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Kumbh Mela 2019: 49 दिन में 23 करोड़ लोगों ने संगम में लगाई डुबकी, 3 वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाए

दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक कुंभ मेला प्रयागराज में 4 मार्च को समाप्त हो गया। कुल 49 दिन चले इस मेले में देश-विदेश के करीब 23 करोड़ लोगों ने शिरकत की और संगम में डुबकी लगाई।

Kumbh Mela 2019: प्रयागराज कुंभ मेले का हुआ समापन फोटो सोर्सः kumbh.gov.in

Kumbh Mela 2019: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगा दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक कुंभ मेला 4 मार्च को समाप्त हो गया। यह मेला कुल 49 दिन तक चला और देश-विदेश के करीब 23 करोड़ लोगों ने इस दौरान संगम में डुबकी लगाई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, महाशिवरात्रि के आखिरी स्नान पर सोमवार (4 मार्च) को करीब 1.10 करोड़ लोगों ने त्रिवेणी में स्नान किया। हालांकि, कुंभ में लगे सरकारी संस्थानों के शिविरों को 10 मार्च तक नहीं हटाने का निर्देश दिया गया है।

आज सीएम करेंगे औपचारिक समापन : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार (5 मार्च)  कुंभ मेले में आएंगे और औपचारिक रूप से मेले का समापन करेंगे। बता दें कि कुंभ मेले की शुरुआत 15 जनवरी को हुई थी। इस साल मेले में 10 लाख से भी ज्यादा विदेशी नागरिक शामिल हुए। यूपी सरकार ने इस बार के कुंभ मेले को अब तक का सबसे भव्य कुंभ मेला बताया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुंभ के आयोजन पर लगभग 4300 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

बनाए तीन रिकॉर्डः कुंभ मेले में यात्रियों के लिए 500 से अधिक शटल बसों की व्यवस्था की गई थी। मेले में साफ-सफाई का खास ध्यान रखा गया था। इस बार कुंभ की थीम ‘स्वच्छ कुंभ और सुरक्षित कुंभ’ रखी गई थी। यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह की अगुवाई में 10,000 सफाईकर्मियों ने एकसाथ सफाई करके वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के को-ऑर्डिनेटर ऋषिराज ने बताया कि उनके मानकों के अनुसार 7021 सफाईकर्मी अगर एक जगह सफाई कर दें तो वह रिकॉर्ड होगा। एक साथ कई जगह सफाई का यह पहला मामला है। कुंभ में पांच जगहों पर 10 हजार सफाई कर्मचारियों ने एक साथ पांच स्थानों पर सफाई करके एक नया कीर्तमान स्थापित किया। ऋषिराज ने बताया कि इससे पहले यह रिकॉर्ड बांग्लादेश के नाम था।

यही नहीं प्रयागराज में चल रहे कुंभ मेले में पेंटिग बनाने का भी विश्व रिकॉर्ड बना। कुंभ मेला क्षेत्र के सेक्टर 1 में 10 हजार छात्र-छात्राओं और आम नागरिकों ने मिलकर 8 घंटे तक लगातार काम करते हुए हाथ की छाप की वाल पेंटिंग तैयार की। पेंटिंग की थीम ‘जयगंगे’ थी। इस दौरान गिनीज विश्व बुक रिकॉर्ड के को-ऑर्डिनेटर ऋषिनाथ की टीम ने पूरे कार्यक्रम की मॉनिटरिंग की। बता दें कि इसके पहले साउथ कोरिया के सियोल में 4675 लोगों के नाम एक वाल पेंटिंग बनाने का रिकॉर्ड था। इसके अलावा कुंभ मेले में यात्रियों की निःशुल्क सेवा के लिए लगाई गईं 500 से अधिक शटल बसों ने 28 फरवरी को एक साथ परेड कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। इन शटल बसों ने कुल 12 किमी की दूरी तय की। इससे पहले यह रिकॉर्ड अबु धाबी के नाम थे। जिसमें 390 बसें शामिल थी।

कुंभ की प्रथा की शुरुआतः भारत के 4 शहरों में कुंभ मेले का आयोजन होता है। इनके नाम प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक हैं। इनमें से हर स्थान पर छठे साल पर अर्द्धकुंभ और 12वें साल पर पूर्ण कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। प्रयागराज में अगला कुंभ मेला 2025 में होगा, जो पूर्ण कुंभ होगा।

कुंभ मेले की मान्यताः मान्यता के अनुसार देवता-असुर जब अमृत कलश को एक दूसरे से छीन रहे थे, तब उसकी कुछ बूंदें धरती की तीन नदियों में गिरी थीं। जहां ये बूंदें गिरीं, वहीं पर कुंभ होता है। ये तीन नदियां गंगा, गोदावरी और क्षिप्रा हैं।

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