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पांच साल में 49 खुदकुशीः काउंसलर्स की कमी और काम के बोझ तले दबे शिक्षकों से जूझ रहे जवाहर नवोदय विद्यालय

16 राज्यों के 56 स्कूलों में 112 शिक्षकों पर हुए एक अध्ययन में सामने आया कि हाउस मास्टरशिप और मेस के प्रबंधन के चलते कई बार शिक्षक खाना भी पढ़ाने के समय में खाना खाते हैं।

जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी), फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

स्कूली बच्चों को अच्छी पढ़ाई और अन्य गतिविधियों की सुविधा देने के मकसद से शुरू हुए जवाहर नवोदय विद्यालय इन दिनों एक बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच सालों में नवोदय विद्यालयों के खुदकुशी करने वाले बच्चों की संख्या 49 तक पहुंच चुकी है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इनमें से 32 मामलों में स्कूल प्राचार्य या शिक्षक अथवा दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, वेतन वृद्धि पर रोक, निलंबन या ट्रांसफर जैसी कार्रवाई हुई है।

खुदकुशी के मामलों में पारिवारिक समस्याओं, प्यार और अपनत्व की कमी, अवसाद, घर की याद आना, पढ़ाई का दबाव, दोस्तों की लड़ाई जैसे कई कारण सामने आए हैं। बहरहाल इस तरह के मामलों में बच्चों के व्यवहार में होने वाले नकरात्मक बदलाव और अवसाद का पता लगाने की जिम्मेदारी प्राचार्य या हाउस मास्टर की होती है।

एक विद्यालय के प्राचार्य ने पहचान छुपाने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘इस तरह से सिर्फ दोष लगाने के लिए किसी को पकड़ा जा सकता है समस्या का हल नहीं ढूंढा जा सकता। अक्सर ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार न होने पर भी प्राचार्य या हाउस मास्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। पहले से प्राचार्यों पर अच्छे परीक्षा परिणाम और शिक्षकों पर पढ़ाई के इतर दूसरे कामों का बोझ बहुत ज्यादा है। ऐसे में हम से यह उम्मीद लगाना कि बच्चों के मन में क्या चल रहा है यह बिलकुल गैरवाजिब है।’

2016 में खुदकुशी करने वालों का आंकड़ा पहली बार दो अंकों में पहुंच गया था। तब जवाहर नवोदय विद्यालय समिति की तरफ से 11 पेज का एक सर्कुलर जारी किया गया था। इसके मुताबिक हाउस मास्टर और असिस्टेंट हाउस मास्टर को नियमित रूप से छात्रों से बातचीत करने और उनके मन में चल रही बातों को जानने, उनकी पारिवारिक स्थिति जानने आदि के निर्देश दिए गए थे। इसके साथ ही समय-समय पर उनकी काउंसिलिंग सेशन भी आयोजित करने की बात कही गई थी।

बहरहाल, नीति आयोग की तरफ से मार्च 2015 में जारी की गई एक रिपोर्ट् के मुताबिक नवोदय विद्यालय पहले ही काम के बोझ और अतिरिक्त तनाव से जूझ रहे हैं। 16 राज्यों के 56 स्कूलों में 112 शिक्षकों पर हुए एक अध्ययन में सामने आया कि हाउस मास्टरशिप और मेस के प्रबंधन के चलते कई बार शिक्षक खाना भी पढ़ाने के समय में खाना खाते हैं। समिति से जुड़े सूत्रों के हवाले से लिखी गई एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 15 सालों में करीब 16 हजार नवोदय शिक्षकों में से महज 200 ने ही क्लीनिकल काउंसिलिंग में पीजी डिप्लोमा किया है। हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय को हर विद्यालय में दो पूर्णकालिक काउंसलर रखने का प्रस्ताव भी भेजा गया था।

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