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क्वारैंटाइन सेंटरों में 48 घंटे के अंदर 3 बच्चियों की मौत, अधिकारी बोले- भीड़ और गर्मी की वजह से गई जानें

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने कहा है कि प्रवासी मजदूरों के बड़ी संख्या में राज्य लौटने से सिस्टम पर बोझ बढ़ा है।

Author रायपुर | Updated: May 29, 2020 10:10 AM
लॉकडाउन में रियायत मिलने के बाद से ही बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों का अपने गृह राज्य लौटना जारी है। (फोटो- जसबीर मल्ही)

छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पिछले 24 घंटे में ही यहां 34 नए केस आने के साथ अब कुल पीड़ितों की संख्या 400 के करीब पहुंच गई है। हालांकि, इन बढ़ते केसों ने छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार की तैयारियों और इंतजामों की पोल खोलनी भी शुरू कर दी है। पिछले 48 घंटों में ही यहां क्वारैंटाइन सेंटरों में रखे गए 3 बच्चों की मौत हो गई है। यह तीनों घटनाएं अलग-अलग केंद्रों की हैं। मरने वाली सभी लड़कियां हैं, जिनमें दो नवजात थीं।

इन घटनाओं पर अधिकारियों का कहना है कि दो बच्चों की मौत बुधवार को सांस लेने में दिक्कत की वजह से हुई। अफसरों का मानना है कि क्वारैंटाइन सेंटरों में गर्मी और भीड़भाड़ की वजह से बच्चियों की जान गई है। इसके अलावा एक चार महीने की बच्ची की पिछले कुछ दिनों से तबियत खराब थी और गुरुवार को अचानक हालत बिगड़ने के बाद उसकी मौत हो गई। अभी उसके कोरोना टेस्ट का नतीजा आना बाकी है।

सूत्रों का कहना है कि तीन बच्चियों में से दो- एक 18 महीने और एक 4 महीने की बच्ची बुरी तरह कुपोषित थीं। जान गंवाने वाली यह सभी बच्चियां प्रवासी मजदूरों की थीं, जो लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद राज्य पहुंचे थे।

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स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने भी अफसरों की बात दोहराते हुए कहा कि क्वारैंटाइन सेंटर में गर्मी और भीड़भाड़ से ही बच्चियों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि अगर इन केंद्रों में कोई कमी की रिपोर्ट सामने आती है, तो अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने माना कि छत्तीसगढ़ के सिस्टम पर बड़ी संख्या में लौट रहे प्रवासी मजदूरों की वजह से बोझ बढ़ गया है।

बलोद जिले में गुरुवार को जिस बच्ची की मौत हुई है, वह हाल ही में महाराष्ट्र के चंद्रपुर से अपने परिवार के साथ ट्रक में बैठकर लौटी थी। बच्ची के चाचा योगश्वर निषाद का कहना है कि उनकी बेटी की तबियत लंबे समय से खराब थी और स्वास्थ्यकर्मी लगातार उसकी निगरानी कर रहे थे। 26 मई को उन्होंने बच्ची को अस्पताल ले जाने के लिए कहा, लेकिन पूरे दिन किसी ने उनकी सुध नहीं ली। बाद में उन्हें भाई से पता चला कि उनकी बेटी की मौत हो गई है। फिलहाल बच्ची के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।

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