ताज़ा खबर
 

सेहत : दिल की बीमारी से जान गंवा देती हैं 40 % महिलाएं, हर साल होती है 20 लाख मौतें

डॉक्टरों ने बताया कि ऐसे मरीज की 20-21 साल की उम्र में मौत हो जाती है। शरीर नीला पड़ने लगता है और वे सांस भी नहीं ले पाते हैं। हुमैरा को जीबी पंत में इलाज के लिए दो साल बाद की तारीख मिली। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) की श्रेणी में इलाज के लिए मैक्स अस्पताल गर्इं, लेकिन वहां से भी जवाब दे दिया गया।

Author Published on: March 11, 2018 5:25 AM
प्रतीकात्मक चित्र

‘गरीबी और संतानहीनता के कारण कई तरह की गंभीर बीमारियों की चपेट में आकर मैंने जीने की आस ही छोड़ दी थी। एक अस्पताल से दूसरे के चक्कर लगाकर भी थक गई थी। कहीं बीमारी पकड़ में नहीं आती तो कहीं जांच और इलाज के लिए लंबी तारीख बता दी जाती। बड़े निजी अस्पतालों का खर्च उठाने की हालत नहीं थी, लेकिन कुछ डॉक्टरों की मदद से न केवल मुझे इलाज मिला, बल्कि आज मैं जिंदा हूं और अपने परिवार की देखभाल भी कर रही हूं।’ यह कहानी है 24 साल की हुमैरा की, जो बिहार के औरंगाबाद के एक मुसलिम परिवार से हैं और इलाज के लिए दिल्ली आई थीं। हुमैरा ने बताया कि शादी के कई साल बाद तक बच्चे न होने पर 2011 में वे इलाज के लिए दिल्ली आर्इं। कस्तूरबा गांधी अस्पताल में कुछ फायदा नहीं हुआ तो हेडगेवार अस्पताल गर्इं, जहां जांच में दिल की बीमारी का अंदाजा लगा और वहां से उन्हें जीबी पंत भेज दिया गया। जीबी पंत अस्पताल में जांच के लिए तीन महीने बाद का समय मिला। जांच में पता चला कि दिल में दो छेद हैं और फेफड़े तक खून पहुंचाने की नस संकरी है।

डॉक्टरों ने बताया कि ऐसे मरीज की 20-21 साल की उम्र में मौत हो जाती है। शरीर नीला पड़ने लगता है और वे सांस भी नहीं ले पाते हैं। हुमैरा को जीबी पंत में इलाज के लिए दो साल बाद की तारीख मिली। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) की श्रेणी में इलाज के लिए मैक्स अस्पताल गर्इं, लेकिन वहां से भी जवाब दे दिया गया। इसके बाद उन्हें अखबार के जरिए हार्ट केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ केके अग्रवाल की ओर से दी जाने वाली आर्थिक मदद की जानकारी मिली। इसके बाद मेदांता अस्पताल में हुमैरा का जटिल आॅपरेशन किया गया और वह सेहतमंद हो गर्इं। नेपाल की से आर्इं बुजुर्ग महिला काली (66) को इन्फीरियर वॉल्व हार्ट अटैक आया था। उनके हृदय में रक्त की आपूर्ति करने वाली दो धमनियों में अवरोध था। उनके इलाज के लिए कोरोनरी आर्टरी बाईपास पंप सर्जरी की गई। इसके बाद उन्हें एक पेसमेकर लगाया गया और अब वे ठीक हैं।

मथुरा की 22 साल की माधवी को बचपन से सांस न आने और बेहोश होने की शिकायत थी, जिसका इस अभियान के तहत इलाज किया गया। माधवी के अलावा कई गरीब लड़कियों को हार्ट केयर फाउंडेशन से जुड़े समीर मलिक कोष से मदद देकर उनकी जान बचाई जा सकी है। देश में पिछले दो दशकों में महिलाओं में दिल का दौरा पड़ने के मामले बढ़े हैं, खासकर प्रजनन के उम्र वाली महिलाओं में। अनुमान है कि देश में हर साल होने वाली एक करोड़ मौतों में से करीब 20 लाख मौतें संचार प्रणाली संबंधी बीमारियों के कारण होती हैं और इनमें 40 फीसद महिलाएं हृदय रोगों के कारण जान गंवा देती हैं। डॉ केके अग्रवाल ने कहा कि किसी भी महिला की हृदय रोग से सिर्फ इसलिए मौत नहीं होनी चाहिए क्योंकि वह इलाज का खर्च नहीं उठा सकती। इस तथ्य के बारे में जागरूकता पैदा करने की जरूरत है कि महिलाओं में भी हृदय रोग की पूरी संभावना रहती है। समीर मलिक फाउंडेशन में हम मानते हैं कि हृदय रोग चाहे जिस प्रकृति का हो, प्रत्येक व्यक्ति को समय पर इलाज मिलना चाहिए।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 द सस्पेंडेड थ्रेड : समय के पार का एक जादुई तिलिस्म
2 फ्रांस के साथ रक्षा, परमाणु ऊर्जा और सुरक्षा सहित 14 समझौतों पर दस्तखत
3 संघर्ष व विरोध प्रदर्शन की राजनीति अब पहले जितनी प्रासंगिक नहीं : मोदी