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देश में 35 फीसद मुख्यमंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज

एडीआर के मुताबिक गंभीर अपराधिक मामलों में हत्या, हत्या का प्रयास, आपराधिक धमकी, छल करने जैसे अपराध के मामले शामिल हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने खिलाफ कुल 10 मामले घोषित किए हैं जिनमें तीन गंभीर किस्म के हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल देश के उन शीर्ष तीन मुख्यमंत्रियों में से हैं जिन्होंने चुनाव आयोग में दिए शपथपत्र में अपने खिलाफ सबसे ज्यादा आपराधिक मामले घोषित किए हैं। नेशनल इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की ओर से जारी एक ताजा रिपोर्ट में यह उजागर हुआ है, जिसके मुताबिक घोषित आपराधिक मामलों में अरविंद केजरीवाल तीसरे स्थान पर हैं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस शीर्ष पर और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन दूसरे स्थान पर हैं। कुल घोषित संपत्ति के मामले में अरविंद केजरीवाल 19वें स्थान पर हैं और देश के 81 फीसद यानि 25 करोड़पति मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं, जबकि आंध्र प्रदेश के चंद्रबाबू नायडु पहले व अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडु दूसरे स्थान पर हैं।

इलेक्शन वॉच और एडीआर द्वारा देश के विभिन्न राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के 31 मुख्यमंत्रियों के नवीनतम शपथपत्रों का विश्लेषण कर सोमवार को जो रिपोर्ट जारी की गई है, उसके मुताबिक 11 मुख्यमंत्रियों यानि 35 फीसद ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किए हैं और 8 मुख्यमंत्रियों यानि 26 फीसद ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। एडीआर के मुताबिक गंभीर अपराधिक मामलों में हत्या, हत्या का प्रयास, आपराधिक धमकी, छल करने जैसे अपराध के मामले शामिल हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने खिलाफ कुल 10 मामले घोषित किए हैं जिनमें तीन गंभीर किस्म के हैं। केजरीवाल के खिलाफ जो मामले दर्ज हैं वो भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) के सेक्शन 332, 188, 149, 186, 353, 3, 499, 500, 147, 148, 151, 152, 153, 145 और 341 व कुछ अन्य अधिनियमों के तहत हैं। वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के खिलाफ सबसे ज्यादा कुल 22 मामले शपथपत्र में घोषित हैं जिनमें तीन गंभीर मामले हैं और केरल के मुख्यमंत्री ने कुल 11 मामले घोषित किए हैं जिसमें एक गंभीर आपराधिक मामला है।

मामलों की प्रकृति पर सवाल करने पर एडीआर व नेशनल इलेक्शन वॉच के संस्थापक सदस्य प्रोफेसर जगदीप छोंकर ने कहा, ‘मामले राजनीतिक प्रकृति के हैं या नहीं यह तो अदालत ही तय कर सकती है क्योंकि आइपीसी में ऐसा कुछ जिक्र नहीं हैं, लेकिन हमारा उद्देश्य है कि जनता जागरूक हो, उसे पता चले कि कैसे लोग चुन कर संसद या विधानसभाओं में जा रहे हैं और उनके प्रदेश का नेतृत्व कर रहे हैं। क्योंकि चुनाव लड़ने वाला शपथ लेकर कह रहा है कि उसके खिलाफ ऐसे मामले हैं’। उन्होंने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि राजनीतिक दल टिकट देते वक्त सिर्फ यह देखते हैं कि अभ्यर्थी जीतेगा या नहीं। वह कैसे जीतेगा, धनबल या बाहुबल से, यह कोई नहीं देखता, जबकि जमीनी स्तर पर काम कर रहे लोगों को टिकट मिलना चाहिए। इसी रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि कौन से मुख्यमंत्री का धनबल कितना है। इस दौड़ में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू लगभग 177 करोड़ की घोषित चल-अचल संपत्ति के साथ पहले स्थान पर हैं, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू लगभग 129 करोड़ की कुल संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर हैं और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह लगभग 48 करोड़ की घोषित संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पास दो करोड़ के लगभग चल-अचल संपत्ति है और वे 31 मुख्यमंत्रियों में 19वें स्थान पर हैं। सबसे कम संपत्तियों की घोषणा त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्रियों ने की है।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक सरकार ने सबसे कम लगभग 26 लाख की कुल संपत्ति घोषित की है। देश में मात्र 19 फीसद यानि 6 मुख्यमंत्रियों के पास एक करोड़ से कम की घोषित संपत्ति है। जबकि, 55 फीसद यानि 17 मुख्यमंत्रियों के पास एक से 10 करोड़ के बीच घोषित संपत्ति है। रिपोर्ट में मुख्यमंत्रियों की शैक्षणिक योग्यता का भी विश्लेषण किया गया है जिसके मुताबिक 31 में से 12 मुख्यमंत्री स्नातक डिग्रीधारी, 10 ग्रेजुएट प्रोफेशनल, 5 पोस्ट ग्रेजुएट, एक डॉक्टरेट और 3 बारहवीं पास हैं।

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