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प्रेशर हॉर्न और साइलेंसर नियम तोड़ने पर 5000 रुपए जुर्माना

न्यायमूर्ति कुमार और न्यामूर्ति एमएस नांबियार के पीठ ने कहा कि हम निर्देश देते हैं कि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले उल्लंघनकर्ता मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान और जुर्माने के अलावा ‘प्रदूषक चुकाता है’ के सिद्धांत के आधार पर प्रति उल्लंघन पर 5000 रुपए जुर्माना भरने के उत्तरदायी होंगे।

Author नई दिल्ली | July 21, 2016 5:25 AM
ट्रैफिक रूल्स तोड़ते लोगों को रोकता ट्रैफिक पुलिस वाला।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने शहर में ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों पर बुधवार को डंडा चलाया। प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल करने और अपने वाहनों से साइलेंसर हटाने वालों पर 5000 रुपए जुर्माने की घोषणा की। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अगुआई वाले पीठ ने दिल्ली यातायात पुलिस को उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया जो अनुचित एवं असहनीय आवाज करते हैं और उससे ध्वनि प्रदूषण होता है।

न्यायमूर्ति कुमार और न्यामूर्ति एमएस नांबियार के पीठ ने कहा कि हम निर्देश देते हैं कि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले उल्लंघनकर्ता मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान और जुर्माने के अलावा ‘प्रदूषक चुकाता है’ के सिद्धांत के आधार पर प्रति उल्लंघन पर 5000 रुपए जुर्माना भरने के उत्तरदायी होंगे। हरित पैनल ने यातायात पुलिस को भी पर्यावरण क्षतिपूर्ति अन्य खाते में जमा करने को कहा। पीठ ने कहा कि यातायात प्रशासन ऐसे उल्लंघनकर्ताओं के लिए नोटिस जारी कराने के वास्ते एनजीटी पहुंचने के लिए स्वतंत्र हैैं। अधिकरण ने कहा कि प्रेशर हॉर्न का अबाधित उपयोग गंभीर ध्वनि प्रदूषण का एक स्रोत है और उसने राष्ट्रीय राजधानी में सभी वाहनों पर इस संबंध में रोक लगाई।

निगम सड़कें साफ करने के लिए मशीनों का प्रयोग करे : एनजीटी ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न भागों में साफ सफाई रखने को लेकर नगर निगमों को आड़े हाथ लिया और निकायों से ‘सड़कें साफ रखने के लिए मशीनों का प्रयोग’ करने को कहा। एनजीटी प्रमुख न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘निगम सड़कें साफ रखने के लिए मशीनों का प्रयोग क्यों नहीं कर सकतीं? निगम कर्मी कचरा नालों में डालते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो हमें बताएं कि नाले बंद क्यों हैं। ऐसी एक जगह बताइए जो कचरा मुक्त है। हम भी दिल्ली में रहते हैं। इधर उधर मत देखिए। आपके अधिकारी कुछ करना नहीं चाहते। आपको कुछ सोचने के लिए आदेशों की जरूरत क्यों है?’

पीठ ने ये टिप्पणियां पूर्वी दिल्ली नगर निगम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कीं। निगम ने कूड़ा उठाने के लिए ट्रैक्टर खरीदने के लिए एनजीटी की मंजूरी मांगी थी। एनजीटी ने अपने हालिया आदेश में निगमों को केवल बीएस चार वाहन खरीदने की मंजूरी दी थी। हालांकि बाजार में केवल बीएस तीन ट्रैक्टर उपलब्ध हैं। निगम के वकील ने जब कहा कि अधिकांश कालोनियों में कारों के पार्क होने से सड़कें साफ नहीं हो सकती तो अधिकरण ने कहा कि दिन में ट्रैफिक नहीं होता। अभी न्यू फ्रेंड्स कालोनी जाइए और बताइये कि कितनी कारें वहां पार्क की गई हैं। उसने कहा कि सडकों पर कारें लोग खड़ी नहीं कर सकते। यह अधिकरण का आदेश है।

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