दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के तत्कालीन आधिकारिक निवास, 6 फ्लैगस्टाफ रोड में नवीनीकरण का काम 33.66 करोड़ रुपए में पूरा हुआ, जो अनुमानित लागत से 342 फीसद अधिक था। इसका खुलासा विधानसभा में सोमवार को पेश की गई कैग रपट में हुआ।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा विधानसभा में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की 2022 की रपट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 33.66 करोड़ रुपए में से 18.88 करोड़ रुपए ‘महंगी, कलात्मक और सजावटी’ वस्तुओं पर खर्च किए गए थे। फ्लैगस्टाफ रोड स्थित बंगला को भाजपा ‘शीश महल’ करार देते हुए केजरीवाल और उनकी सरकार पर हमले करती थी।

इस आवास में केजरीवाल 2015 से 2024 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में रहे। इसके अलावा अतिरिक्त कार्यों के लिए निविदा जारी करने पर भी विचार नहीं किया। रपट में यह भी बताया गया कि पीडब्ल्यूडी द्वारा बंगले में अतिरिक्त कमरे उपलब्ध कराने के साथ-साथ वहां स्थित शिविर कार्यालय और स्टाफ ब्लाक में किए गए बदलावों में कई अनियमितताएं पाई गईं।

रिपोर्ट में कहा गया कि 9.34 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति और व्यय की मंजूरी काम पूरा होने के दो महीने से अधिक समय बाद दी गई, जिससे बिना किसी पूर्व अनुमति के ही देनदारी उत्पन्न हो गई। कैग की रपट के अनुसार, आडिट में पाया गया कि स्टाफ ब्लाक और शिविर कार्यालय के निर्माण के लिए स्वीकृत 19.87 करोड़ रुपए में से धनराशि को अन्य कार्यों में लगा दिया गया।

स्टाफ ब्लॉक का निर्माण नहीं हुआ और उस धनराशि से सहायकों के लिए सात क्वार्टर एक ऐसे स्थान पर बनाए गए जो मूल कार्य से संबंधित नहीं था। कैग रपट में कहा गया कि शिविर कार्यालय का स्वरूप स्थायी से अर्द्ध-स्थायी ढांचा (एसपीएस) में बदल दिया गया था। अंततः, कोष खत्म हो जाने के कारण शिविर कार्यालय की केवल कच्ची संरचना ही पूरी हो सकी, और जून 2023 में पीडब्ल्यूडी द्वारा काम बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।