 बजे तक बंद की घोषणा है। नतीजतन पानी की किल्लत से लोग जूझ रहे है। प्रचंड गर्मी में भू-जलस्तर 25 से 30 फीट नीचे चला गया है। सड़कों पर लगे सरकारी हैंडपंप बेकाम हो गए है। दिलचस्प बात कि बिहार सरकार राज्य में खराब हैंडपंप की जानकारी लेने के लिए ख़ुफ़िया महकमा को लगाया है। जानकार बताते है कि सीआईडी महकमा के लोग इनदिनों शहर गांव गांव जाकर जानकारी जुटा रहे है। ताकि ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। जांच कराकर जानकारी इकठ्ठा करने का यही मकसद है। दरअसल इन हैंडपंपों को सरकार ने पीएचईडी महकमा के जरिए करोड़ों खर्च कर साल छह महीने पहले ही लगवाए थे। ये हैंडपंप ख़ास किश्म के है। इनको गड़वाने में एक से डेढ़ लाख का खर्च आया है। गर्मी आते आते करीब करीब पंपों ने जवाब दे दिया। यह पूरे सूबे की दर्दनाक दास्ताँ है। खैर जो हो गुरूवार को हुई आधे घँटे की बारिस ने फौरी राहत जरूर दी है। लेकिन बिजली रुला रही है।

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