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Chattisgarh: पारले जी के प्लांट से काम कर रहे थे 26 बाल मजदूर, पुलिस ने कराए रिहा

जिला बाल संरक्षण अधिकारी नवनीत स्वर्णकार के बताया कि पिछले छह दिन में 51 बाल मजदूरों को जिले में रिहा कराया गया। यह छापेमारी विश्व बाल मजदूर दिवस अभियान के तहत की गई।

child labourप्रतीकात्मक फोटो (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

नामी बिस्किट ब्रांड पारले-जी के छत्तीसगढ़ स्थित प्लांट से 26 बाल मजदूरों को रिहा कराने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि बाल श्रम के खिलाफ विश्व बाल मजदूर दिवस 12 जून को मनाया गया था। इसके तहत राज्य में अलग-अलग जगहों पर छापे मारे गए थे। इसी छापे में पारले-जी की अमासिवनी फैक्ट्री में नाबालिग बच्चे काम करते मिले, जिन्हें रिहा करा लिया गया। पुलिस ने सभी 26 बाल मजदूरों को बाल सुधार गृह भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक, देश के अन्य राज्य जैसे ओडिशा, मध्य प्रदेश और झारखंड से आए बाल मजदूर यहां काम करते थे। इस मामले में फैक्ट्री मालिक के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।

अधिकारियों को मिली थी खुफिया जानकारीः विधानसभा एसएचओ अश्विनी राठौर के मुताबिक, इस मामले में बाल मजदूर ऑफिसर को खुफिया जानकारी मिली थी कि पारले-जी की अमासिवनी फैक्ट्री में बच्चों से मजदूरी कराई जा रही है। पुलिस ने वहां छापा मारा और 26 बाल मजदूरों को छुड़ा लिया। पुलिस ने यह कार्रवाई शनिवार (15 जून) को की। सभी बाल मजदूरों की उम्र 13 से 17 साल बताई जा रही है।

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6 दिन में 51 बाल मजदूर रिहाः जिला बाल संरक्षण अधिकारी नवनीत स्वर्णकार के बताया कि पिछले छह दिन में 51 बाल मजदूरों को जिले में रिहा कराया गया। यह छापेमारी विश्व बाल मजदूर दिवस अभियान के तहत की गई। गौरतलब है कि पारले-जी ने भी एक समाजिक पहल की है। इसके ऐड में लिखा है ‘डिजाइन फॉर चेंज, बच्चों द्वारा बच्चों के लिए सबसे बड़ा वैश्विक आंदोलन’। हालांकि, कंपनी के प्लांट में बाल मजदूरी का मामला सामने आने के बाद कंपनी की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

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12 घंटे की ड्यूटी के बाद मिलते थे 5 से 7 हजार रुपएः रिहा हुए बाल मजदूरों ने पुलिस को बताया कि उनसे 12 घंटे काम कराया जाता था। साथ ही, वेतन में हर महीने 5 से 7 हजार रुपए ही दिए जाते थे। एनजीओ बचपन बचाओ आंदोलन के स्टेट कोऑर्डिनेटर संदीप कुमार राव ने उम्मीद जताई कि आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 3, 3ए, 14 और 370 के तहत कार्रवाई होगी।

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